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Wednesday, October 14, 2020

लाला हरदयाल को नही भुलाया जा सकेगा

हमीरपुर, महेश अवस्थी  । वर्णिता संस्था सुमेरपुरके तत्वावधान में, जिनका देश ऋणी है कि तहत गदर पार्टी के संस्थापक बौद्धिक क्रांतिकारी लाला हरदयाल की जयंती पर संस्था के अध्यक्ष डॉक्टर भवानीदीन ने कहा कि लाला हरदयाल सच्चे अर्थों में एक ऐसे भारत मां के सपूत थे ,जिन्होंने बहुत कम उम्र में विदेशों में जाकर देश की आजादी के लिए बहुत बड़ा काम किया । लाला हरदौल का जन्म 14 अक्टूबर 1884 को दिल्ली में हुआ था, इनके पिता गौरी दयाल माथुर और मां का नाम फूलारानी था । इनकी शिक्षा दिल्ली और पंजाब में हुई । उन्होंने पंजाब से संस्कृत में एम ए. किया और जितने अंक प्राप्त किए उसका कोई रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाया। इसी आधार पर गोरी सरकार ने इन्हें 200


पौन्ड की  छात्रवृत्ति प्रदान की और इसी आधार पर लाला हरदयाल अमरीका गए । वहां पर जाकर अनेक भारतीय सपूतों से संपर्क किया  । वहां गदर पार्टी की स्थापना की और उसके बाद यह भारत आना चाहते थे, 1939 में जब भारत आ रहे थे । इनकी रास्ते में रहस्यमय ढंग से मृत्यु हो गई । इनका निधन 4 मार्च 1939 को हुआ, इनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता है। कार्यक्रम में अवधेश कुमार गुप्ता एडवोकेट, कल्लू चौरसिया, सिद्ध गोपाल, व्यापारी अवधेश कुमार गुप्ता ,अरविंद कुमार, प्रमोद कुमार, अजयगुप्ता उपस्थित रहे ।


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