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Friday, September 11, 2020

नहर न चलने से सूख रही फसलें, किसानों ने लगाई गुहार

राजापुर (चित्रकूट)। जहाँ एक ओर राज्य सरकार के सिंचाई मंत्रालय द्वारा 24 घण्टे पम्प कैनाल चलाने के आदेश हैं। वहीं चिल्ली राकस पम्प कैनाल राजापुर हफ्तों से बंद पड़ा होने के कारण किसानों की धान की फसल सूखती जा रही है। कई वर्ष पूर्व 50 क्यूसेक की क्षमता से नहर चला करता था जिससे किसानों को पर्याप्त मात्रा में सिंचाई के लिए पानी मिलता था, लेकिन सिंचाई विभाग की लापरवाही के चलते किसान अब सिर्फ ट्यूबवेलों पर ही आश्रित रहता है, लेकिन बिजली की अधाधुंध कटौती से किसान खासे परेशान नजर आ रहे हैं। 

ग्राम बेराउर के प्रधान धीरेंद्र सिंह, प्रधान चिल्ली राकस सन्तोष कुमार यादव ने बताया कि कई वर्ष पूर्व टेल तक नहर का पानी पहुँचता रहा है, लेकिन सिंचाई विभाग की लापरवाही के चलते सिर्फ नहर के इर्द-गिर्द गाँवों तक ही पानी पहुँचता है। आज के हालात ये हैं कि न तो नहर की सफाई की गई और न ही नहर चलाया जा रहा है। जिससे चिल्ली राकस, रायपुर, बेराऊर वर्तमान में नहर से चिल्ली राकस, बेराउर, मझगांव, खटवारा, मलवारा, महुआ गाँव, कुसेली, भटरी, उत्तमपुर आदि गांवों के किसान इसी नहर के भरोसे धान की फसल बो दिया है, लेकिन हफ्तों से नहर बन्द होने के कारण धान की फसलें सूख रही हैं और दैविक वर्षा भी नहीं हो रही। किसान की लागत

बैठक में निर्देश देते डीएम।

भी डूब रही है और किसान अपने खेत की मेड़ों में बैठकर बर्बाद होती फसल को देखकर मायूष होते हुए निहारता रहता है। दो शाखा में बनी नहर की पश्चिमी शाखा के सिर्फ तीन गांवों व दक्षिणी शाखा के खटवारा गांव तक नहर का पानी पहुंचता है और सिंचाई विभाग के नहर मानचित्रों में दर्जनों गाँव सिंचित दिखाए जाते हैं। जबकि मात्र चार छह गाँवों के अलावा कहीं भी पानी नहीं पहुँच रहा है। गाँव बेराऊर के पूर्व प्रधान शरदचन्द्र मिश्रा, भारतीय जनता पार्टी के नेता सत्येंद्र पाण्डेय, हरिश्चन्द्र पाण्डेय, समाजवादी पार्टी के राजेन्द्र शुक्ला आदि किसानों ने बताया कि राजापुर तहसील क्षेत्र के किसानों के विकास के लिए इस नहर का निर्माण कराया गया था लेकिन लगभग चार-पाँच वर्षों से इस नहर की दयनीय दुर्दशा है तथा सिंचाई विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों की लापरवाही के कारण इस क्षेत्र का किसान आज भुंखमरी की कगार पर खड़ा हो गया है। किसान की लागत भी डूब रही है और किसान बैंकों व साहूकारों से कर्ज लेकर कृषि में रुपए लगाता है और उसकी उपज से कर्ज का भुगतान नहीं कर पाता। जिससे इस क्षेत्र का किसान दो जून की रोटी व बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याओं का निराकरण नहीं कर पाता और बच्चे गरीबी के कारण अशिक्षित रह जाते हैं। सिंचाई विभाग के अधिकारी राज्य सरकार के आदेशों को धता बताकर रद्दी की टोकरी में डालकर मनमानी करते हैं। सिंचाई विभाग नहर के संचालन के प्रति पूरी तरह उदासीन है। क्षेत्रीय किसान घनश्याम पाण्डेय, कल्लू सिंह, अवधेश पाण्डेय, लक्ष्मी नारायण द्विवेदी आदि किसानों ने जिलाधिकारी से माँग किया है कि किसानों के हित को देखते हुए नहर चलवाई जाए।


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