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Wednesday, September 23, 2020

करोना का प्रकोप बढ़ता हुआ..........

देवेश प्रताप सिंह राठौर ,

स्वावलंबी, 

(वरिष्ठ पत्रकार)

..... उत्तर प्रदेश के क्षेत्रपूर्वांचल , मध्यांचल  और बुंदेलखंड सभी क्षेत्रों में कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। उसी स्थिति में आज के वर्तमान समय को देखते हुए लॉकडाउन पूर्ण रूप से हटा दिया गया है जीवन स्तर सामान्य तौर पर चलने लगा है कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। जिसका मुख्य कारण है भारत देश के अधिकांश संख्या के लोग कोरोना वायरस कहते हैं ,कुछ है ही नहीं इसमें सबसे ज्यादा जाति की बात करते हैं उस जाति के लोग हैं जिन्होंने कोरोना वायरस फैलाने में जमाती लोगों ने तेजी से कोरोना फैलाया कुरौना संकलित फैलाने में प्रथम दिल्ली में एकत्रित विश्व के सभी मुस्लिम कंट्री ओं से धर्म प्रचार करने वाले हैं जमातियों का मुखिया साद आज तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ पाया क्यों क्या पुलिस इतनी ज्यादा कार्यशैली पर कमजोर हो गई है ,कि वह धर्म के प्रचार के बहाने कोरोना वायरस को देश में फैलाने में बहुत बड़ा योगदान इन जमातीयों का रहा है। मैं किसी जाति धर्म का विरोधी नहीं हूं लेकिन मैं दावे के साथ लिख सकता हूं


