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Friday, October 23, 2020

कृषि क्षेत्र में उद्यमिता विकास की अपार संभावनाएं

केचुआ खाद उत्पादन के 30 दिवीसय प्रशिक्षण समापन पर बोले कुलपति 

बांदा, के एस दुबे । कृषि का क्षेत्र बहुत ही व्यापक है। कृषि मे विभिन्न घटको का अपना महत्व हैं। भारतवर्ष ही नही पूरे विश्व में कृषि एवं कृषि से संबन्धित विविधिता देखने को मिलती है। इन्ही विविधिताओ के चलते हमे अवसर भी मिलते है। आवश्कता है उस अवसर को समय के साथ अपने रचनात्मक सुझाव व अनुभव से लाभ मे परिवर्तित करना। बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र मे कृषि के क्षेत्र मे भी विविधिता बहुत है। प्रशिक्षित युवा एवं उद्यमि कृषक इस अवसर का लाभ उठा सकते है। वैश्विक स्तर पर जैविक उत्पाद की मांग निरंतर बढती जा रही है और यही आने वाले समय की पहचान होगी कि कृषक अपने उत्पाद को जैविक विधि से तैयार किया है कि नही। यह विचार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. यू.एस. गौतम ने केचुआ खाद उत्पादन के 30 दिवसीय प्रशीक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह मे बतौर मुख्य अतिथि रखी। 

प्रशिक्षणार्थी को प्रमाण पत्र सौंपते कुलपति यूएस गौतम व मौजूद प्रशिक्षणार्थीगण

डा. गौतम ने सभी प्रशीक्षणार्थियों को किट के रूप मे बैग, टी शर्ट, वेस्ट डीकम्पोजर, केचुआ कल्चर, फाइल पेन, टोपी, तथा विभिन्न फूलो के बीज वितरित किये गये। जिस पर पी.एम.के.वी.वाई छपा हुआ है। इस कार्यक्रम मे मुख्य प्रशीक्षक डा. अरबिन्द कुमार गुप्ता ने बताया कि यह प्रशिक्षण 22 सितम्बर को शुरू हुआ था। जिसमे कुल 25 प्रशिक्षको ने भाग लिया। इस प्रशिक्षण के दौरान कुल 36 व्याख्यान कराये गये जिसमे विश्वविद्यालय के कृषि, उद्यान, वानिकी महाविद्यालयों के विभिन्न विषयों के विशेषज्ञो ने तथा कृषि विभाग, बांदा उ0प्र0 द्वारा अपने ज्ञान साझा किये। इसके अलावा योगा, जैविक खेती, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, पशुधन प्रबंधन, एवं केचंआ खाद विपणन के बारे मे विस्तार से बताया गया। डा. गुप्ता ने बताया कि बुन्देलखण्ड से संबन्धित समस्यओं जैसे अन्नाप्रथा, सूखा, मृदा तथा जैविक खाद उत्पादन मे आने वाली समस्याओं को भी विस्तार से बताया गया। उसका नियंत्रण भी बताया। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षुओ के विश्वविद्यालय को विभिन्न इकाइायो जैसे आई.एफ.एस. माडल, मशरूम यूनिट, वर्मीकम्पोस्ट यूनिट, मेडिकल एण्ड एरोमेटिक ब्लाक, नर्सरी का भी भ्रमण कराया। बायफ के जिला कार्यक्रम अधिकारी डा. सुभाष राजपूत को भी लेक्चरर के लिए आमंत्रित किया गया जिसमे उन्होने कृषि गोवर्धन के माध्यम से पशुओ के नस्ल सुधार के लिए विस्तार से बताया। अधिष्ठाता उद्यान डा. एस.वी. द्विवेदी ने बताया कि इस प्रशीक्षण कार्यक्रम से हमे अपने गौ माता, धरती माता तथा अपनी माता सभी का ध्यान रखने और उन्हे स्वस्थ्य बनाने उपयोगी शिद्ध होगाह। केचुआ खाद उत्पादन से उद्यमिता विकास के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य जन मानस के स्वास्थ्य तथा प्रदूषित वातावरण से भी छुटकारा मिल सकता है। प्रो0 मुकुल कुमार ने कृषि प्रसार विभाग द्वारा कराये जा रहे प्रशीक्षण कार्यक्रमो की सराहना की तथा कहा कि हर कार्यक्रम सुनियोजित और ज्ञान वर्धक होता है। सह अधिष्ठाता वानिकी डा. संजीव कुमार ने कहा कि 30 दिन का प्रशीक्षण कार्यक्रम मे प्रयोागिक क्रियाकलापो से करके सीखने का महत्व और भी बढ जाता है। कृषि प्रसार के विभागाध्यक्ष डा. भानु प्रकाश मिश्रा ने बताया कि प्रशक्षित युवा अगर केचुआ खाद उत्पादन मे बढना चाहते है तो उनके लिये यह बुन्देखण्ड क्षेत्र बहुत ही अनुकूल जगह होगी। आने वाले समय मे तथा कुलपति के निर्देशन मे बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र को जैविक हब के रूप मे विकसित किये जाने का सफल प्रयास किया जा रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त ज्ञानेन्द्र सिंह ने इस प्रशिक्षण को बहुत उपयोगी और सफल बताया। प्रमोद ने इसे ज्ञान वर्धक के साथ-साथ रोजगार परक और गांवो के हर व्यक्ति द्वारा किये जाने वाला कार्य बताया। कार्यक्रम का संचालन डा. धीरज मिश्रा ने किया। इस अवसर पर सह प्रशीक्षक डा. देव कुमार, डा. श्याम सिंह, डा. बीके गुप्ता, डा. पंकज ओझा, डा. अभिषेक कालिया, डा. मानवेन्द्र सिंह, तथा सभी प्रशिक्षु उपस्थित रहे।


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