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Saturday, October 10, 2020

प्रेमचन्द्र ने हमीरपुर में लिखे कई उपन्यास व कहानियां

हमीरपुर, महेश अवस्थी । सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज रानी लक्ष्मीबाई पार्क हमीरपुर में  हिंदी के प्रसिद्ध उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद्र जी को निर्वाण दिवस पर याद किया  गया। प्रधानाचार्य  रमेश गुप्ता ने कहा कि प्रेमचंद का जन्म वाराणसी के निकट लमही गाँव में हुआ था। उनकी माता का नाम आनन्दी देवी था तथा पिता मुंशी अजब राय था। उनकी शिक्षा का आरंभ उर्दू, फारसी से हुआ । 1898 में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वे एक स्थानीय विद्यालय में शिक्षक नियुक्त हो गए। नौकरी के साथ ही उन्होंने पढ़ाई जारी रखी।1910 में उन्‍होंने अंग्रेजी, दर्शन, फारसी और इतिहास लेकर इंटर पास किया और 1919 में बी एड पास करने के बाद शिक्षा विभाग के इंस्पेक्टर पद पर नियुक्त हुए।आचार्य अरुण मिश्रा ने बताया कि सात वर्ष की अवस्था में उनकी माता तथा चौदह वर्ष की अवस्था में पिता का देहान्त हो जाने के कारण उनका प्रारंभिक जीवन संघर्षमय रहा। उनका पहला विवाह उन दिनों की परंपरा के अनुसार पंद्रह साल की उम्र में हुआ, जो सफल नहीं रहा। 1906 में दूसरा विवाह अपनी प्रगतिशील परंपरा के अनुरूप बाल.विधवा शिवरानी देवी से किया।  कुछ समय तक प्रेमचंद,  धनपत राय नाम से लिखते। उनका काफी समय हमीरपुर में बीता।उन्होंने यहां कई कहनिया व उपन्यास स्थानीय पृष्ठ भूमि में लिखे थे । जीवन के अंतिम दिनों में गंभीर  बीमारी के चलते  उपन्यास मंगलसूत्र पूरा नहीं हो सका और 8 अक्टूबर 1936 को उनका निधन हो गया। 


माधव भवन प्रभारी  बलराम सिंह ने कहा कि मुंसी जी ने कफ़न , गोदान , उपन्यास कबरई क्षेत्र की पृष्ठ भूमि में लिखे ।दो बैलों की कथा पर फ़िल्म बनी, तोते पर कहानी महोब कन्ठ में लिखी गयी।जब वे एस डी आई थी तो उनका उपन्यास सोजे वतन लिखा गया। जिसे अंग्रेज कलेक्टर हमीरपुर ने जप्त कर लिया था । इस्मेयुवाओ को देश की आजादी के लिए प्रोत्साहित किया गया था। कमलकांत मिश्रा, ज्ञानेश जड़िया, ऋषिराज निगम, मयंक मिश्र एवं  विद्यालय परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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