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Monday, October 19, 2020

मशरूम की खेती बहुत ही लाभदायक: राज्यमंत्री

पांच दिवसीय राष्ट्रीय वेब सेमिनार में बोले लोनिवि राज्यमंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय 

बांदा, के एस दुबे । मांसाहारी लोग प्रोटीन के विभिन्न श्रोतो से प्रोटीन प्राप्त कर लेते है। लेकिन शाकाहारी लोग अपने खाने मे कुछ ही प्रोटीन दालें, सब्जियां अथवा कुछ चुनिंदा अनाज से ही प्रोटीन प्राप्त करते हैं। जो कि हर व्यक्ति विशेष कर गरीब के थाली में मिलना संभव नही है। मशरूम की खेती तथा उत्पादन से न सिर्फ हमें प्रोटीन की पूर्ति होती है बल्कि अतिरिक्त रोजगार की सम्भावनाएं भी बन जाती है। यह बाते बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के पादप रोग विज्ञान विभाग द्वारा मशरूम उत्पादन युवाओं और किसानों के लिए एक लाभदायक व्यवसाय विषयक आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय वेब सेमिनार में लोक निर्माण विभाग राज्यमंत्री चन्द्रिका प्रसाद उपाध्याय ने कही। 

वेब सम्मेलन को संबोधित करते राज्यमंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, साथ में कुलपति यूएस गौतम

मुख्य अतिथि राज्यमंत्री ने अपने यह भी कहा की मशरूम की खेती युवाओं, किसानों, महिलाओं एवं बेरोजगारों के लिए बहुत उपयोगी है। आज की मांग को देखते हुए हमारे देश के लिए यह खेती आजीवका का प्रबल साधन बनकर उभर सकती है। मशरूम की खेती करके हम बेरोजगारों के पलायन को रोक सकते है तथा गरीब, किसान, महिला के आय का अच्छा श्रोत बन सकता है। मशरूम में इतना प्रोटीन, विटामिन, खनिज तत्व है कि हमारे लिए वास्तव में मशरूम आहार के साथ-साथ पोषक चीजो से भरपूर है। राज्यमंत्री ने कहा कि जो कोरोना काल में अपना रोजगार नौकरी छोड़कर आए हैं उसमें से कुछ जा भी रहे हैं। जो यहां रहेंगे उनके लिए यह रोजगार के रूप मे काफी उपयोगी होगा। 

कुलपति डा. यूएस गौतम ने कहा कि आमदनी दोगुना करने तथा सामाजिक अर्थिक विकास में मशरूम की खेती चाहे गरीब हो, बेरोजगार हो या कृषक हो सब के लिए मिल का पत्थर साबित होगी। कृषि के छात्रों, शोधार्थी छात्रो, युवाओं कृषको एवं महिलाओ से कुलपति ने अपील की मशरूम को रोजगार के रूप मे विकसित कर अपनी आमदनी बढाने के साथ साथ अन्य लोगो के रोजगार का साधन बने इसके लिये प्रयास करना जरूरी है। उन्हाने कहा कि इससे भविष्य सुधारा जा सकता हैं। इस सेमिनार के आयोजन से शोधार्थी, छात्र एवं मशरूम उगाने वाले किसान काफी लाभन्वित होगंे। 

सेमिनार के संयोजक पादप रोग विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डा. वीरेन्द्र कुमार सिंह ने विश्वविद्यालय के बारे में विस्तृत जानकारी दी। कहा कि मशरूम की खेती आज की आवश्यकता है। इससे छात्रों, किसानों एवं उद्यमियों को काफी लाभ होगा। डा. दुर्गा प्रसाद ने मशरूम वेब कान्फ्रेंस के बारे में पांच दिवसीय कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी दी। डा. मंजीत सिंह, पूर्व निदेशक, मशरूम शोध निदेशालय, सोलन तथा सलाहकार पंजाब सरकार ने अपने व्याख्यान में मशरूम पर व्यापक चर्चा कि तथा मशरूम की उपयोगिता एवं औषाधिय गुण से अवगत कराया। मशरूम विशेषज्ञ डा. आरपी सिंह, निदेशक तराई फूडस लिमिटेड, रूद्रपुर, उत्तराखण्ड ने इस व्याख्यान की अध्यक्षता करते हुए बताया कि यह आज की मांग है तथा मशरूम से आय बढे़गी। आनलाइन सेमिनार में डा. होशियार सिंह नेगी, सहायक प्राध्यापक एवं सह आयोजक तथा डा. उमेश चन्द्रा, सहायक प्राध्यापक एवं सहायक आयोजक ने इस कार्यक्रम को बडे़ तकनीकी व कुशलतापूर्वक सम्पन्न करने में अहम भूमिका अदा की। अंत में विश्वविद्यालय के डा. नरेन्द्र सिंह, सह-निदेशक प्रसार ने सभी का आभार जताया। 


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