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Wednesday, October 28, 2020

पैगम्बरे इस्लाम से मोहब्बत ही ईमान है: कारी फरीद

फतेहपुर, शमशाद खान । मुस्लिम समाज के लोग कदीम जमाने से जिन अय्याम (दिनों) व शआयरे इस्लाम (निशानियों) की याद मानते चले आये हैं। उन्हीं में से एक खास दिन पैगम्बरे इस्लाम की यौमे विलादत (पैदाइश का दिन) है। जो अवाम में ईद मिलादुननबी के नाम से मशहूर है। यह बात काजी-ए-शहर कारी फरीद उद्दीन कादरी ने कही। 

काजी-ए-शहर कारी फरीद उद्दीन कादरी।

श्री कादरी ने कहा कि पैगम्बरे इस्लाम कयामत तक के मनुष्यों के लिए नबी व मार्ग दर्शक बनाकर भेजे गये हैं। उनकी शिक्षा विश्व शांति का मूल मंत्र है। हम अपने नबी का जन्मदिन मनाकर सम्पूर्ण मानव जाति कोे विश्व में भाईचारा व अम्न का पैगाम देते हैं। पैगम्बरे इस्लाम का जन्मदिन अंधेरे से उजाले, जुल्म से प्रेम, हिंसा से अहिंसा, आतंकवाद पर अम्न व चैन असमाजिकता पर समाजिकता की विजय का दिन है। क्योंकि इसी दिन पैगम्बरे इस्लाम इस दुनिया में तशरीफ लाये जो सारी कायनात के लिए रहमत हैं। जिनकी याद उस वक्त तक भुलाई नहीं जा सकती जब तक कि दुनिया कोे इंसानियत, मोहब्बत, भाईचारा, हमदर्दी, सच्चाई की जरूरत है। इसलिए जश्ने चेरागा के मौके पर घरों, दुकानों, मस्जिदों, खानकाहों व मदरसों को सजाकर अकीदतो मोहब्बत का इजहार करें। श्री कादरी ने कहा कि कोरोना प्रकोप अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है इसलिए हुकूमत की जानिब से जारी गाइडलाइन के तहत सभी त्योहार मनाये जा रहे हैं और बारा रबीउल अव्वल का त्योहार भी गाइड लाइन के तहत मनाया जाये। त्योहार के मौके पर जलसा व जुलूस में खर्च होने वाली रकम से अपनी हैसियत के मुताबिक चंद मिस्कीनी और फकीरों को खाना खिलायें। किसी नादार बेसहारा, बेवा के लिए कपड़े या दूसरी जरूरियत जिन्दगी का इंतजाम करें। किसी गरीब या यतीम बच्चे के लिए किताबों या फीस का इंतजाम कर दें। यही मेरे नबी की सुन्नत है। खासकर मोहकमए सेहत की हिदायत और सरकार की गाइडलाइन पर अमल करें और कोई भी ऐसा काम न करें जो समाज के लिए बदनामी का सबब बने। 


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