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Thursday, September 3, 2020

कुपोषित बच्चों और महिलाओं को स्वस्थ करे - राष्ट्रीय पोषण माह शुरू

हमीरपुर, महेश अवस्थी  । जिलाधिकारी डॉ ज्ञानेश्वर त्रिपाठी ने कहा कि  जिले में संपूर्ण सितंबर माह में तृतीय राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन किया जाएगा,  जिसके माध्यम से गंभीर तीव्र कुपोषित बच्चों , कुपोषित बच्चों , कुपोषित महिलाओं की प्रारंभिक पहचान कर उनको सुपोषित किए जाने हेतु प्रभावी कार्यवाही की जाएगी।  राष्ट्रीय पोषण माह का औपचारिक शुभारंभ 07 सितंबर को होगा ।  राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर स्तनपान के साथ ऊपरी आहार के माध्यम से बच्चों में कुपोषण के स्तर में कमी लाने हेतु  लोगो को प्रोत्साहित किया जाएगा। ज्ञात हो कि मां का दूध से शिशु के व्यापक मानसिक विकास ,शिशु को डायरिया, निमोनिया, कुपोषण से बचाने और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है तथा छह माह तक केवल स्तनपान तथा इसके पश्चात हल्का पौष्टिक आहार को प्रयोग हेतु बढ़ावा दिया जाएगा। पोषण माह में किचन ट्री गार्डन/ पौधे लगाए जाने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है । इसके लिए सभी कन्वर्जेंस विभाग पंचायत राज ,शिक्षा , कृषि ,आई सी डी एस, स्वास्थ्य, खाद्य रसद , शिक्षा ,ग्रामीण विकास ,समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण द्वारा संयुक्त रूप से अपनी अपनी भूमिका का निर्वहन कर  पोषण माह  को सफल बनाने की  कार्रवाई  सुनिश्चित की जाएगी।

 


 जिलाधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान आंगनवाडी कार्यकत्री, सहायिका, सुपरवाइजर द्वारा घर-घर जाकर कुपोषित बच्चों का चिन्हित कर उनका वजन किया जाएगा ।तथा लोगों को पौष्टिक आहार लेने , घर में पोषण वाटिका लगाने के बारे में जागरूक किया जाएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में बेबी फ्रेंडली शौचालय उपलब्ध होने चाहिए , इसके लिए जिन आंगन वाड़ी केंद्रों में अभी तक यह शौचालय नहीं है तत्काल पंचायत राज विभाग द्वारा बनवाया जाए।  स्वास्थ्य विभाग द्वारा वजन मशीनों का शीघ्र क्रय कर लिया जाए । सुपरवाइजर व सी डी पी ओ द्वारा अपने सामने ही पोषण आहार का वितरण सुनिश्चित कराया जाए। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने कहा कि सीडीपीओ व आंगनवाड़ी सुपरवाइजर द्वारा 15  दिवसों  में आंगनवाड़ी केंद्रों का अनिवार्यता भ्रमण कर वहां की साफ-सफाई, पोषाहार वितरण तथा अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए ।इसमें किसी तरह की लापरवाही न बरती जाए।     जिलाधिकारी ने कहा कि टीबी रोग से ग्रस्त बच्चों को जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा गोद लिया जाए तथा गोद लेने के पश्चात प्रत्येक माह उनको समय समय पर  दवाएं  दिए जाने समय-समय पर जांच करने तथा उनको पौष्टिक आहार दिए जाने हेतु पर्यवेक्षणीय कार्य कर  बच्चों को शीघ्र टीबी के रोग से मुक्त कराया जाय।


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