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Monday, September 14, 2020

ग्राम पंचायत चाकी के ग्रामीणों को हताशा निराशा के आगे कुछ नहीं गवारा

साहब हम तो मजदूर है, हमारी सुने कौन 

माधौगढ़ (जालौन), अजय मिश्रा । विकास खण्ड माधौगढ़ की ग्राम पंचायत चाकी की अनौखी व अनूठी कहानी कितनी सच्ची कितनी झूठी गाँव की हालिया स्थिति को बयां किया जाये बिचारे मजदूर सरकार द्वारा दी जा रही सुख सुविधाओं से कोसों दूर है जिनके पास न आवास न ही मिला शौचालय हालांकि यदि देखा जाये तो सूबे के मुखिया मोदी जी, योगी जी ने गरीब लाचार, बेबस, मजदूरों के लिये कई प्रयास किये ताकि उनके भरण पोषण के साथ साथ उनकी दैनिक स्थिति को सुधारने मे अथक प्रयास किये उन्होंने मजदूरों के लिये आवास, शौचालय, बैंकों में शून्य

गांव की समस्यायें बताते चाकी के ग्रामीण।

खाता धारक को प्रतिमाह 500 रुपये भी दिया गया इतना ही नही कोरोना वैश्विक महामारी को लेकर लॉक डाउन मे शहरों से आये प्रवासी मजदूरों को रोजगार गारंटी के तरत काम भी दिया गया वो मजदूरी मे 182 रुपये से इजाफा करते हुए 201 रुपये कर दी गयी कि मनरेगा के तहत काम मिलने से मजदूरों की रोजी रोटी का गुजारा चल सके लेकिन यदि देखा जाये तो ग्राम चाकी मे कुछ मजदूर अपना जीवन कच्चे फूटे मकान मे गुजारने को मजबूर हैं, इतना ही नही बेबसी के आगे इतना लाचार की शौचालय से भी वंचित रख दिया गया।

हम तो साहब बूंद बूंद प्यासे है

कई महीनों से हैंडपंप खराब पड़ा है जिसको लेकर ग्रामीणों ने प्रधान व उच्च अधिकारियों से शिकायत की लेकिन इसका कोई असर नही हुआ।

हम तो मजदूर हैं, हमें कीचड़ में चलने की आदत है

हमेशा से देखा जाता है कि गॉव के घुसने वाले रास्ते को अच्छा व गॉव के अन्दर का रास्ता ढोल मे पोल समान होता है ऐसा ही कुछ ग्राम पंचायत चाकी की कहानी है जिसमे गाँव अन्दर नालियों में भरी पड़ी गन्दगी व रास्ते से चलना निकलना लोगों का रहना हुआ नरक हालांकि यदि देखा जाये तो स्वच्छता अभियान को ताक पर रखकर जमकर उपहास उड़ाया जा रहा है। 

गॉव में बीच रास्ते बना मौत का कुआं

गॉव में रास्ते पर काफी पुराना कुआँ बना हुआ है जिसको लेकर ग्रामीणों ने सचिव व ग्राम प्रधान को जानकारी दी की गहरा जीड़ छीण कुआँ कभी भी एक बड़ी दुर्घटना को दाबत दे सकता है लेकिन इन मजदूर ग्रामीणों की शिकायतों व जानकारी को नजर अंदाज कर दिया गया।


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