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Thursday, September 24, 2020

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर कर रहीं ‘पोषण पंचायत’

महिलाओं को दे रहीं पोषण आहार के बारे में जानकारियां

माताओं को पौष्टिक आहार बनाने की दी जा रही सीख 

बांदा, के एस दुबे । प्रदेश में चलाए जा रहे राष्ट्रीय पोषण माह के तहत धात्री माताओं को पौष्टिक आहार के बारे में जानकारी देने के साथ ही पौष्टिक आहार बनाने की सीख भी दी जा रही है। साग-सब्जियों और आहार में मिलने वाले पोषक तत्वों के बारे में बताया जा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर पोषण की पंचायत भी कर रही हैं। 

बच्चे को पौष्टिक भोजन खिलातीं आंगनबाड़ी कार्यकत्री

जिला कार्यक्रम अधिकारी इशरतजहां ने बताया कि गर्भवती को गर्भ में पल रहे शिशु की उचित देखभाल के साथ स्वस्थ शिशु के लिए किन पौष्टिक आहार का उपयोग करना है, के बारे में भी गृह भ्रमण और बैठकों के माध्यम से जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि गर्भवती और उनके बच्चे के लिए मुनगा (सहजन) भाजी बहुत लाभकारी है। बच्चा होने के बाद दूध पिलाने वाली मां के लिए भी मुनगा भाजी अमृत के समान है। इसकी पत्ती को घी में गर्म करके प्रसूता को दिए जाने का पुराना रिवाज है, जिससे दूध की कमीं नहीं होती और जन्म के बाद भी कमजोरी और थकान का भी निवारण होता है। साथ ही बच्चा भी स्वस्थ रहता है और वजन भी बढ़ता है। बिसंडा ब्लाक की बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) अंशवती ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व्हाट्सएप ग्रुप से भी पोषण से संबंधित जागरूकता संदेश  दे रही हैं। कोरोना गाइड लाइन का पालन कर सभी गतिविधियां कराई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि छह माह का बच्चा होने के बाद मां के दूध के साथ ऊपरी आहार  देना शुरू कर देना चाहिए। उसमें प्रोटीन, फैट, कार्बोहाईड्रेट अधिक मात्रा में हो। दो साल तक आयरन, विटामिन-डी, विटामिन-ए, जिंक, आयोडीन भी डाइट में शामिल हो। इससे बच्चे का दिमाग तेज होगा। 


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