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Sunday, October 11, 2020

बालिका दिवस-जरूरत है समाज मे जागरूकता की

हमीरपुर, महेश अवस्थी  । समर्थ फाउंडेसन के संयोजक देवेंद्र गांधी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को इस बात के लिए जागरूक करना है ,कि लड़कियों को भी समाज में उतनी ही अधिकार और इज़्ज़त देनी चाहिए, जितनी लड़को को मिलती है |  लड़कियों का भी पूरा अधिकार बनता है कि वह समाज में अपनी बात को रख सकें , और उन पर हो रहे किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकें |वे बालिका दिवस की संगोष्टि में कुसमरा में बोल रहे थे ।उन्होंने कहा कि यह दिन उन लोगों को भी जागरूक करने के लिए भी है, जो कि लड़कियों को सामाजिक सीमाओं में बाँध कर रखते हैं | बालिका शिशु के साथ भेद-भाव एक बड़ी समस्या है , जो कई क्षेत्रों में फैला है। जैसे शिक्षा में असमानता, पोषण, कानूनी अधिकार, चिकित्सीय देख-रेख, सुरक्षा, सम्मान, बाल विवाह। सामाजिक लोगों के बीच उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिये और समाज में लड़कियों की स्थिति को बढ़ावा देने के लिये इसे मनाया जाता है। ये बहुत जरुरी है कि विभिन्न प्रकार के सामाजिक भेदभाव और शोषण को समाज से पूरी तरह से हटाया जाये, जिसका हर रोज लड़कियाँ अपने जीवन में सामना करती हैं।


उन्हें इसकी जानकारी होनी चाहिये कि उनके पास अच्छी शिक्षा, पोषण, और स्वास्थ्य देख-भाल का अधिकार है। जीवन में अपने उचित अधिकार और सभी चुनौतियों का सामना करने के लिये उन्हें बहुत अच्छे से कानून सहित घरेलु हिंसा, बाल-विवाह रोकथाम एक्ट , दहेज रेकथाम एक्ट से अवगत होना चाहिये। हमारे देश में, महिला साक्षरता दर अभी भी 53.87 फीसदी है और युवा लड़कियों का एक-तिहाई कुपोषित हैं। आज भी भारतीय समाज के कई वर्ग हैं ,जहां लड़की को बोझ माना जाता है। जबकि लड़कों को कई विशेषाधिकार दिए जाते हैं। लड़कियों को अक्सर घर की सीमा तक ही सीमित किया जाता है और जीवन में सीखने और बढ़ने के लिए बहुत कम या कोई अवसर नहीं दिया जाता है । गांधी ने कहा कि 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, 1000 लड़कों के लिए भारत में 918 लड़कियां हैं। ऐसे परिदृश्य में, सरकार और एनजीओ की भूमिका यह सुनिश्चित करने के लिए सभी महत्वपूर्ण हो जाती है कि लड़कियों को जन्म में रहने और जीवन में उगने की अवसर दिए जाए। अधिक से अधिक लड़की बच्चों को स्कूल में भेजा जाना चाहिए, गुणवत्ता और समग्र शिक्षा प्रदान की जाती है। इसे स्थापित करने की जरूरत है कि लड़कियां लड़कों से कम नहीं हैं। जब उनकी प्रतिभा और कौशल को पोषित करने का सही मौका दिया जाता है ।

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