ज्ञान, तपस्या, वैराग्य की देवी हैं मां ब्रह्मचारिणी - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Advt.

Sunday, October 18, 2020

ज्ञान, तपस्या, वैराग्य की देवी हैं मां ब्रह्मचारिणी

आदिशक्ति की उपासना का सिलसिला जारी

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। शारदीय नवरात्रि के दूसरेे दिन मां ब्रह्मचारिणी देवी की भक्तों ने आराधना की। सवेरे से देवी मंदिरों में पूजा अर्चना को श्रद्धालु पहुंचे। मां के जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहा। देवी साधक विधिविधान से साधना में जुटे हैं। देवी मढी में शाम को जवारा पूजा के साथ उमाह, अनुष्ठानों के माध्यम से आदि शक्ति की साधना का सिलसिला जारी है। मंदिरों में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस मुस्तैद रहे।

पूजा करते श्रद्धालु।

रविवार को नवदुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी देवी की विधिवत पूजा आराधना हुई। तड़के से जनपद के विभिन्न सिद्ध देवी मंदिरों में भक्त उमड़े। जल स्नान कराकर विधिवत पूजा की। व्रतधारी देवी साधक आदिशक्ति मां जगदम्बे की साधना में पूरे मनोयोग से जुटे हैं। सवेरे से देवी मंदिर घंटो व जयकारों से गूंजने लगते हैं। शाम को देवी चैरी में जवारा पूजा का मनोहारी दृश्य रहता है। देवी उपासक तरह-तरह से साधना कर देवी मां को प्रसन्न करते हैं। विभिन्न जगहों पर सजे दुर्गा पाण्डालों में देवी प्रतिमाओं की भव्य झांकी के दर्शनों को लोग पहुंचे। कोरोना के चलते इस बार शासन की गाइड लाइन के अनुसार आयोजक पूरी तरह से अनुपालन करते दिखे। लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग में रहने व मास्क लगाने की अपील की। चहुंओर देवी अनुष्ठानो का सिलसिला जारी है। मां दुर्गेे की उपासना की महिमा का लाभ उठा रहे हैं। शाम के समय मंदिरों में आरती पूजा करने को महिलाओं, लडकियों, देवी साधकों का तांता लग जाता है। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल तैनात किए गए हैं। 

शास्त्रों के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी के दाएं हाथ में माला और बाएं हाथ में कमंडल है। इन्हें ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है। कठोर साधना और ब्रह्म में लीन रहने के चलते ब्रह्मचारिणी कहा गया है। नवदुर्गा के इस स्वरूप की आराधना से उम्र लम्बी होती है। इनकी पूजा फूल, अक्षत, रोली, चंदन से की जाती है। शास्त्रों के मुताबिक मां दुर्गा ने पार्वती के रूप में पर्वतराज के यहां पुत्री बनकर जन्म लिया था। पार्वती ने महर्षि नारद के कहने पर महादेव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या के कारण ही इनका नाम तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी पड़ा। इस तपस्या से उन्होंने महादेव को प्रसन्न कर लिया। मान्यता है कि अगर मां की भक्ति और पूजा दिल से की जाएं तो मां ब्रह्मचारिणी उन्हें धैर्य, संयम, एकाग्रता और सहनशीलता का आशीर्वाद देती हैं।


No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages