मानसिक अस्वस्थता में दुआ के साथ की दवा भी जरूरी - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Advt.

Wednesday, October 14, 2020

मानसिक अस्वस्थता में दुआ के साथ की दवा भी जरूरी

कम्हरिया  में लगा मानसिक स्वास्थ्य  शिविर

हमीरपुर, महेश अवस्थी  । मौदहा तहसील के कम्हरिया गांव में मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत  एक दिवसीय शिविर में मानसिक रोगों के प्रकार और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। वक्ताओं ने दवा और दुआ दोनों के महत्व पर प्रकाश डाला। शिविर में दो दर्जन से अधिक मरीजों ने पंजीकरण कराकर परामर्श लिया।

शिविर का उद्घाटन मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.आरके सचान ने किया। उन्होंने कहा कि मेडिकल साइंस ने आज बहुत तरक्की की है। पहले जिन रोगों का उपचार नहीं हो पाता था, आज उनका समुचित उपचार संभव हो पाया है। हजारों-लाखों लोग मानसिक बीमारियों से उबरकर अच्छा जीवन जी रहे है। उन्होंने कहा कि जब दुआ और दवा साथ चलेंगी, तो कोई भी बीमारी हो, वह ठीक हो जाएगी। बस दुआ के साथ दवा से मुंह नहीं मोड़ना है । नोडल अधिकारी डॉ.महेशचंद्रा ने कहा कि समाज में मानसिक रोगियों के साथ अच्छा बर्ताव नहीं किया जाता, यह

कम्हरिया गांव में लगे मानसिक स्वास्थ्य शिविर में मरीजों को परामर्श देते डॉक्टर।

गलत है। मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति एक रोगी है, जिसका उपचार संभव है। उन्होंने मानसिक रोगियों के उपचार और परामर्श के लिए जिला अस्पताल के मनकक्ष के हेल्पलाइन नंबर 05282-298180 की जानकारी दी। साइको थैरिपिस्ट डॉ.नीता ने बताया कि मानसिक रोग कई प्रकार के होते है। अवसाद के मामले कुछ समय से ज्यादा तेजी से बढ़े हैं। उन्होंने शरीर का वजन घटना, अकेलापन, लोगों से मिलना-जुलना कम, भूख न लगना, अपने आप में रहना, नींद न आना, काम में रुचि कम होना अवसाद के कारण होते है। मिर्गी का दौरा भी मानसिक रोग है। इस अवस्था में मरीज चलते-फिरते अचानक गिर जाता है और मुंह से झाग आने लगता है। क्रिरसोफेनियर एक ऐसी अवस्था होती है, जिसमें मरीज को तरह-तरह की आवाजें महसूस होती है। शक करना शुरू कर देता है, काल्पनिक दुनिया में चला जाता है। डॉ.नीता ने बताया कि कुछ बीमारियां जन्मजात होती हैं, जैसे जन्म से विकास कम होना, बौद्धिक क्षमता कम होना, रुपए-पैसे न पहचान पाना, स्वयं की देखभाल न कर पाना। उन्होंने कहा कि यह सब मानसिक बीमारियों की अवस्थाएं हैं। अक्सर हम इन्हें बीमारी न मानकर ऊपरी हवा या भूत-प्रेत के चक्कर में उलझकर इलाज नहीं कराते हैं। जबकि इन बीमारियों का उपचार संभव है और लोग ठीक हो जाते हैं। मौदहा सीएचसी के अधीक्षक डॉ.एके सचान, एनएचएम के डीपीएम सुरेंद्र साहू, आशा बहू, एएनएम सहित स्वास्थ्य विभाग का अमला मौजूद रहा।


No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages