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Monday, October 19, 2020

तिहरा हत्याकाण्ड: चौबीस साल बाद आये फैसले में 15 को आजीवन कारावास

जिला पंचायत अध्यक्ष पति समेत पांच हुए बरी

फतेहपुर, शमशाद खान । खागा बस स्टाप में 24 साल पहले हुये गोलीकांड में सोमवार को अपर एवं सत्र न्यायालय कोर्ट नंबर तीन ने सोमवार को फैसला सुनाते हुये जानलेवा हमले के आरोपियों जिला पंचायत अध्यक्ष पति/प्रतिनिधि सहित सभी को बरी कर दिया, जबकि जानलेवा हमला समेत हत्या के मामले में दूसरे पक्ष के तारा चंद्र पाण्डेय समेत 15 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले को लेकर आज समूचे दिन अदालत परिसर में सुबह से ही गहमा-गहमी का माहौल रहा। अधिवक्ताओं के साथ ही वादी एवं प्रतिवादी पक्ष के समर्थकों की निगाहे बराबर निगाहें लगी रहीं। दोपहर बाद सुनाये गये फैसले से वादी पक्ष में जहां खुशी का माहौल छा गया, वहीं प्रतिवादी पक्ष के खेमे में मायूसी साफ झलक रही थी।

फैसला आने के बाद पुलिस वैन में  बैठते अभियुक्त।

गौरतलब है कि 6 अगस्त 1996 में दिन के करीब साढ़े ग्यारह बजे खागा बस स्टाप पर हुये गोलीकांड में जिला पंचायत अध्यक्ष निवेदिता सिंह के पति अभय प्रताप सिंह व उनके बड़े भाई उदय प्रताप सिंह के खेमे से तीन लोगों की जान चली गयी थी। वादी सुनील सिंह, प्रथम सूचना दाता राम निरंजन सिंह की तरफ से लिखाये गये मुकदमे में 18 लोगों को नामजद करते हुये धारा-307 का मुकदमा दर्ज कराया गया था, लेकिन वादी समेत तीन लोगों की घटना के साथ अस्पताल पहुंचते समय तक मौत होने पर धारा-302 का इलाफा हुआ था, जबकि प्रतिवादी पक्ष की ओर से 8 लोगों पर धारा-307 जानलेवा हमला का अभियोग दर्ज कराया गया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता बलिराज उमराव व विवेक उमराव ने बताया कि अदालत के सामने उन्होने सारे साक्ष्य रखे। उन्होने कहा कि वादी पक्ष के तीन लोगों की मौत होने के बाद उदय प्रताप सिंह उर्फ मुन्ना सिंह, अभय प्रताप सिंह उर्फ पप्पू सिंह, मन्ना सिंह, बड़का तिवारी व गुड्डा को अदालत ने सुबुतों और तर्क सुनने के बाद बरी कर दिया। बरी हुये अन्य तीन लोगों में सुनील सिंह, राम निरंजन सिंह व राकेश सिंह की मौत हो चुकी है। उन्होने बताया कि प्रतिवादी पक्ष के प्रदीप पाण्डेय, कमल पाण्डेय, पप्पू पाण्डेय, संतोष पाण्डेय, राजेश पाण्डेय, प्रकाश पाण्डेय, संजय मिश्र, नीरज पाण्डेय, राजेन्द्र सिंह, तारा चंद्र पाण्डेय, संतोष तिवारी, छोटे तिवारी, ज्ञान सिंह, विजय और मुकेश पाण्डेय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी है। प्रतिवादी पक्ष के ही नवल पाण्डेय व राम आसरे सिंह की मौत हो चुकी है, जबकि बड़कू पाण्डेय अदालत ने बरी होने का निर्णय सुनाया है। प्रतिवादी पक्ष के प्रकाश पाण्डेय ने कहा कि अदालत ने फैसला सुनाने में इंसाफ नहीं किया है। हम इस फैसले की उच्च न्यायालय में अपील करेंगे। सजा का फैसला सुनाने के बाद सभी 15 लोगों को अदालत ने हिरासत में लेते हुये जेल भेज दिया।


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