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Friday, September 25, 2020

महान विचारक पंडित दीनदयाल उपाध्याय का 104 वां जयंती समारोह का हुआ आयोजन

 चंदौली, मोतीलाल गुप्ता । पड़ाव एकात्म मानववाद अंत्योदय के प्रणेता और  महान विचारक पंडित दीनदयाल उपाध्याय का 104  वां जयंती समारोह का आयोजन  स्थानीय चौराहा के पास बने पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यान में सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान रखते हुए बड़े ही हर्षोल्लास के साथ  भाजपा के प्रदेश स्तर के नेता व कार्यकर्ताओं द्वारा मनाया गया । उक्त कार्यक्रम की स्थापना में 1 दिन पूर्व ही रात्रि में 104 दीपो का वर्णमाला बनाकर कार्यक्रम का शुभारंभ कर दिया था जबकि शुक्रवार के दिन सुबह से कार्यक्रम की शुरुआत हुई जो उक्त उद्यान में बने पंडित दीनदयाल उपाध्याय का 63 फीट ऊंची  प्रतिमा के चरणों में  पुष्पांजलि अर्पित कर दीप


प्रज्वलित किया गया  तत्पश्चात वाराणसी और चंदौली के बड़े पदाधिकारी जिला परिषद महापौर विधायक और  कुछ  कार्यकर्ताओं ने मिलकर  104 वृक्षारोपण किया जिसमे विभिन्न पदाधिकारीयों ने अपने अपने नाम से वृक्ष लगाए। ततपश्चात पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन पर विचार किया गया जो  देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लाइव प्रसारण देखने के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ । इस मौके पर मुख्य रूप से वाराणसी महानगर वाराणसी और चंदौली जनपद के सांसद विधायक महापौर जिला पंचायत अध्यक्ष सभी प्रदेश पदाधिकारी क्षेत्रीय पदाधिकारी और जिला पदाधिकारी एवं समस्त मंडल अध्यक्ष इत्यादि रहे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप आये भाजपा के प्रदेश सहप्रभारी सुनील ओझा जी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जब मर्यादा थी, टी वी रेडियो नही

थी तब उनके भाषण के लेख प्रस्तुत किये। उनके जीवनकाल में उन्होंने कहा कि पश्चात संस्कृति जीवनशैली नही भारत के लिये ठीक है  नहीं अपितु भारत के लोगोके लिए ठीक है। भारत की पाश्चात्य आर्थिक नीति नही सही है। इसलिए उन्होंने संस्कृति और अर्थनीति दोनों भारतीय होनी चाहिये।  जब उन्होंने ये बाते कहि तब देश की आबादी मात्र 42 करोड़ थी । देश के 42 करोड़वें भारतीय तक का विकास होना एकात्मवाद हिस्सा है।  वही आगे बताया कि किस तरह से बचत से पूंजी बनानी चाहिए ना कि लोन से या संपत्तियों का विक्रय करके पूंजी बने। यह उन्होंने प्राचीन समय मे रुपये का मूल्य कम हो तो मध्यस्त का मूल्य नही होगा।  आज बिचौलियों के वजह से किसानों को उनके मेहनत का पूरा मूल्य नही मिल पाता । वही पंडित जी के बारे पत्रकारों से कहते हुए प्रदेश सहप्रभारी जी की बोली सरक गयी जयंती को पुण्ड्यतिथि ही बोल दिए।

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