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Tuesday, October 6, 2020

सुशांत सिंह केस में न्याय की उम्मीद ना के बराबर ............

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

( वरिष्ठ पत्रकार)

............बाॅलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत और शिवसेना के बीच हो रहा विवाद लगातार बढ़ता ही जा रहा हैं। दोनों अपने बयानों से एक-दूसरे पर पलटवार क आरसीरने का एक भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं। हाल ही में कंगना ने मुंबई की तुलना पाक के साथ की थी जिसका विरोध करते हुए संजय रावत ने कंगना को मुंबई न आने को कहा थी। कंगना ने इस पर संजय रावत को खुली चुनौती देते हुए कहा था कि मैं 9 सितम्बर को मुबंई आ रही हूं, कोई रोक सकता है तो रोक ले। कंगना ने आरोप लगाया था कि उसे धमकियां मिल रही है जिस कारण उसे पुलिस सुरक्षा चाहिए पर वह मंबई पुलिस से सुरक्षा नहीं लेना चाहती क्योंकि उन्हें मंबई पुलिस से डर लग रहा है।अब इस मुद्दे को लेकर हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज कंगना की सपोर्ट में उतर आए है। उन्होंने संजय रावत को आड़े हाथ लेते कहा कि- मुंबई किसी के बाप की नहीं है और कंगना को पुलिस सुरक्षा मिलनी चाहिए। और केंद्र सरकार ने वाई श्रेणी की सुरक्षा कंगना रनोत को प्रदान की ,बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत केस में शुरुआत से ही बोल रहीं एक्ट्रेस कंगना रनौत, बॉलीवुड इंडस्ट्री में अपनी बेबाकी के लिए पहचानी जाती हैं, वो देश और इंडस्ट्री से जुड़े हर मुद्दे पर खुलकर अपनी राय जाहिर करती हैं। फिल्मी एक्टर्स कंगना रनौत हिमाचल प्रदेश राज्य की रहने वाली हैं और


