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Saturday, October 31, 2020

लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती...........

देवेश प्रताप सिंह 

(राठौर स्वतंत्र)

......... भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म i अक्टूबर 1875 को गुजरात में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा काल में ही उन्होंने एक ऐसे अध्यापक के विरुद्ध आंदोलन खड़ाकर उन्हें सही मार्ग दिखाया जो अपने ही व्यापारिक संस्थान से पुस्तकें क्रय करने के लिए छात्रों के बाध्य करते थे।

 सन्‌ 1908 में वे विलायत की अंतरिम परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास कर बैरिस्टर बन गए। फौजदारी वकालत में उन्होंने खूब यश और धाक जमाई। महात्मा गांधी ने जब पूरी शक्ति से अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन चलाने का निश्चय किया तो पटेल ने अहमदाबाद में एक लाख जन-समूह के सामने लोकल बोर्ड के मैदान में इस आंदोलन की रूपरेखा समझाई।उन्होंने पत्रकार परिषद में कहा, ऐसा समय फिर नहीं आएगा, आप मन में भय न रखें। चौपाटी


पर दिए गए भाषण में कहा, आपको यही समझकर यह लड़ाई छेड़नी है कि महात्मा गांधी और अन्य नेताओं को गिरफ्तार कर लिया  जाएगा तो आप न भूलें कि आपके हाथ में शक्ति है कि 24 घंटे में ब्रिटिश सरकार का शासन खत्म हो जाएगा और सरदार पटेल की जयंती के अवसर पर सरदार पटेल के बारे में कुछ बताना चाहता हूं सरदार बल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 में हुआ था उनको भारतीय गणराज्य के संस्थापक पिता के रूप में भी जाना जाता है उन्हें अक्सर हिंदी उर्दू और फारसी में सरदार कहा जाता था जिसका अर्थ होता है "प्रमुख"। सरदार पटेल भी महात्मा गांधी की तरह ही शिक्षित थे उन्होंने लंदन जाकर बैरिस्टर की पढ़ाई की और वापस आकर अहमदाबाद में वकालत करने लगे आजादी के बाद अधिकांश प्रांतीय  कांग्रेस समितियां पटेल के पक्ष में थे गांधी जी की इच्छा का आदर करते हुए पटेल जी ने प्रधानमंत्री पद की दौड़ से अपने को दूर रखा उसके लिए नेहरू को ही समर्थन कर दिया उन्हें प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री के का सौंपा गया किंतु इसके बाद भी नेहरू ने पटेल से संबंध खराब ही रखने की कोशिश की । गृह मंत्री के रूप में उनकी पहली प्राथमिकता देसी रियासतों को भारत में मिलाना था और उन्होंने यही किया भी। इसीलिए उन्हें भारत के एकीकरण में महान योगदान के लिए जाना जाता है और भारत का लोहय पुरुष कहा जाता है। स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू एवं प्रथम उप प्रधानमंत्री सरदार पटेल में जमीन - आसमान का अंतर था यघपि दोनों ने इंग्लैंड जाकर बालिस्टरी की डिग्री प्राप्त की थी परंतु सरदार पटेल वकालत में पंडित नेहरू से बहुत आगे थे तथा उन्होंने संपूर्ण ब्रिटिश सम्राट के विद्यार्थियों में सर्व प्रथम स्थान प्राप्त किया था नेहरू शास्त्रों के ज्ञाता थे तो पटेल शास्त्रों के पुजारी थे पटेल ने भी उच्च शिक्षा पाई थी परंतु उन्हें अहंकार किंचित भी नहीं था वे गरीब किसान के खेत एवं शहरों के गंदो मकानों में लोगों के मध्य जाकर अपना जीवन व्यतीत करते थे वहीं पर पंडित नेहरू को गांव की गंदगी तथा उनके जीवन से घृणा थी। पंडित नेहरू अंतरराष्ट्रीय ख्याति के इच्छुक थे जबकि सरदार वल्लभभाई पटेल अपने देश को  ही विकसित करना चाहते थे आजादी के बाद सरदार पटेल जहां पाकिस्तान की चालाकी से पूर्ण सतर्क थे वहीं पर चीन की चालबाजी से भी पंडित नेहरू को अवगत कराते थे उन्होंने पंडित नेहरू को एक पत्र में लिखा था तिब्बत पर चीन का कब्जा नई समस्याओं को जन्म देगा और आज यह हो भी रहा है किंतु पंडित नेहरू ने उस समय उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया था निश्चित ही सरदार वल्लभभाई पटेल का जो योगदान रहा कहीं ना कहीं उस योगदान को हम लोगों से छुपाया गया है परंतु मोदी सरकार में सरदार वल्लभ भाई पटेल को उनके योगदान के लिए सम्मान देने की कोशिश की गई मोदी सरकार में उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल की विशाल प्रतिमा बनाई जो 240 मीटर है जिससे हम लोग स्टैचू ऑफ यूनिटी के नाम से भी जानते।

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