जिसके साथ भगवान हो उसे डरने की जरूरत क्या...... - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Thursday, October 29, 2020

जिसके साथ भगवान हो उसे डरने की जरूरत क्या......

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

(वरिष्ठ पत्रकार)

..... हम बात करते हैं आप सुनते होंगे कि बरसात में इतनी चल अचल संपत्ति बरसात में बह गई है । आप सुनते होंगे टुबेल के बोरिंग में 3 साल या 4 साल का बच्चा गिर गया जिसे मिलिट्री एवम् जिला प्रशासन के सहयोग से निकाला और बच्चा वच गया , बहुत सी हकीकत ओं के बावजूद जब ऐसे घटनाओं पर जीवन बच  जाता है। तब हम यही कहते हैं जाको राखे साइयां मार सके ना कोई आपको एक सच्ची घटना इस पर विचार करें और इस को समझने का प्रयास करें वह मैं बताने जा रहा हूंबहुत समय पहले की बात है। किसी गांव में एक किसान रहता था। उसके पास बहुत सारे जानवर थे, उन्हीं में से एक गधा भी था। एक दिन वह चरते-चरते खेत में बने एक पुराने सूखे हुए कुएं के पास जा पहुंचा और अचानक ही उसमें फिसल कर गिर गया। गिरते ही उसने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू किया-‘ढेंचू-ढेंचू, ढेंचू-ढेंचू...’। उसकी आवाज सुन कर खेत में काम कर रहे लोग कुएं के पास पहुंचे और


किसान को भी बुलाया गया।किसान ने स्थिति का जायजा लिया। उसे गधे पर दया तो आई लेकिन उसने मन में सोचा कि इस बूढ़े गधे को बचाने से कोई लाभ नहीं है और इसमें मेहनत भी बहुत लगेगी, साथ ही कुएं की भी कोई जरूरत नहीं है। उसने बाकी लोगों से कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि हम किसी भी तरह इस गधे को बचा सकते हैं अत: आप सभी अपने-अपने काम पर लग जाइए, यहां समय गंवाने से कोई लाभ नहीं।’’ऐसा कह कर वह आगे बढऩे को ही था कि एक मजदूर बोला, ‘‘मालिक, इस गधे ने वर्षों तक आपकी सेवा की है, इसे इस तरह तड़प-तड़प कर मरने देने से अच्छा होगा कि हम उसे इसी कुएं में दफना दें।’’किसान ने भी सहमति जताते हुए उसकी हां में हां मिला दी। ‘‘चलो हम सब मिलकर इस कुएं में मिट्टी डालना शुरू करते हैं और गधे को यहीं दफना देते हैं’’,  किसान बोला।गधा ये सब सुन रहा था तथा अब वह और भी डर गया। उसे लगा कि कहां उसके मालिक को उसे बचाना चाहिए, उलटे वे लोग उसे दफनाने की योजना बना रहे हैं परंतु उसने हिम्मत नहीं हारी और भगवान को याद कर वहां से निकलने के बारे में सोचने लगा।अभी वह अपने विचारों में खोया ही था कि अचानक उसके ऊपर मिट्टी की बारिश होने लगी। गधे ने मन ही मन सोचा कि भले कुछ भी हो जाए वह अपना प्रयास नहीं छोड़ेगा और आसानी से हार नहीं मानेगा। वह पूरी ताकत से उछाल मारने लगा। किसान ने भी औरों की तरह मिट्टी से भरी एक बोरी कुएं में झोंक दी और उसमें झांकने लगा। उसने देखा कि जैसे ही मिट्टी गधे के ऊपर पड़ती वह उसे अपने शरीर से झटकता और उछल कर उसके ऊपर चढ़ जाता।  किसान भी समझ चुका था कि अगर वह यूं ही मिट्टी डलवाता रहा तो गधे की जान बच सकती है। फिर क्या था, वह मिट्टी डलवाता गया और देखते-देखते गधा कुएं के मुहाने तक पहुंच गया और अंत में कूद कर बाहर आ गया। जिसको ईश्वर बचा सकता है उसको कौन किसकी हिम्मत है जो उसे मार सकता है इसलिए ईश्वर के प्रति आस्था विश्वास ही सबसे बड़ा शब्दों में कहा जा सकता है जाको राखे साइयां मार सके ना कोए,बाल न बांका कर सके जो जग बैरी होय..।

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages