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Tuesday, October 27, 2020

शरद पूर्णिमा पर चन्द्रमा से होगी अमृत वर्षा 30 अक्टूबर

आाश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते है। इस दिन चन्द्रमा अपनी पूरी 16 कलाओं से युक्त होता है और इस दिन चन्द्रमा की चांदनी अमृत से युक्त होती है। इस वर्ष पूर्णिमा 30 अक्टूबर को सांयकाल 5 :45 से प्रारम्भ होकर 31 अक्टूबर को सांयकाल 8:18 तक रहेगी। 30 अक्टूबर शरद पूर्णिमा को शुक्रवार अश्विनी नक्षत्र, वज्र योग और चन्द्रमा मेष राशि का संयोग बना रहे है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने ‘रास लीला’ की थी इसलिए इसे रास पूर्णिमा भी कहते है। इस दिन प्रातः स्नान करके भगवान श्री कृष्ण या श्री विष्णु जी या अपने इष्ट देव का पूजन अर्चना करना चाहिए और उपवास रखना चाहिए। इस दिन रात में गाय के दूध की खीर बनाकर उसमें घी, चीनी मिलाकर अर्ध रात्रि को भगवान को भोेग लगाकर खीर को चांदनी रात में रखना चाहिए। ऐसा करने से चन्द्रमा की किरणों से अमृत प्राप्त होता है और अर्ध रात्रि मंे चन्द्रमा को भी अध्र्य देना चाहिए। पूर्णिमा की चांदनी औषधि गुणों से युक्त होती है इसमें रखी खीर का सेवन करने से हमारे चन्द्र ग्रह संबंधी दोष जैसे कि कफ कोल्ड


चेस्ट और हार्मोस संबंधी रागों में लाभकारी है। ऐसा कथन है कि चांदनी रात में बैठने से और सुई में धागा पिरोने से आंखो की रोशनी तेज होती है और प्रातःकाल सूर्य उदय से पूर्व इस खीर का प्रसाद के रूप में सेवन करना चाहिए जिससे वर्ष भर अरोग्यता होती है। 30 अक्टूबर को व्रत की पूर्णिमा, कोजागरी व्रत भी है।

शरद पूर्णिमा को कोजागरी व्रत भी किया जाता है पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, असम में विशेष रूप से लक्ष्मी पूजन किया जाता है । माता लक्ष्मी, कुबेर और इन्द्र देव का पूजन और श्री सूक्त, लक्ष्मी स्तोत्र और लक्ष्मी मंत्रों का जाप करते है ऐसी मान्यता है कि माता लक्ष्मी रात्रि मंे विचरण करती है और भक्तों पर धन-धान्य से पूर्ण करती है- 

-ज्योतिषाचार्य-एस.एस.नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ

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