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Thursday, October 15, 2020

शिक्षा विभाग के वरिष्ठ लिपिक रविंद्र भट्ट की आकस्मिक निधन से परिवार शोकाकुल..........................

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

(आमजा भारत महासचिव)

...... जीवन का एक सबसे बड़ा सत्य है जिसने जन्म लिया अवश्य है। मौत कोई भी हो दुखद होती है वह पल बहुत ही कष्ट दाई होते हैं। रविंद्र भट्ट की आकस्मिक निधन से मैं उनके परिवार वालों से मिला रविंद्र भट्ट की पत्नी को और उनके परिवार को मुझे एहसास है यह रविंद्र भट्ट की कमी उनकी पत्नी सहन नहीं कर पा रही है। उनकी पीड़ा दर्द को देखकर मैं समझाने की जगह सेम विचलित हो गया क्योंकि एक ऐसा व्यक्ति इस दुनिया में नहीं रहा जिसने शिक्षा विभाग में अपना एक अलग मुकाम बना रखा था। इतना अच्छा व्यवहार मैं जब सोचता हूं ईश्वर के द्वारा किए गए कार्यों पर टीका टिप्पणी नहीं करता हूं क्योंकि ईश्वर जो भी करता है। उसे हम सही मानते हैं क्योंकि ईश्वर की लीला ईश्वरी समझता है। दुख होता है जब कोई व्यक्ति आसमय चला जाता है। तो दर्द होता है तकलीफ होती है। मैं आपको बताना चाहता हूं रविंद्र भट्ट जो हमारे बड़े भाई की तरह थे और उनकी पत्नी मेरी भाभी मैं इतना ज्यादा पति


पत्नी में जो तालमेल संस्कार थे उस पीड़ा को उनके ना रहने पर उनकी पत्नी को जो आज तकलीफ है वह मैं देख कर मैं अपने आंसू नहीं रोक सका, क्योंकि मैंने हमेशा संघर्ष किया है मेरे पिताजी की मृत्यु जब मैं भी वी काम फाइनल में था मेरे पिताजी की मृत हो गई थी। मैं वर्ष तक बहुत परेशान रहा पिताजी की कमी का यहां तक कि मेरा न्यूरो फिजीशियन का इलाज चला मुझे नींद नहीं आती थी। दवाइयां खाकर सोता था मैंने वह मंजर देखा है इसलिए मैं यह कह सकता हूं ।आज हमारे बीच में हमारा भाई से भी अधिक प्रिय हमारे शुभचिंतक हमें हर संकट में हिम्मत देते थे उनकी मृत्यु आकाश मिक हो  गई, उनका बड़ा बेटा गौरव बहुत जिम्मेदार अच्छा पुत्र हैं जिसने अपने पिता के लिए जो सेवा भाव शुरू से मैंने देखा पिता के प्रति और मां के प्रति आज हुए हैं बड़ा होने के नाते भी रविंद्र भट्ट का बड़ा बेटा होने जिम्मेदारी के कारण रो रहा था कोई देख ना पाए तो आंसू रुमाल से पूछ रहे थे कहीं मम्मी ना देख ले क्यों क्यों उनकी मम्मी का तो हाल बेहाल है। आप ही कुछ मां पहले लॉकडाउन के पहले उन्होंने अपना 35 वा सालगिरह शादी की बड़ी धूमधाम से मनाई थी वह दृश्य मेरी आंखों से हटता नहीं है जब दोनों लोग कुर्सी पर बैठे थे क्या देश था मैंने कल्पना नहीं की थी कि वह व्यक्ति इतनी जल्दी जो दूसरों के सुख दुख में हमेशा खड़ा रहे जिसने हमेशा लोगों की मदद की हो वह व्यक्ति आज इतनी जल्दी इस दुनिया से चला जाएगा। कोई बीमारी नहीं करो ना नेगेटिव था। कुछ हफ्ते पहले बरसात हुई थी जिसमें भीग गए थे आप ही जाते समय वही कपड़े पहने रहे पंखे में सुख दे रहे और उन्हें निमोनिया हो गया। उनके पुत्र और परिवार ने रविंद्र भट्ट को बचाने के लिए इस दो महीने में लाखों रुपए खर्च किए कि पापा ठीक हो जाएं घर में पूरे एक कमरे को आईसीयू बना दिया सारी मशीनरी जो आईसीयू में लगती हैं वह घर के कमरे में बेटे ने उनके लगा कर रखती धीरे-धीरे रिकवरी हो रही थी। उसी बीच अचानक उनकी मृत्यु की सूचना मिली विश्वास नहीं हो रहा था ।वह जो व्यक्ति दूसरे को हिम्मत देता था हर चीज में नियम का पालन करने की बात करता था वह आज इतनी जल्दी रुठ कर हम लोगों से चला जाएगा मुझे चिंता उनके परिवार में सभी की है। मैंने रविंद्र भट्ट के बेटे से कहा बेटे तुम सबसे बड़े हो इस परिवार के घर में तुम रोना नहीं बेटा अगर तुम रहोगे तो मां और रोएगी छोटे-छोटे बच्चे हैं वह सब रोने लगेंगे तुम आंसू अपने घोट कर पी जाओ बेटा क्योंकि तुम्हें परिवार की जिम्मेदारी और पूरा ध्यान मां हो परिवार के प्रति रखना है इसलिए हिम्मत से काम लो बेटे मैंने समझाया लेकिन यह दिल हमने कैसा है और किसी के समझाने से नहीं समझता मैं अंदर अंदर रो रहा था वह तो उनका बेटा है उनका परिवार है वह क्यों नहीं रो रहा होगा मेरी ईश्वर से कामना है। उनकी आत्मा को शांति मिले इस पहाड़ जैसा दुख जो मिला है आकाश मिक तौर पर उसे सहने की हिम्मत उनके परिवार को प्रदान करें ईश्वर से हमारी कामना है।क्योंकि यह सत्य है जो पृथ्वी पर आया है उसे जाना अवश्य है हाथ समय व्यक्त कोई जाता है या समय से कोई व्यक्ति जाता है दोनों कष्ट भाई होता है । आज की युग में कोई मरना नहीं चाहता है सभी जीवन चाहते हैं।

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