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Friday, September 25, 2020

एकात्म मानव वाद के प्रणेता को नम किया कृतघ्न भारत ने

हमीरपुर, महेश अवस्थी  । नगर के स्थानीय सरस्वती विद्या मंदिर इण्टर कालेज हमीरपुर मे पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयन्ती मनाई गयी। कार्यक्रम की शुरुआत मॉ सरस्वती के चित्र एवं पंडित दीनदयाल के चित्र पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। संगीत धुन ज्ञानेश जडि़या एवं चित्र सज्जा हेमन्त  ने किया । विद्यालय के प्रधानाचार्य  रमेशचन्द्र ने कहा कि पंडित जी एक उत्कृष्ठ शिक्षक एवं विचारशील व्यक्ति थे। हमे उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। विद्यालय के वरिष्ठ प्रवक्ता  कमलकान्त मिश्र ने  कहा कि पंडित दीनदयाल जी का जन्म 25 सितम्बर 1916 को मथुरा के निकट नगला चन्द्रभान मे हुआ था। इनके पिता का नाम भगवती तथा मॉ का नाम रामप्यारी था। ये एकात्म मानववाद के प्रणेता व पूॅजीवाद के विरोधी थे। जीवन आरम्भ के 19 वर्ष इन्होने मृत्यु दर्शन से साक्षात्कार


किया। तथा इनका पालन पोषण व शिक्षा-दीक्षा नाना के घर मे हुयी। सन् 1937 मे ये संघ से जुड़े। एकबार इनके नाना ने इन्हे ज्योतिषी को दिखाया तो उन्होने बताया कि यह बालक बड़ा ओजस्वी निकलेगा ,परन्तु आजीवन अविवाहित रहेगा और वास्तव मे वे संघ के आजीवन प्रचारक व बाद मे जनसंघ के अध्यक्ष बने। पंडित जी एक कुशल अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री, राजनीतिज्ञ थे। उनके द्वारा प्रस्तुत दर्शन ‘‘एकात्म मानववाद’’ के रुप मे जाना जाता है। जिसका उद्देश्य संघर्ष मुक्त समाज की स्थापना है। आभार ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम प्रमुख वेद प्रकाश शुक्ल व प्रमोद सोनी ने कहा कि पंडित जी ऐसा मार्ग चाहते थे, जिसमे व्यक्तिवाद के ऐसे गुण मौजूद हो, जिससे समाज का निचला से निचला तबका जाति, वर्ग राष्ट्र अखण्ड मण्डलाकार आकृति के संयोग से आगे बढ़ता रहे। हमारी वर्तमान सरकार उन्ही के पद चिन्हो पर चल रही है। कार्यक्रम का विधिवत संचालन आचार्य बलराम सिंह ने किया। यह जानकारी विद्यालय के मीडिया प्रभारी आचार्य वेदप्रकाश शुक्ल ने दी।

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