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Friday, September 25, 2020

वक्त.......

देवेशप्रताप सिंह राठौर, 

स्वाबलंबी (वरिष्ठ पत्रकार)

............... वक्त एक ऐसा तराजू है जो वक्त इस वक्त किसे किस समय वक्त पर क्या वक्त प्रदान करें यह वक्त ही वक्त को जानता है ।आज मैं सिर्फ एक बात पर देश के लोगों से है पूछना चाहता हूं। जितना समाचार लोग पढ़ते हैं परंतु कभी आपने देखा है और सोचा होगा क्या सुना होगा सोने की थाली में खाना खाने वाले लोगों को अंत में कितना ध्यान रखा वक्त का रहा क्योंकि उन्होंने वक्त पर वर्तमान पर सोचा और उसका भविष्य में परिणाम वक्त का नहीं देखा वह नहीं सोचा और ना वक्त से उन्हें क्या किया वक्त से विश्व में कई एक उदाहरण है उनका अंत कैसे हुआ आप सब जो इतिहास की जानकारी रखते हैं वह सब जानते हैं मैंने अपने जीवन में किसी का अहित नहीं किया और ना ही सोचता हूं। एक वक्त ऐसा आया है कि हम सब सोचने को मजबूर हुए वक्त पर ,जिससे मेरा परिवार घर सब मानसिक पीड़ा से ग्रस्त रहा और वक्त के साथ वक्त बदला और मुझे ईश्वर की कृपा से वक्त का ईश्वर के द्वारा वक्त प्राप्त हुआ जिसमें मुझे सम्मान प्राप्त हुआ सत्य के रास्ते पर चलते हुए कष्ट तो  आते हैं पर विजय सत्य की होती है।जब व्यक्त वक्त की मर्यादा को भूल जाता है अपने अच्छे भक्तों के अच्छे वक्त पर दूसरे पर अन्याय करते हैं ।भविष्य की चिंता नहीं करते हैं उनका उदाहरण के तौर पर सद्दाम हुसैन कर्नल गद्दाफी जैसे लोगों का अंत किस तरह हुआ क्या आपने सोचा होगा सद्दाम हुसैन किस तरह उनकी मृत्यु फांसी दी गई क्या आपने कर्नल गद्दाफी के संबंध में सोचा होगा क्योंकि मौत का वक्त इतना खराब होगा। उन्होंने जिस तरह देश को चलाया ऐसो आराम से रहे अंत कितना दुखद ही रहा इसे पूरे विश्व ने देखा, यह वक्त की मार होती है। वक्त में लोग अच्छे वक्त में बुरे वक्त को भूल जाते हैं जिस व्यक्ति में अहंकार आ जाता है ।जमीन से उठा हुआ व्यक्ति अगर आसमान तक पहुंचा है तो जरूर उसने कोई ना कोई हिम्मत साहस एवं लगन मेहनत वक्त के हालातों से गुजरते हुए अपने को दिशा कार्य एकाग्रता के तहत अपना स्ट्रक्चर तैयार किया है,परंतु वक्त अच्छा आने पर वह जब अहंकारी हो जाता है पद का या किसी धन का वैभव का वहीं से उसका पतन का रास्ता शुरू हुआ था।  राजे रजवाड़ों को देखा है या सुना होगा इतिहास में आजादी के पहले हमारा वक्त क्या था आजादी के बाद क्या वक्त रहा आज क्या वक्त है आने वाले


समय में क्या वक्त होगा वह ईश्वर जाने लेकिन मैं इतना जरूर कहूंगा वक्त के अहंकार में डूबे हुए व्यक्ति बाहुबली धन एवं बहुत सारे बड़े-बड़े लोगों के  संपर्क सूत्र बढ़ जाते हैं नाम हो जाता है वक्त को भूल जाते हैं बस वहीं से उल्टी गिनती शुरू, इंसान के जीवन में धन बहुत ही महत्वपूर्ण चीज है, बिना अर्थ के यह जीवन व्यर्थ है कोई भी घास नहीं डालता ना कोई समाज में घर में परिवार में इज्जत प्राप्त होती है। और धन से सबसे बड़ी कीमती चीज है स्वाभिमान सम्मान और इज्जत जिसे बनाए रखना बहुत जरूरी है। वह वक्त वक्त के कहने पर नहीं चल रहे हैं तो वह व्यक्ति अहंकार के रूप में धन कमाने की चेष्टा में रिश्तो को भूल जाता है और जीवन का सबसे बड़ा दोष जिसे ना धन खत्म कर सकता है ना कोई कानून खत्म कर सकता है ना कोई शिक्षक गुरु  कोई भी उसको खत्म नहीं कर सकता एक बार लग जाने पर उसका नाम है कलंक, कलंक जीवन में कलंक लग गया वह पूरा परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी कलंकित होता चला जाता है अच्छे होने पर भी उसकी मिसाले कलंकित के रूप में दी जाती है किसी रूप में हो वो कलंक जल्दी भूलता नहीं है उसे धोने के लिए आप सदियों सदियों तक लगे रहे लेकिन वो कलंक पत्थर की लकीर हो जाता है कलंक लगना अपने स्वाभिमान सम्मान सब समाप्त हो जाता है।

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