अपनी बेवाक टिप्पणी देने के लिए मशहूर हैं। वह गलत विषय पर खुलकर उसका विरोध करती हैं। वैसे सुशांत सिंह केस जिस तरह से कार्य चल रहा है लगता है सुशांत सिंह मौत की जगह अध्यक्ष माफियाओं का भंडा फूट रहा है जबकि पूरा हिंदुस्तान जानता है हर नेता जानता है और सरकारी जानती हैं कि फिल्मी दुनिया में ड्रग्स 100% चलती है यह हम दावे के साथ पूर्व समीकरण इतिहास के पन्नों को पलट कर देखने के बाद यह निर्णय ले सकते हैं कि फिल्मी हस्तियां ड्रग्स लेती हैं। शिवसेना बहुत ही परेशानी स्थित में सरकार के मुखिया उधव ठाकरे प्लस संजय राऊत संजय राऊत निश्चित को भापा और भारतीय जनता पार्टी से बिगड़े हुए संबंधों को महाराष्ट्र के तेजतर्रार नेता देवेंद्र फडणवीस जो महाराष्ट्र के भाजपा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं वैसे इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए संजय राऊत देवेंद्र फडणवीस पूर्व मुख्यमंत्री महाराष्ट्र के मुंबई का प्रसिद्ध होटल हयात में 2 घंटे वार्ता हुई इस वार्ता के बाद से सुशांत सिंह केस में मुझे लगता है कुछ हल्का पन सुशांत केस में कार्यशैली कुछ ढीलाई (सुस्ती )दिखाई दे रही है। एम्स के डॉक्टर की टीम के सुशांत सिंह की जो है एम्स में डॉक्टरों का पैनल तैयार किया गया था उसमें ड्रा गुप्ता ने शांत सिंह की डेड बॉडी को देखकर हत्या बताया था । उसके बाद आत्महत्या होना तथा जिस हालातों से एकदम पलट जाना मुझे लगता है कहीं ना कहीं संजय राऊत उधव ठाकरे कोई बहुत करीबी नेता फंसने के लिए्नाडीज पूर्व मुखयमंत्री भारतीय जनता पार्टी हयात होटल में जो वार्ता हुई मुझे लगता है उसमें कुछ चर्चा परिचर्चा इसकी अवश्य हुई है , क्योंकि जो संजय राऊत भारतीय जनता पार्टी के लिए आग उगल रहे थे देवेंद्र फर्नांडिस उनके लिए शब्दों का जवाब देखते रहते थे। और हयात होटल में बैठकर 2 घंटे वार्ता हुई और ऐसे समय हुई जिस समय सुशांत सिंह केस सीबीआई के सुपुर्द कर दिया गया था तथा डॉक्टर गुप्ता एम्स के हत्या की पुष्टि की, तथा फोटो देखकर व्यक्त की थी आज अचानक  हालात कैसे बदले इस विषय पर कुछ संशय उत्पन्न होता है। शायद राजनीति में सब जायज है दुश्मन भी दोस्त होते हैं और दोस्त भी दुश्मन होते हैं।..... (जिसका उदाहरण लोकसभा चुनाव में बसपा और सपा घोर कट्टर विरोधी जो किसी सूरत में एक साथ आने की भविष्य में कोई सोच नहीं सकता था लेकिन लोकसभा के चुनाव में बसपा और सपा एक साथ चुनाव लड़ी और आपने देखा उसके बाद क्या स्थिति होगी चुनाव परिणाम के 4 दिन बाद बसपा सपा से अलग हो गई  थी )......जिस कारण कुछ केस में हल्का पन महसूस हो रहा है। यह मेरी व्यक्तिगत राय और सोच है । मेरा अनुभव कह रहा है इसमें किसी को आरोप लगाना किसी पर लांछन लगाना मेरा उद्देश्य नहीं है। क्योंकि इतनी जल्दी सब हालात को बदल देना और जिस तरह से सुशांत सिंह केस में ड्रग्स माफियाओं का जो ढूंढ निकल रहा है यह एक मुझे लगता है इस केस से डाइवर्ट करने का एक पूर्व संयोजित एक क्रिया है। सुशांत सिंह केस में न्याय मिले जिसके लिए रिपब्लिक भारत के मालिक अरनव गोस्वामी बहुत मेहनत कर रहे हैं और सत्य की खोज में लगे हुए हैं मुझे नहीं लगता जहां पर अन्याय की संख्या अधिक हो वहां न्याय दिलाने वाले 1 या 2 व्यक्त सरकार एवं सत्ता से लड़ा नहीं जा सकता, है। मैं तो सिर्फ इतना कहना चाहेंगे न्याय मिले सुशांत सिंह की हत्या हुई है या आत्महत्या हुई है इसका सच्चाई के साथ सीबीआई जांच करे। जिस तरह से  चल रहा है सुशांत सिंह हत्या का केस मुझे नहीं लगता है कि न्याय में क्योंकि सीबीआई जांच के पूर्वी जिस तरह से पोस्टमार्टम रिपोर्ट