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Friday, October 9, 2020

जागरुकता रथ पराली न जलाने का देगी संदेश

डीएम-सीडीओ ने दिखाई हरी झण्डी

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। सर्वोच्च न्यायालय एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण एनजीटी के आदेशानुसार कृषि अपशिष्ट, फसल अवशेष, पराली जलाए जाने से उत्पन्न हो रहे प्रदूषण के रोकथाम व फसल अवशेष प्रबंधन को कलेक्ट्रेट परिसर से जिलाधिकारी शेषमणि पाण्डेय, मुख्य विकास अधिकारी अमित आसेरी ने जन जागरूकता अभियान रथ, क्षेत्रीय कर्मचारियों के पोस्टर, बैनर, स्टीकर, साउंड माइक के साथ रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

जिलाधिकारी शेषमणि पाण्डेय ने कहा कि कृषकों को पराली जलाने के लाभ-हानि एवं दंडात्मक कार्यवाही से अवगत कराएं। नौ से दस अक्टूबर को विकासखंडवार धान की बेल्ट वाले विभिन्न ग्राम पंचायतों के अंदर प्रमुख स्थलों, प्राथमिक विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र, पंचायत भवन व अन्य केंद्रों पर लाउड स्पीकर से क्षेत्रीय कर्मचारियों की उपस्थिति में दिए गए संदेशों को किसानों तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही 11 अक्टूबर से समस्त सरकारी एवं

कृषि यंत्र देखते डीएम।

प्राइवेट वाहनों पर पराली न जलाए जाने के संदेश के स्टीकर, पोस्टर लगाकर प्रचार प्रसार करें। उन्होंने कहा कि इनसीटू मैनेजमेंट से संबंधित कृषि यंत्रों रिपर कम बाइंडर सुपर सीडर, ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रेयर, रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, मल्चर मल्टी क्रॉप थ्रेशर आदि के द्वारा फसल अवशेष के ठूठ, घास, पराली को मिट्टी मिलाकर जीवांश कार्बन की वृद्धि के बारे में भी बताएं। फसल अवशेष, पराली जलाना एक दंडनीय अपराध है। धान की पराली जलाने से वायुमंडल में प्रदूषण होता है। मृदा का तापमान बढ़ाने के कारण ही लाभदायक जीवाणु करोड़ों की संख्या में होते हैं वह खत्म हो जाते हैं। जिससे मृदा उर्वरकता एवं उत्पादकता प्रभावित होती है। मानव, पशु, पक्षी सभी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता ह।ै पराली प्रबंधन को कृषक अपने क्षेत्र की गौशाला पर पराली दान करें। जिससे निराश्रित गोवंश को चारे की व्यवस्था हो सके। जनपद स्तरीय सेल व तहसीलवार उड़नदस्ता टीम भी गठित की गई है जो छापेमारी की कार्यवाही सुनिश्चित करेगें। उन्होंने किसानों से अपील की है कि फसल अवशेष किसी भी दशा में न जलाएं। अन्यथा दंडात्मक कार्यवाही भी हो सकती है। उप निदेशक कृषि टीपी शाही ने बताया कि स्थानीय स्तर पर ग्राम पंचायत, कृषि, राजस्व विभाग एवं पुलिस विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों, अधिकारियों तथा ग्राम प्रधानों को पत्र द्वारा क्षेत्र के किसानों को जागरूकता एवं निगरानी रखने का उत्तर दायित्व दिया गया है। यदि कहीं प्रकरण संज्ञान में आता है तो शासन के आदेशानुसार 2 एकड़ से कम क्षेत्र के लिए 25 सौ रुपए, 2 एकड़ से 5 एकड़ क्षेत्र के लिए 5 हजार रुपए और 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए 15 हजार रुपए का अर्थदंड लगाने तथा दोबारा पराली जलती हुई पाई जाती है तो संबंधित के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराते हुए कारावास की भी कार्यवाही की जाएगी। कार्यक्रम के दौरान अपर जिलाधिकारी जीपी सिंह, जिला कृषि अधिकारी बसंत कुमार दुबे, जिला कृषि रक्षा अधिकारी धर्मेंद्र कुमार अवस्थी, भूमि संरक्षण अधिकारी हिमांशु पांडेय, बाल गोविंद यादव, उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी विमलेश कुमार, केएल निगम सहित संबंधित अधिकारी, सांसद प्रतिनिधि शक्ति प्रताप सिंह तोमर, भाजपा नेता राजकुमार त्रिपाठी, हेमंत सिंह आदि मौजूद रहे।


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