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Thursday, September 3, 2020

सत्ता बदली-सरकार बदली, न बदल सकी जनपद की तकदीर

विकास के सपने दिखाकर जनता की भावनाएं की जा रही आहत

फतेहपुर, शमशाद खान । विकास के सपने दिखाकर जनता से वोट हासिल करना और उन्हीं वोटो के दम पर सीट जीतना, माननीय की उपाधि हासिल करना और फिर जनता को भूल जाना यह नेताओं का दस्तूर बन गया है। क्षेत्र के विकास के लिये सड़क, बिजली, पानी समेत अनेक सुविधाओ के बड़े बड़े दावे करने वाले और चुनावों के समय विकास के सपने दिखाने वाले नेता पहले समाज सेवक बनकर जनता के बीच जाते हैं हाथ जोड़कर वोट मांगते है और सीट जींतने के बाद माननीय की उपाधि मिलते ही जनता को भूलने लगते है। सत्ता हासिल होने के साथ अपने आपको जनता का सेवक की जगह खुद को उनका मालिक समझ बैठते हैं। वादों को याद दिलाने के बावजूद अमल करने की जहमत तो दूर की बात उन्हें वादा ही याद नही रहता। इसी का नतीजा है कि जनपद की प्रमुख समस्याओ में चाहे औगासी का पुल, स्पोर्ट्स कालेज का निर्माण, सीवर लाइन की समस्या बड़े कालेज, फिर हवाई अड्डे के लिए छोड़ी गई जमीन पर अवैध कब्जों का मामला रहा हो। न तो सरकारें गंभीर हुईं और न ही उन सरकारों 

विकास के दावों की पोल खोलती जर्जर सड़क।

में प्रतिनिधि के तौर पर रहे जनता की नुमाइंदगी करने वाले माननीय, जनप्रतिनिधियों की बेरुखी व वादा खिलाफी का ही नतीजा है कि जिला विकास की राह पर आगे नहीं बढ़ सका है। देश को प्रधानमंत्री तक देने वाले जिला की हालत आज भी दयनीय होने के साथ साथ जनपद आज भी अपनी पहचान तक नहीं बना सका। विकास की बात तो दूर की कौड़ी यहां लोगो को अपनी मूलभूत समस्याओं के निराकरण तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। बहुजन समाज पार्टी की सरकार में शुरू हुए कार्य बसपा सरकार जाने तक पूरे नहीं हो सके। बाद में आयी सपा सरकार में भी इन अधूरे कामों को पूरा करने में कोई रुचि नही ली गई। तीन साल से अधिक की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की सरकार भी विकास कार्यो के प्रति उदासीन है। जिसके चलते यमुना नदी पर औगासी का पुल अधूरा ही पड़ा है और आज भी लोग यमुना नदी को नाव के सहारे ही जान हथेली पर रखकर नदी के उस पार जाते है। बसपा सरकार में शुरू हुआ स्पोर्ट्स कालेज का निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं किया जा सका। हवाई अड्डे की जमीन पर भू माफियाओं ने अतिक्रमण कर लिया। कभी हवाई अड्डे का सपना देखने वाले जिले के लोगों को अब यह याद भी नहीं है कि इसके लिए जमीन कहां छोड़ी गई थी। केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार के नुमाइंदों ने ऐतिहासिक, पौराणिक धरोहरों को समेट कर जिले को विश्व मानचित्र पर उभारने का वादा तो किया लेकिन उसे पूरा करना तो दूर की बात प्रयास तक नहीं किए गए। विकास दावे आज भी अभी अधूरे सपने ही बने हुए हैं। केंद्रीय विद्यालय का ढिंढोरा गत पांच साल से पीटा जा रहा है लेकिन विद्यालय निर्माण की अभी तक नींव नहीं रखी जा सकी आज बमुश्किल से मौजूदा सत्र में राजकीय इंटर कॉलेज की नई बिल्डिंग पर अतिक्रमण कर कक्षा 5 तक के क्लासेज चलाने की कार्यवाही शुरू की गई है। जिस तरह से आरक्षण का खेल खेला जाना है। उससे आम जनता का केंद्रीय विद्यालय से भला होने वाला नहीं है। कभी जनपद वासियो को रोजगार देने वाली कताई मील बन्द होने के बाद चालू नही की जा सकी। बंद कताई मिल की जमीन पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य शुरू किया गया जो आज भी रफ्तार से कही अधिक धीरी गति से चल रहा है। जनपद की अधिकतर औद्योगिक इकाइयां ठप हो गई हैं जो बची हैं वह भी सरकारी उपेक्षा व समस्याओ के कारण बंद होने की कगार पर हैं। इन्हें बचाने की कोशिश नहीं की जा रही है जिससे स्थानीय लोगों को रोजी रोजगार का संकट खड़ा है। सांसद व सभी छह विधायक भारतीय जनता पार्टी व उसके समर्थित दल से होने के बावजूद फिलहाल जिले के लोगों की किस्मत में बदहाली ही नजर आ रही है। केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं का बखान कर नेता अपनी राजनीति चमका रहे हैं। योजनाएं भी ऐसीं जो कागजों में तो सरपट दौड़ रही हैं लेकिन उनकी जमीनी हकीकत किसी से छिपी नहीं है। कोरोना का बहाना लिए जन समस्याओं से मुंह मोड़े जनप्रतिनिधि बिगड़ी कानून व्यवस्था व लोगों की बदहाली एवं भ्रष्टाचार के मामलों में मौन धारण किए बैठे हुए है। ऐसी स्थिति में जनता अपने आपको छला हुआ ही महसूस करेगी।


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