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Saturday, September 12, 2020

जीर्णोद्धार की बाट जोह रही आबूनगर पुलिस चौकी

मानवाधिकार के अध्यक्ष ने डीजीपी को पत्र भेजकर उठाया मुद्दा 

फतेहपुर, शमशाद खान । कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरूस्त रखने वाली पुलिस जर्जर पुलिस चैकियों में अपना कामकाज निपटाने को विवश हैं। ऐसी ही एक चैकी शहर क्षेत्र में है। जिसे आबूनगर पुलिस चैकी के नाम से जाना जाता है। इस चैकी का भवन कच्चा है और छत भी खपरैल की बनी हुयी है। इस जर्जर पुलिस चैकी के कर्मी हमेशा भय के बीच अपना कामकाज निपटाते हैं। कई बार इस चैकी के जीर्णोद्धार की आवाज उठायी गयी लेकिन आज तक नतीजा सिफर रहा। मानवाधिकार के अध्यक्ष ने एक बार फिर पुलिस महानिदेशक लखनऊ को पत्र भेजकर जर्जर आबूनगर पुलिस चैकी को बनवाये जाने की मांग की है। 

जर्जर आबूनगर पुलिस चौकी का दृश्य।

बताते चलें कि शहर क्षेत्र की कानून व्यवस्था को चुस्त और दुरूस्त बनाये रखने के लिए कोतवाली पुलिस के साथ-साथ सम्बन्धित चैकी पुलिस की जिम्मेदारी है। शहर के अन्तर्गत आबूनगर, बाकरगंज, मुराइनटोला, हरिहरगंज, जेल रोड, कचेहरी, राधानगर चैकी आती हैं। इन चैकियों के भवनों पर अगर नजर दौड़ाई जाये तो बाकरगंज, जेल रोड, कचेहरी, हरिहरगंज व राधानगर चैकी की हालत तो कुछ हद तक बेहतर है लेकिन आबूनगर व मुराइनटोला चैकी जर्जर भवन में ही संचालित हो रही है। ये दोनों चैकियां शहर क्षेत्र के काफी बड़े इलाके को कवर करती हैं। मुराइनटोला चैकी की हालत तो कुछ हद तक ठीक-ठाक है लेकिन सबसे अधिक जर्जर हालत में आबूनगर चैकी आती है। यह चैकी अंग्रेजों के जमाने के कच्चे भवन व खपरैलनुमा छत में ही संचालित हो रही है। हालत यह है कि बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता रहता है। जिससे चैकी में रखे कागजात भी सुरक्षित नहीं रह पाते। यहां तैनात होने वाले चैकी इंचार्ज अपने स्तर से चैकी का मरम्मतीकरण तो कराते हैं लेकिन यह नाकाफी है। जिसके चलते पुलिस कर्मियों के बीच दहशत का माहौल व्याप्त रहता है। चैकी के अगले हिस्से की बात की जाये तो यह कुछ हद तक ठीक है लेकिन पिछला हिस्सा बेहद जर्जर हालत में है। यह हिस्सा कभी भी गिर सकता है। यदि किसी दिन पिछला हिस्सा गिर गया तो जनहानि भी हो सकती है। इस जर्जर चैकी को बनवाये जाने के लिए कई बार आवाज उठी लेकिन नतीजा सिफर रहा। इस मामले को लेकर मानवाधिकार के जिलाध्यक्ष मनीष कुमार तिवारी ने पुलिस महानिदेशक को एक पत्र भेजकर बताया कि आबूनगर चैकी में रहने योग्य कमरे भी नहीं है। बराबर सीलन बनी रहती है। बारिश में पानी भी टपकता रहता है। कमरे की स्थिति भी बेहर जर्जर है। उनका कहना रहा कि प्रदेश में जर्जर इमारतें गिरने से कई हादसे हो चुके हैं। कई पुलिस कर्मियों की जान भी जा चुकी है। ऐसे में गम्भीर खतरा बना हुआ है जो बेहद चिन्तनीय है। जिलाध्यक्ष का कहना रहा कि आपके कुशल प्रशासन ने पुलिस विभाग में नये आयाम स्थापित किये हैं। उन्होने डीजीपी से जर्जर भवन का जीर्णोद्धार कराये जाने की मांग की है। 


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