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Thursday, October 15, 2020

शारदीय नवरात्र 17 अक्टूबर से

नवरात्री में मां के नौ रूपों का पूजन किया जाता है। शारदीय नवरात्र में शीत ऋतु के आगमन की सूचना देता है। शक्ति की उपासना अश्विन मास के प्रतिपदा से नवमी तक की जाती है। इस वर्ष नवरात्र 17 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक है।  17 अक्टूबर शनिवार को इस दिन सूर्य कन्या राशि में चंद्रमा तुला राशि में विराजमान रहेंगे अश्वनी शुक्ल घट स्थापना शुभ मुर्हूत में की जानी चाहिए। इस दिन प्रातःकाल चित्रा नक्षत्र में  6ः07 से 09ः52 तक एवं अभिजीत मुर्हूत दिन 11ः28 से 12ः14 तक घट स्थापना एवं देवी का पूजन किया जा सकता है। नवरात्र में प्रथम माँ शैलपुत्री द्धितीय माँ ब्रहाचारिणी तृतीय माँ  चंद्रघण्टा चर्तुथ माँ  कुष्मांडा पंचमी माँ स्कन्द माताए षष्ठी माँ कात्यानी देवी सप्तमी माँ कालरात्री माँ  महागौरी नवमी माँ सिद्धीदात्री की उपासना करने का विधान है।

इस बार घोड़े पर आएंगे मां

इस बार दुर्गा नवरात्रि की शुरूआत शनिवार से हो रही है ऐसे में मां घोड़े को अपना वाहन बनाकर धरती पर आएंगी माना जाता है कि घोड़े पर आने से कष्ट पड़ोसी देशों से तनाव सत्ता में उथल.पुथल कारक है, सोमवार व रविवार को कलश स्थापना होने पर मां दुर्गा हाथी पर आती हैं। शनिवार तथा मंगलवार को कलश स्थापना होने पर माता का वाहन घोड़ा होता है। गुरुवार अथवा शुक्रवार के दिन कलश स्थापना होने पर माता डोली पर चढ़कर आती हैं। बुधवार के दिन कलश स्थापना होने पर माता नाव पर सवार होकर आती हैं।
  24 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी की पूजा एक ही दिन होगी जबकि नवमी  अक्टूबर के दिन प्रात 11 बजकर 14 मिनट के बाद दशमी तिथि लग जाएगी इस कारण दशहरा पर्व और अपराजिता पूजन एक ही दिन आयोजित

होंगे विजय दशमी 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी इस बार नौ दिनों में ही दस दिनों के पर्व पूरा हो जाएगा ।  कहा जाता है कि भगवान श्री राम ने सर्वप्रथम शारदीय नवरात्रों का पूजन समुद्रतट पर करके दसवें दिन रावण पर विजय प्राप्त की थी। तब से ही असत्य पर सत्य की और अधर्म पर धर्म की विजय का पर्व दशहरा मनाया जाता है। एक अन्य कथानुसार देवी दुर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर से संग्राम करके उसका वध किया जाता था। अत इन्हें महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है। नवरात्र में घट स्थापना  जौ बोने दुर्गा सप्तशती का पाठ , हवन व कन्या पूजन से माँ दुर्गा प्रसन्न होती है। नवरात्र में नवार्णमंत्र की साधना और दुर्गा सप्तशती का पाठ बहुत फलदायी होता है।नवरात्र में  देवी माँ को नौ दिनों में अलग.अलग  नैवेद्य चढ़ाने से निम्न मनोकामना की पूर्ति होती है। प्रथम. गो घृत. आरोग्य की प्राप्ति  द्धितीय. शक्कर . दीघार्यु की प्राप्ति तृतीय. दूध. दुखों की निवृत्ति चतुर्थ. मालपूआ. निर्णय शक्ति का विकास पंचम. केले. बुद्धि का विकास षष्ठी. मधु.आकर्षण व सुन्दरता सप्तमी. गुड़. शोकमुक्ति और विपत्तियों से रक्षा अष्ठमी. नारियल. हर प्रकार की पीड़ा का शमन नवमी. धान. लोक परलोक का सुख दशमी. काले तिल. भय से मुक्ति नवरात्रि आरंभ होते ही नई वस्तुओं की खरीद प्रॉपर्टी क्रय वाहन क्रय जैसे शुभ कार्य आरंभ हो जाएंगे लेकिन शादी विवाह देवउठनी एकादशी तिथि 25 नवंबर के बाद ही आरंभ होंगे इस बार दीपावली 14 नवंबर को मनाई जाएगी

 .ज्योतिषाचार्य.एस एस नागपाल स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज लखनऊ

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