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Sunday, October 4, 2020

विदेशो से चलाया देश की आजादी का आंदोलन

हमीरपुर, महेश अवस्थी  । वर्णिता संस्था सुमेरपुर के तत्वावधान में, जिनका देश ऋणी है ,के तहत इंडिया हाउस के संस्थापक और बौद्धिक वीर श्यामजी कृष्ण वर्मा की जयंती पर श्रद्धान्जलि देते हुए संस्था के अध्यक्ष डॉक्टर भवानी दीन ने कहा कि श्यामजी कृष्ण वर्मा सच्चे अर्थों में एक ऐसे प्रज्ञावान पुरोधा थे, जिन्होंने शेर को उसकी मांद में जाकर ललकारा और डरे नहीं। वर्मा पढ़ने में बहुत प्रतिभाशाली थे ,वे कम उम्र में ही संस्कृत के प्रकांड पंडित होगए  ।  4 अक्टूबर 1857 को गुजरात के कच्छ जिले के मांडवी कस्बे में श्रीकृष्ण वर्मा के घर जनमे थे। मुंबई में रह कर वर्मा ने संस्कृत का गहन अध्ययन किया ।  वर्मा का 1875 मे  भानुमती वर्मा से विवाह हो गया ।  वर्मा दयानंद सरस्वती और तिलक से प्रभावित थे, वर्मा जी ने दयानंद सरस्वती  के सानिध्य में रहकर संस्कृत और वेदों का अनुशीलन किया । वर्मा की विद्वता से प्रभावित होकर इंग्लैंड के संस्कृत के प्रोफेसर मोनियर विलियम्स ने आक्सफोर्ड  विश्वविद्यालय  मे संस्कृत ,मराठी और गुजराती  भाषाओं का सहायक प्रोफेसर नियुक्त किया ।  

 


1883 मे वे पहले भारतीय छात्र बने, जिन्होंने आक्सफोड र्विश्वविद्यालय से बीए की परीक्षा पास की। बीस वर्ष की उम्र से ही आजादी के संघर्ष में कूद पड़े थे।18 97 में वर्मा इंग्लैंड चले गए, वहां पर इनकी हरबर्ट स्पेंसर जैसे विद्वान से भेंट हुई , स्पेंसर के मृत्यु के बाद वर्मा ने ब्रिटेन में पढ़ रहे भारतीयों के लिए छह  फेलोशिप की घोषणा की ,19 00 में वर्मा ने इंग्लैंड के हाईगेट मे ति मंजिला भवन खरीदा, जिसका नाम  इंडिया हाउस   रखा गया , जो क्रांतिकारी गति विधियों का केंद्र बना ,जिसमें मैडम कामा, वीर सावरकर ,मदनलाल ढीगरा ,लाला हरदयाल और  भगतसिंह जुड़े थे, वर्मा ने 1905 इन्डियन सोशलाजिस्ट नामक पत्रिका निकाली, उसके बाद बीस  युवाओ के साथ मिलकर इंडियन होम रूल सोसाइटी की स्थापना की, इंग्लैंड का खुफिया विभाग वर्मा के पीछे पड़ गया ।वर्मा जी का मानना था कि यदि  भारतीय अंग्रेजों के साथ पूरी तरह  असहयोग

कर दें तो अंग्रेज भारत में  एक दिन भी नहीं  ठहर सकते , वर्मा इंग्लैंड में रहकर अपनी लेखनी के द्वारा गौरो के खिलाफ जहर उगलते रहे ।वर्मा जी ने क्रांतिकारी गति विधियों को चलाते हुवे जीवन भर देश के लिए संघर्ष किया, कालांतर में 30 मार्च 1930 को उनका निधन हो गया । अवधेश कुमार गुप्ता एडवोकेट , राज कुमार सोनी सरार्फ, राधारमण, गौरीशंकर , कल्लू चौरसिया,लल्लन गुप्ता, आशीष पांडे,बल्देव शास्त्री, कुलदीप द्विवेदी ,सलीम खान , वृंदावन गुप्ता , उमादत्त शुक्ला और प्रांशु सोनी उपस्थित रहे।

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