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Saturday, September 5, 2020

फार्म मशीनरी बैंक मिलेगा ग्राम पंचायतों को - पराली जलाने वाले गांव को प्राथमिकता

हमीरपुर, महेश अवस्थी  । प्रमोशनल आॅफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन फाॅर इन सीटू मैनेजमेन्ट आॅफ क्राप रेज्ड्यू योजनान्तर्गत ग्राम पंचायतों को 80 प्रतिशत अनुदान पर फार्म मशीनरी बैंक उपलब्ध होगा । जिन क्षेत्रों में गत वर्ष फसल अवशेष जलाये जाने की घटनायें हुई हैं, उन ग्राम पंचायतों में इसे रोकने के लिए शासन द्वारा कृषि यंत्र  योजनान्तर्गत रूपया पांच लाख तक में निर्धारित यंत्रों पर 80 प्रतिशत अनुदान अनुमन्य किया गया है। योजनान्तर्गत भारत सरकार द्वारा पैडी स्ट्राचापर, श्रेडर, मल्चर, श्रब मास्टर,, रोटरी स्लेशर, हाइड्रोलिक रिवर्सेबुल एमबी प्लाऊ, सुपर सीडर, बेलर, सुपर स्ट्रा मैनेजमेन्ट सिस्टम (सुपर एसएमएस) जीरो टिल सीड कम फर्टीड्रिल, हैप्पी सीडर, स्ट्रा रेक, क्राप रीपर व रीपर कम्बाइन्डर में से रूपया 5 लाख की सीमान्तर्गत कम से कम दो यंत्र अनिवार्य रूप से क्रय करने होगें। इन यंत्रों के मूल्य के 20 प्रतिशत का भुगतान ग्राम पंचायतों द्वारा स्वयं वहन करना होगा। इन-सीटू योजना के अन्तर्गत क्रय किये गये फसल अवशेष प्रबन्धन यंत्रों के मूल्य के 80 प्रतिशत अधिकतम  4 लाख रुपये का भुगतान कृषि विभाग द्वारा अग्रिम तौर पर आॅनलाइन सम्बन्धित पंचायतों के खातों में उपलब्ध कराया जायेगा, जो धनराशि हस्तान्तरित होने की तिथि से एक माह के अन्दर यंत्र क्रय कर लिया जायेगा। समितियों एवं पंचायतों द्वारा निर्धारित समय के अन्तर्गत कृषि यंत्र का क्रय, रख-रखाव, किराये पर कृषकों को यंत्र उपलब्ध कराना, अभिलेखों का रख-रखाव एवं अनुरक्षण का अनुश्रवण करने का दायित्व जिला पंचायत राज अधिकारी का होगा। 


गत वर्ष जिन ग्राम पंचायतों में फसल अवशेष जलाये गये थे ।  उसमें से 5 के सापेक्ष 5 ग्राम पंचायतों यथा ग्राम पंचायत उमरी विकास खण्ड मुस्करा, ग्राम पंचायत ममना विकास खण्ड सरीला, ग्राम पंचायत खरौंज , कुतुबपुर विकास खण्ड कुरारा, ग्राम पंचायत सरसई विकास खण्ड गोहाण्ड का चयन किया गया है। 

     जिलाधिकारी ने कृषि यंत्रों की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए उन्ही यंत्रों को क्रय करने पर विशेष बल दिया, जो फसल अवशेष प्रबन्धन के लिए स्थानीय स्तर पर सर्वाधिक उपयुक्त हों ,ताकि कृषकों का समय, श्रम एवं व्यय में कमी आ सके।इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये तथा ग्राम प्रधानों को भी सूचित किया जाये कि उनके ग्राम पंचायत में फसल अवशेष न जलाने जाने की सतत निगरानी की जाये, उल्लंघन  की दशा में तत्काल सम्बन्धित लेखपाल/तहसीलदार को अवगत कराये, ताकि दण्डात्मक कार्यवाही करायी जा सके। 


उन्होने यह भी निर्देशित किया कि गत वर्ष जहां से पराली जलाने की शिकायत आयी थी , उन कृषकों के खेत से पराली संग्रह कर निराश्रित गौशालाओं को भेजा जाये। पराली संग्रह करने हेतु आवश्यक धनराशि की व्यवस्था मनरेगा अथवा वित्त आयोग द्वारा की जायेगी।  कृषकों के खेत से गौशाला स्थल तक पराली का ढुलान पशुपालन विभाग द्वारा किया जायेगा। राजस्व ग्राम के लेखपाल व थाना प्रभारियों को निर्देश है कि किसी भी दशा में फसल अवशेष को न जलने दें। 

    जिलाधिकारी का निर्देश है कि यदि कोई भी कम्बाइन हार्वेस्टर, सुपर स्ट्रा मैनेजमेन्ट सिस्टम अथवा स्ट्रा रीपर अथवा स्ट्रा रैक, बेलर के बगैर चलते हुए पायी जाये तो उसको तत्काल सीज कर लिया जायें , और कम्बाइन मालिक के स्वयं के खर्चे पर सुपर स्ट्रा मैनेजमेन्ट सिस्टम लगवाकर ही छोड़ा जाये।


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