कपूर हॉस्पिटल में कार्य किया गया है और किस तरह से उस की डेड बॉडी के साथ सही जांच प्रक्रिया नहीं हुई है इसलिए फोटो के आधार पर कई तरीके से जांच के लिए सीबीआई करेगी को सबूत नहीं मिल पाएंगे जो मृत्यु के समय उसका जांच होनी चाहिए थी पोस्टमार्टम महाराष्ट्र सरकार के द्वारा नहीं किया जाना चाहिए था इसको दिल्ली एम्स में पोस्टमार्टम किया जाता है तो सच्चाई सामने आ सकती क्योंकि महाराष्ट्र सरकार में जिस तरह से कार्य किया है उसे स्पष्ट हो गया है कुछ कहीं ना कहीं दाल में काला पन है। क्योंकि सुशांत सिंह केस में महाराष्ट्र सरकार की कार्यशैली संदेह के घेरे में है। बहुत से बिंदु सुशांत सिंह केस में ऐसे हैं जो संजय के घेरे में महाराष्ट्र सरकार पूर्ण रूप से आ रही है। सुशांत सिंह केस को अब मुझे लगता है न्याय मिलना बड़ा मुश्किल है, हम इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को बहुत अच्छा समझते हैं मैं एक मीडिया से जुड़ा हुआ व्यस्त हूं मैं दावे के साथ कह सकता हूं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो हल्ला मचा कर निर्दोष को दोषी बनाने के लिए और जब तक अपना टीवी से उस कार्यक्रम को हटाता नहीं है जब तक हो निर्दोष व्यक्ति दोषी सिद्ध ना कर दिया जाए यह आज इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की स्थित है इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मीडिया के लोगों को कौन सा वेतन मिलता है यही वेतन है जिनके खिलाफ निकालेंगे उनसे पैसा मिलता है अनाप-शनाप ऐड आता है सलाम सलाम अन्य तरीके से पैसे मिलने के बहुत सारे स्रोत हैं वह मीडिया अपने इतने बड़े स्ट्रक्चर को चलाने के लिए बहुत पैसे की जरूरत पड़ती है वह विज्ञापन के तौर पर और अन्य तरीके से बहुत हैं जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को पैसा प्राप्त होता है,। इसलिए मैं यह कह सकता हूं इलेक्ट्रॉनिक्स मीडिया आज के कुछ चैनल को छोड़कर लगभग सब दलाल हैं जो उत्तर प्रदेश ब्यूरो चीफ से लेकर जिला स्तर के ब्यूरो चीफ और मुख्य इलेक्ट्रॉनिक चैनल के मुखिया सब पहले से निर्धारित होता है क्या करना है किस तरह हमें क्या चाहिए। मैं मीडिया का एक व्यक्त हूं मीडिया के बारे में यह मैंने लिखा यह इसलिए लिखा कि मीडिया सत्य के रास्ते पर बहुत कम चलती है आज रिपब्लिक भारत के मालिक चीफ एडिटर अरनव गोस्वामी जैसे अगर सभी पत्रकार हो जाएं तो मैं विश्वास दिलाता हूं इस देश में भ्रष्टाचारी दूर हो जाएगी और हर व्यक्ति को सच का दिखाने वाला आईना अरनव गोस्वामी की तरह कई एक मिलेंगे जो न्याय के लिए समर्पित भाव से सत्य को उजागर करेंगे और व्यक्ति को न्याय दिलवा पाएंगे ऐसे चैनल आजकल बहुत कम है। इसलिए भ्रष्टाचारी को समाप्त करना संभव नहीं इसीलिए इलेक्ट्रॉनिक चैनल किसी भी मुद्दे को इस तरह उठाते हैं जैसे हाथरस का मुद्दा आज तक एबीपी न्यूज़ ने गैर जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग की हकीकत को नहीं समझा और जो चैनल पर एक जो अच्छी सोच थी आज तक एबीपी के दर्शकों में आज एबीपी आज तक के देखने वाले दर्शक मैं मानता हूं कुछ प्रतिशत हाथरस की न्यूज़ को जिस तरह दिखाया उससे आज मैंने स्वयं देखा एक लोगों के यहां कि उन्होंने एबीपी वास्तव देखना बंद कर दिया जब भी हो बहुत विश्वास करते थे आज तक एबीपी न्यूज़ चैनलों पर जिन्होंने सत्य को बिना जाने गैर जिम्मेदाराना मीडिया के चैनलों को आधार पर उन्होंने देश को जो तत्व रखे वह सब गुमराह करने वाले थे इसलिए आज तक एबीपी न्यूज़ की चात पहले की अपेक्षा आज कम हुई है।

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