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Tuesday, September 29, 2020

कोरोना काल में बनाई पहचान, खून देकर बचाईं जान

सोशल मीडिया के जरिए खून मुहैया करा रहे स्वयंसेवी

‘सेवर्स आफ लाइफ’ व ‘रेड क्लब’ ग्रुप बने कोरोना वारियर्स

अप्रैल से अब 300 लोगों को दे चुके हैं जीवनदान 

बांदा, के एस दुबे । रक्तदान सबसे बड़ा दान है। कोरोना काल में रक्तदान का महत्व और बढ़ गया है। लेकिन कोरोना महामारी के दौरान लोग अस्पताल जाने के साथ ही ब्लड बैंक जाने से भी डर रहे हैं। ऐसे में ब्लड बैंकों में रक्त का अभाव होने लगा है। इसी अभाव के काल में स्वयंसेवियों ने दो महत्वपूर्ण व्हाट्सअप ग्रुप ‘सेवर्स आफ लाइफ’ और ‘रेड क्लब’ के माध्यम से सैकड़ों लोगों को जीवनदान दिया है। जरूरमंदों को इन्हीं ग्रुप से ब्लड मुहैया करा रहे हैं। 

आनलाइन आए सदस्यों के फार्म की जांच करते रेड क्लब गु्रप एडमिन सचिन चतुर्वेदी

कोरोना काल में जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में रक्तदाताओं का अकाल पड़ गया। गंभीर मरीजों के जीवन पर मौत के बादल मंडराने लगे। ऐसे में ब्लड की जरूरत को देखते हुए स्वयंसेवियों ने सोशल मीडिया का सहारा लिया। व्हाट्सअप पर ‘सेवर्स आफ लाइफ’ व ‘रेड क्लब’ नाम से ग्रुप बनाकर जरूरतमंदों को ब्लड मुहैया कराना शुरू कर दिया। ‘सेवर्स आफ लाइफ’ गु्रप के एडमिन और मर्दननाका निवासी मोहम्मद सलमान का कहना है कि ब्लड को किसी लैब में तैयार नहीं किया जा सकता। वरिष्ठ महिला रोग विशेषज्ञ डा. शबाना रफीक की प्रेरणा से उन्होंने व्हाट्सअप ग्रुप तैयार किया। उनके ग्रुप के जरिए जिला अस्पताल सहित रफीक नर्सिंग होम व अन्य प्राइवेट अस्पतालों में जरूरतमंदों तक गु्रप के रक्तदाताओं ने ब्लड दिया। लाकडाउन से अब तक 168 लोगों को खून दिया जा चुका है। 

‘रेड क्लब’ गु्रप के एडमिन सचिन चतुर्वेदी बताते हैं कि खून देकर किसी की जान बचाने में सुकून मिलता है। ऐसे में विभिन्न जाति व धर्म के लोगों से खून का रिश्ता भी बना जाता है। बताया कि एक बार वह अपने बीमार रिश्तेदार के लिए खून लेने ब्लड बैंक गए थे। लेकिन वहां मौके पर रक्त नहीं मिला। उन्होंने अपना ब्लड देकर रिश्तेदार की जान बचाई। इसी से प्रेरित होकर उन्होंने ग्रुप तैयार किया। प्रतिमाह 20 से 25 यूनिट ब्लड लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। 

जिला अस्पताल के महिला वार्ड में भर्ती जसपुरा कस्बे की रहने वाली 32 वर्षीय रेखा के पति संतोष कुमार ने बताया कि उसकी पत्नी कैंसर रोग से पीड़ित है। कुछ दिन पहले हालत ज्यादा खराब होने पर यहां भर्ती कराया है। खून की आवश्यकता होने पर वह ब्लड बैंक गया। लेकिन वहां ब्लड नहीं मिला। वह भी अपना खून देने में असमर्थ है। ब्लड बैंक में मौजूद कर्मियों ने उसे रेड क्लब के सचिन चतुर्वेदी का नंबर दिया। उनसे बात करने के बाद किसी रक्तदाता ने आकर उसकी पत्नी को खून दिया। खून चढ़ने के बाद रेखा के स्वास्थ्य में सुधार हो गया।

करें संपर्क, मिलेगा ब्लड 

बांदा। जिला पुरूष अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एसएन मिश्रा ने बताया कि उक्त दोनों ग्रुप का कोरोना संक्रमण काल में बड़ा योगदान रहा है। ब्लड बैंक में ब्लड की डिमांड आने पर मरीजों के परिजनों को दोनों ग्रुप के एडमिन तथा सदस्यों की सूची उपलब्ध करा दी जाती है। तीमारदार सूची में दर्ज मोबाइल नंबर पर बात करते हैं। इन्हीं से कोई डोनर आकर ब्लड डोनेट कर देता है।  

आनलाइन भी ब्लड उपलब्ध करा रहा ‘रेड क्लब’

बांदा। क्लब के एडमिन सचिन चतुर्वेदी ने बताया कि जुलाई 2016 में अपने साथी श्यामजी निगम व अभिषेक सिंह के साथ रेड क्लब ग्रुप की शुरूआत की थी। मौजूदा में फेसबुक ग्रुप में 835 सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि ग्रुप में सदस्यता लेने और ब्लड की आवश्यकता होने पर ऑनलाइन आवेदन भी शुरू किया गया है। 15 दिन पहले ही उन्होंने ऑनलाइन फार्म अपलोड किया है। इससे रक्तदाताओं के ब्लड ग्रुप और ब्लड की उपलब्धता का पता आसानी से चल सकेगा। 


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