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Sunday, September 13, 2020

बुन्देलखण्ड में धन की बर्बादी के पर्याय बने पुरातत्व संरक्षित स्थल

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। बुन्देलखण्ड क्षेत्र में पुरातत्व संरक्षित स्थल प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये धन की बर्बादी के पर्याय बन गए है। दर्जनों ऐसे स्थल हैं जहां कर्मचारियों की नियुक्ति है। लाखों रुपये वेतन में सरकार प्रतिमाह खर्च कर रही है और इन स्थलों से आमदनी शून्य है। बुन्देली सेना ने केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रहलाद पटेल को पत्र भेजकर बुन्देलखण्ड के पर्यटन को आय का जरिया बनाए जाने की मांग की है।

बुन्देली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने बताया कि बुंदेलखंड में पर्यटन की असीम संभावना है। पड़ोसी मध्य प्रदेश में पर्यटन आय और रोजगार का बड़ा जरिया है, लेकिन बुन्देलखण्ड में पर्यटन पर सरकार प्रतिवर्ष करोड़ो

जर्जर हालत में सूर्यदेव मंदिर।

रूपये बर्बाद कर रही है। केवल केंद्रीय पुरातत्व संरक्षित स्थलों की बात की जाय तो बांदा में 19 और चित्रकूट में 18 दोनों जिलों में कुल 37 स्थल पुरातत्व संरक्षित हैं। बुन्देलखण्ड में 147 स्थलों का पुरातत्व विभाग संरक्षण करता है और देखरेख सिर्फ 27 स्थलों की की जा रही है। इसके अलावा राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा भी स्थलों को सूचीबद्ध किया गया है। बुन्देलखण्ड में पुरातत्व विभाग वर्ष में करोड़ों रुपये केवल स्थलों की देखरेख में बर्बाद कर रहा है। जबकि पुरातात्विक स्थलों में पर्यटकों को आकर्षित करने की असीम सम्भावनाएं हैं। यदि इन स्थलों में यात्री सुविधाओं को बढाकर इनका प्रचार-प्रसार किया जाय तो बुन्देलखण्ड का पर्यटन भी रोजगार और आयपरक बन जायेगा। केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रहलाद पटेल को भेजे पत्र में बुन्देली सेना जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने बताया कि बुन्देलखण्ड के पर्यटन को उद्योग के रूप में विकसित किए जाने की जरूरत है। ताकि युवाओं को यहीं रोजगार के अवसर सुलभ हों और यहां का पर्यटन भी आय का स्रोत बने।


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