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Monday, October 19, 2020

शांतिदायक-कल्याणकारी देवी मां चन्द्रघंटा की पूजा-अर्चना

शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन भी गूंजे देवी गीत

दुर्गा मंदिरों, पण्डालों व घरों में देवी मां की हुई अराधना

फतेहपुर, शमशाद खान । शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन शांतिदायक-कल्याणकारी देवी मां चन्द्रघंटा की पूजा-अर्चना विधि-विधानपूर्वक की गयी। दुर्गा मंदिरों, पण्डालों व घरों में मां की अराधरना के साथ ही देवी गीतों की गूंज रही। भक्तों ने देवी मां से कोरोना महामारी से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना भी की। पूरा माहौल भक्तिमय रहा। 

देवी मां की पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु।

सोमवार को महामारी पर आस्था भारी दिखाई दी। शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन शंतिदायक व कल्याणकारी मां चन्द्रघंटा की घर-घर पूजा अर्चना की गयी। महिलाओं ने मां को सुहाग की सामग्री अर्पित की तो किसी ने चुनरी चढ़ाकर सुख-समृद्धि की कामना की। शहर के दुर्गा मंदिर, ताम्बेश्वर मंदिर, मोटे महादेवन मंदिर, कालिका मंदिर समेत गली मुहल्लों में लगाये गये दुर्गा पण्डालों में सुबह आरती के समय भक्त शामिल होकर मां की अराधना की। वहीं घरों मेें भी जगत जननी की विधि विधान के साथ पूजा की गयी। कही दुर्गा चालीसा तो कहीं अन्य धार्मिक आयोजन होते रहे। पूरे नौ दिनों तक व्रत रखकर दुर्गा मां की उपासना करने को ठानी है तो कोई पहला और अन्तिम व्रत रखकर देवी भक्त उपासना में लीन है। इस बार कोरोना संक्रमण को लेकर भले ही सार्वजनिक कार्यक्रमों पर रोक लगी है लेकिन शारदीय नवरात्र पर महामारी को ताक में रखकर भक्त देवी भक्ति में लीन नजर आ रहे हैं। मंदिर हो या फिर दुर्गा पण्डाल कुछ तो मास्क लगाये नजर आते हैं और अधिकतर बिना मास्क के ही मां के दरबार में अपनी अर्जी लगा रहे हैं हलांकि मां दुर्गा से देवी भक्त कोरोना जैसी महामारी से शीघ्र निजात दिलाने की प्रार्थना कर रहे हैं। बताया जाता है कि मां चन्द्रघंटा शांतिदायक व कल्याणकारी हैं। इनके मस्तक में घंटे के आकार का अर्धचन्द्र होने के कारण इन्हें चन्द्रघंटा देवी कहा जाता है। मां चन्द्रघंटा की मुद्रा सदैव युद्ध के लिए अभिमुख रहने से भक्तों के कष्ट का निवारण शीघ्र कर देती है। इनका वाहन सिंह है इसलिए इनका उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय हो जाता हे। इनके घण्टे की ध्वनि सदा अपने भक्तों की प्रेत-बाधादि से रक्षा करती है। मां चन्द्रघंटा के साधक और उपासक जहां भी जाते हैं लोग उन्हें देखकर शांति और सुख का अनुभव करते हैं। नवरात्र के तीसरे दिन साधक का मन मणिपुर चक्र में प्रविष्ट होता है। इनकी अराधना सद्यः फलदायी है। 


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