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Sunday, October 25, 2020

नवरात्रि विशेष: मां शारदा मंदिर के चमत्कारी रहस्य के आगे विज्ञान भी हैरान

मंदिर के पट खुलते ही ताजा फूल तथा पूजा की हुई मिलती है

  प्रवीण चौरसिया

सतना। भारत में लाखों मंदिर हैं लेकिन उनमें से कुछ मंदिर ऐसे हैं जिनका रहस्‍य जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे । वर्तमान में भी देश में कई ऐसे मंदिर मौजूद हैं जिनकी महिमा दूर –दूर तक है, इन मंदिरों का रहस्‍य आज तक कोई नहीं जान पाया है। आज हम आपको मां शारदा मंदिर की जानकारी देंगे, जहां आज भी आल्हा करते हैं आरती, पर दिखाई नहीं देते।

सतना जिले के मैहर में त्रिकूट पर्वत पर मां शारदा का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह न सिर्फ आस्था का केंद्र है, अपितु इस मंदिर के विविध आयाम भी हैं। इस मंदिर की चढ़ाई के लिए 1063 सीढ़ियों का सफर तय करना पड़ता है। मां शारदा माई के इस मंदिर की ख्याति देश-विदेश तक फैली है। जिससे मां के दर्शन के लिए प्रतिदिन लाखों की भारी भीड़ जमा हो रही है। यहां माता के दर्शन के लिए भक्तों का रेला रगा रहता है।


मंदिर के पुजारी पवन महाराज ने बताया कि शाम की आरती होने के बाद मंदिर के कपाट बंद करके सभी पुजारी नीचे आ जाते हैं। तब यहां मंदिर के अंदर से पूजा करने की आवाज आती है। उन्होंने बताया कि मां के भक्त आल्हा अभी भी पूजा करने आते हैं। अक्सर सुबह की आरती वे ही करते हैं। इस मंदिर की रहस्यता का अंदाजा महज इस बात से लगाया जा सकता है कि जब सुबह मंदिर का ताला खोलते हैं, तो एक ताजा फूल देवी की प्रतिमा पर चढ़ा हुआ मिलता है.लेकिन मंदिर खोलने पर कोई नहीं दिखाई देता। 

कई बार जांचने की कोशिश की गई लेकिन असफलता ही हाथ लगी। मंदिर के पुजारी पवन महाराज बताते हैं कि अभी भी मां का पहला श्रृंगार आल्हा ही करते हैं और जब ब्रह्म मुहूर्त में शारदा मंदिर के पट खोले जाते हैं तो पूजा की हुई मिलती है। इस रहस्य को सुलझाने हेतु वैज्ञानिकों की टीम भी डेरा जमा चुकी है लेकिन रहस्य अभी भी बरकरार है।

रात्रि 2 से 5 बजे के बीच बंद रहता है मंदिर 

मैहर माता का मंदिर सिर्फ रात्रि 2 से 5 बजे के बीच बंद किया जाता है, इसके पीछे एक बड़ा रहस्य छुपा है। ऐसी मान्यता है कि आल्हा और ऊदल आज  इतने वर्षों के बाद भी माता के पास आते हैं। रात्रि 2 से 5 बजे के बीच आल्हा और ऊदल रोज मंदिर में आकर माता रानी का सबसे पहले दर्शन करते हैं और माता रानी का पूरा श्रृंगार करते हैं।मंदिर के पीछे पहाड़ों के नीचे एक तालाब है, जिसे आल्हा तालाब कहा जाता है। यही नहीं, तालाब से 2 किलोमीटर और आगे जाने पर एक अखाड़ा मिलता है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां आल्हा और उदल कुश्ती लड़ा करते थे। 

पहाड़ में गायब हो गई

इसी प्रकार मंदिर के पुजारी पवन महाराज के पिता देवी प्रसाद शास्त्री जी ने बताया कि उनके साथ अनेकों चमत्कारी रहस्य घट चुके हैं। उन्होंने बताया कि मैं सन्ध्या की आरती करके जैसे ही नीचे उतरा। इसी बीच 5 से 6 वर्ष की कन्या अकेले मां के वस्त्रो जैसे सजी हुई थी, लेकिन उसका मुंह दूसरी दिशा में था। मैं जैसे ही उस कन्या के पास गया तो वह और आगे बढ़ गई। मेरे देखते ही देखते वह पहाड़ में गायब हो गई। उन्होंने बताया कि मां अपने भक्तों को किसी भी रूप में दर्शन दे सकती है।

 इनका कहना है....

हम अपने पिता जी के पद चिन्हों पर चलते हुए और उनसे अधिक से अधिक दैवीय शक्ति का अर्जन कर भक्तजनों को  उपलब्ध कराने का प्रयास करता रहूंगा।ये हमारे पूर्व जन्मों का ही फल है कि मुझे मां शारदा की सेवा करने का मौका मिला है।

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