और लिख रहा हूं ।जिस विभाग में जिस स्थान पर जिस दुकान पर जिस ठेले  पर जिस  या सब्जी वाले पर जिस फल वाली  दुकान पर मुसलमान व्यक्त की दुकान है ।वह सुरक्षा बिल्कुल नहीं अपनी कर कर रहे है ।हॉल ना दूसरे लोग उन्हें उनके मास्क ना लगाने से लेकर सभी कार्य सोशल डिस्टेंस को भूल कर खुल्लम खुल्ला सब्जी मंडी हो या चौराहा हो या कहीं भी आप देखेंगे उनकी दुकानों पर कोई भी कोरोना संक्रमित के बचाव हेतु कोई उपाय नहीं है।मैंने कई दुकानदारों से सामान लेते समय कहां भाई कुछ तो सोशल डिस्टेंस रखो अपने मुंह में मास्क लगा लो पर हूं उस दुकानदार का क्या जवाब था कह रहे अंकल जी कहां पड़े हो चक्कर में कहां कोरोनावायरस कुछ नहीं है। यह जवाब मिलता है। मैं आपको बताना चाहता हूं मैं जहां पर कार्य करता हूं वहां पर एक दो लोग वरिष्ठ फील्ड कार्यकर्ता है वह सोशल डिस्टेंस और ना मुंह में मास्क बांधना जो एक रेखाएं बनाई गई है इन रेखाओं के पीछे रहा कर कार्य किया जाए वह अंदर  चेंबर  में घुसकर कैश काउंटर में घुसकर हर बाबू के पीछे खड़े होकर दिन भर वह और उनकी टीम के लोग सभी नियम कानून को तोड़ते रहते हैं। और समझाओ तो कहते हैं करोना और ना कुछ नहीं है यह योगी और नरेंद्र मोदी की चाल है जिसमें इनकार करता उस टीम के रिजर्वेशन वाले हैं कोटे से आते हैं वह एजेंट हैं वह पूर्ण रूप से समझाने पर मारपीट पर उतारू हो जाते हैं क्योंकि उन्हें सोशल डिस्टेंस की बात करना और समूह के रूप में आकर प्रतियां खराब होने के कारण वहां का कर्मचारी इनकी बातों को सुनकर खून के घूंट पीकर रह जाता है इतना गलत व्यवहार करते हैं। अभिकर्ता उनकी हां में हां मिलाते हैं और सारे नियम कानून भूलकर जिसे भी चाहते हैं अपशब्द कहते रहते हैं।यह सोच यहां के अल्पसंख्यक जिसे हम कहते हैं मुसलमान भाइयों की है। मैं मेरे अलावा मेरे संरक्षक मेरे पारिवारिक डॉक्टर मेरे अन्य समझदार बुजुर्ग लोग ने साफ कहा है, आप लोग अपनी सुरक्षा के तहत सरकार के द्वारा दी गई गाइडलाइन का पूर्ण रुप से पालन करते हुए कार्य करें तथा 50% स्टाफ कार्य करेगा 50% स्टॉप समय तय करके आपस में समन्वय बनाकर स्टाफ को कार्य करना है। परंतु मुझे अफसोस है की आज बहुत सी संस्थाएं हैं जहां पर नियमों का पालन किया जाता है ।और प्राइवेट संस्थाएं हैं मैं उनके  नाम बहुत लंबी लिस्ट हो जाएगी वहां सब जगह नियम का पालन हो रहा है और जिस संस्था में एक व्यक्ति कार्य करता है वह बताता है यहां का स्टाफ की कोई हैसियत नहीं है यहां का अभिकर्ता कोई भी नियम कानून तोड़ता है अगर उसे मना किया जाए पूरा समूह के रूप में खड़े होकर अपने वरिष्ठ जमाती जात के लोगों के साथ इकट्ठे होकर झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। कहते हैं तुम लोगों को तनखा मैं दे रहा हूं जैसा मैं कहूंगा वैसा करोगे और वरिष्ठ लोग भी उनके तेवरों को देखकर नतमस्तक हो जाते हैं। उनके सामने कोई नियम कानून नहीं है। जो लोग यह कहते हैं मेरे कारण यह संस्था चल रही है मैं उनसे कहना चाहता हूं जब इस संस्था में आप जुड़े थे आपके साथियों ने बताया फटी चड्डी फटा पजामा हवाई चप्पल पहन कर गली गली घूमते थे ना पड़े हो ना पड़े थे लेकिन 20 एवं 25 साल पहले  संस्था में जुड़ गए एजेंट बन गए लोगों से पैसा ला ला कर संस्था में जमा किया और आज आपकी हैसियत करोड़ों में है उसी संस्था को आज आप गाली दे रहे हैं लोगों को भड़का रहे हैं कोई भी शर्म लिहाज नहीं है सारी मानवता को तोड़ चुके हैं कोई भी मैनेजर उनके समक्ष नियम कानून की बात नहीं कर सकता यह हाल है। ऐसी संस्था में अच्छे लोग इमानदार लोग बेज्जती की जिंदगी पसंद नहीं करते है। आज कोरोना वायरस जिस तरह से आप इसमें भीड़ होती है लोगों को लेकर काउंटर के अंदर वरिष्ठ फील्ड कार्यकर्ता घूमता फिरता है भद्दी भद्दी गालियां देता है जहां इच्छा वहां बैठ जाता है जहां अच्छा हुआ घुस जाता है यह हाल है कैसे किसी से न्याय की उम्मीद की जा सकती है। वायरस संक्रमित बनाने में सबसे बड़ा योगदान हिंदुस्तान के अल्पसंख्यक लोग हैं मैं यह दावे और विश्वास के साथ कुछ विभागों में जाकर आ सरकार चाहेगी मैं साक्ष उन विभागों में ले जाकर दिखा सकता हूं। एक हमारे परिचित कानपुर हैलट अस्पताल के डॉक्टर डॉक्टर अमित गुप्ता न्यूरो फिजीशियन उनकी ड्यूटी लगी थी करुणा संस्कृत मरीजों में 42 साल उम्र के नए डॉक्टर हैं हष्ट पुष्ट 6 फुट लंबाई होने के साथ यूनिटी पावर भी अच्छी थी कोरोना संक्रमित में उन्होंने बहुत ही सुंदर कार्य किया कोरोना मरीज को उन्होंने इलाज किया और परिवार से दूर रहकर होटल में रहते थे पूरी उन्होंने ड्यूटी भी एक महीने तक उसके बाद इनका जब सैंपल लिया गया तो डॉक्टर साहब कोरोना संक्रमित निकले और वह 15 या20 दिन बाद जब ठीक कोरोना वायरस की रिपोर्ट नेगेटिव आई परंतु उनके हार्ड में लंच में करुणा वायरस का अटैक ज्यादा तेज हुआ जिस कारण वह कोलकाता में हार्ड के बहुत ही एशिया लेवल के सबसे  बड़े डॉक्टर हैं ।वहां पर दिखाने जा रहे हैं मेरा कहने का मतलब यह है वह डॉक्टर हमेशा समाज सेवा अपनी जान जोखिम में डालकर कोरोना संक्रमित लोगों का इलाज महीने भर अस्पतालों में किया स्वयं परिवार से दूर होटल में रहते थे यह त्याग करने वाले डॉक्टर साहब से मेरी बात हुई मैंने कहा डॉक्टर साहब आप जल्दी स्वस्थ होंगे क्योंकि आपने बहुत लोगों की जिंदगी यों को बचाया है।

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