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Wednesday, September 2, 2020

नदी-सरोवरों में किया जा रहा पितरों का तर्पण

नवाब टैंक और केन नदी में उमड़ी लोगों की भीड़ 

एक पखवारे तक चलेगा तर्पण, श्राद्ध भी शुरू 

बांदा, के एस दुबे । पितरों का तर्पण करने के लिए नदी और सरोवरों में लोगों की भीड़ उमड़ रही है। बुधवार को पितृ पक्ष के प्रथम दिन बुधवार को केन नदी और नवाब टैंक में पितरों का तर्पण करने के लिए लोग पहुंचे। पूरे विधि विधान के साथ पितरों को जल अर्पण किया। इसी के साथ ही श्राद्ध का सिलसिला भी शुरू हो गया है। 

सनातन धर्म में पितरों को बड़ी मान्यता दी गई है। तुलसी ने भी मानस में लिखा है कि जिसके पितर उससे प्रसन्न रहते हैं उस पर परमात्मा भी कृपा करता है। इसीलिये माता-पिता और वृद्धों की सेवा बताई गई है। वर्ष में एक पखवारा पितरों के नाम किया गया है। इन दिनों में वे लोग जिनके माता-पिता का स्वर्गवास हो चुका होता है वे उन्हें जल देते हैं क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इन्हीं दिनों में दिया गया जल उन्हें प्राप्त होता है। तिथियों के अनुसार इन्हीं

नवाब टैंक में पितरों को जल अर्पित करते लोग

पंद्रह दिनों में श्राद्धकर्म भी किया जाता है, जिसमें पितरों का पूरी श्रद्धा के साथ पूजन करने के बाद गाय, कुत्ता और कौओं का भाग निकाला जाता है। पितरों को जल देने का क्रम भाद्रप्रद मास की पूर्णिमा से आरंभ हो जाता है। यह लगातार अमावस्या तक चलता है। पितरों को जल देने के लिये पहले दिन बुधवार को ऐसे तमाम लोग नवाब टैंक और केन नदी के तट पर एकत्र हुए जिनके माता या पिता का स्वर्गवास हो चुका है। नियमानुसार इन लोगों ने कुशा के माध्यम से पहले देवताओं को और फिर अपने पितरों को पानी दिया। जो लोग नित्य किसी तालाब या नदी में नहीं जा पाते वे एक बड़े पात्र में जल भरकर उसी तरह से पितरों को पानी देते हैं। इन्हीं दिनों में पितरों की आत्मा की शांति के लिये गया करने का भी विधान है। ओम प्रकाश द्विवेदी ने बताया कि जो लोग पितृ पक्ष में अपने पितरों का श्राद्ध या जलदान नहीं करते उनके पितर उन्हें श्राप देते हैं। इससे व्यक्ति वर्ष भर परेशानियों में पड़ा रहता है। कहा कि मार्कण्डेय पुराण के अनुसार श्राद्ध से तृप्त पितृगण श्राद्धकर्ता को भौतिक संपदा के साथ दीघार्यु प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति पितृ पक्ष के पखवारे में एक दिन भी श्राद्ध कर्म करता है उसके पितृ वर्ष भर के लिए संतुष्ट हो जाते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन, धन और श्रद्धा से किया जाने वाला पितृ कर्म वंश को खुशहाली देता है।


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