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Tuesday, August 25, 2020

महाराजगद्दार है, सुन हिलीं महल जयविलास पैलेस की चूलें

भोपाल, अंकित जैन । भारतीयजनतापार्टी के शनिवार को ग्वालियर में आयोजित सदस्यता अभियान कार्यक्रम के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ ऐसे खिलाफत के स्वर उठेंगे, न ऐसा खुद भाजपा के अलंबरदारों ने सोचा था, और न खुद श्रीमंत को उम्मीद थी कि, जो कार्यकर्ता कल तक उनकी कृपा दृष्टि की एक झलक पाने के लिए घंटों दरबार में दंडवत होते थे, वे ही महल के सामने खड़े होकर उनको गद्दार-गद्दार कहने की हिमाकत करेंगे।  सिंधिया का मुखर विरोध ग्वालियर-चंबल संभाग की सियासत में अनहोनी तो है ही, हजारों कांग्रेस कार्यकताओं के इस जबरदस्त विरोध ने वैभवशाली महल- जय विलास पैलेस की चूलें हिलाकर रख दीं।


हजारों कांग्रेस कार्यकर्ता जब  महाराज, श्रीमंत गद्दार हैं-गद्दार हैं, के नारे लग रहे थे, तब ज्योतिरादित्य सिंधिया संग मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी मौजूद थे। हालांकि, इस सदस्यता कार्यक्रम में भाजपा ने पांच हजार कांग्रेस कार्यकर्ताओं के भाजपा की सदस्यता लेने का दावा किया। लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं के सिंधिया विरोध ने भाजपा के सिंधिया नहीं तो कांग्रेस नहीं, यानी ग्वालियर-चंबल संभाग में कांग्रेस को नेस्तनाबूद करने के मुगालते को भी पूरी तरह से साफ कर दिया। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया कि, जिन श्रीमंत की बदौलत भाजपा आने वाले दिनों में होने वाले उपचुनाव में 26 विधानसभा सीटों में से ग्वालियर-चंबल संभाग की 16 विधानसभा सीटों पर एक तरफा फतह करने का ख्वाब देख रही है, और भाजपा अपनी सरकार बचाने की जी-जान से कवायद कर रही है, उसकी डगर कतई आसान नहीं है।

तब भी महल का विरोध नहीं हुआ

राजनीतिक विज्ञानियों का कहना है कि महल और महाराज सिंधिया का उनके ही गृह नगर में विरोध ऐतिहासिक घटना है। एक तरह से महल के लिए बड़ी राजनीतिक अनहोनी है। जब ज्योतिरादित्य की दादी स्व. राजमाता सिंधिया और पिता स्व. माधवराव सिंधिया ने भी कांग्रेस छोड़ी थी, तब किसी की हिमाकत नहीं थी, महल के खिलाफ मुखर हो सके और दल-बदल का विरोध कर सके।

कांग्रेसियों ने नहीं, सिर्फ समर्थकों ने ली सदस्यता

भाजपा जिन पांच हजार कांग्रेस कार्यकर्ताओं के भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने का दावा कर रही है, कहा जा रहा कि उनमें खांटी कांग्रेसी विचारधारा में रचा-बसा एक भी कार्यकर्ता शामिल नहीं है। भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने वालों में वो कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हैं, जो सिंधिया समर्थक हैं, और जिनकी राजनीति सिर्फ महल और सिंधिया की कृपा पर जिंदा है। खास तथ्य तो यह कि इस दौरान एक भी कांग्रेस पार्षद तक ने सिंधिया के प्रभाव में भाजपा की सदस्यता लेने  में रूचि नहीं दिखाई। 

भाजपा के लिए उपचुनाव मुश्किल डगर

राजनीतिक विज्ञानियों का कहना है कि  कांग्रेस का हाथ छोड़कर भाजपा में शामिल होने से श्रीमंत का औरा (प्रभाव) कम हुआ है और जिस तरह से उनका विरोध हो रहा है, उससे आने वाले दिनों में होने वाले उपचुनाव में ग्वालियर-चंबल संभाग की 16 विधानसभा सीटों पर सिंधिया की सहारे भाजपा के लिए जीत की डगर कतई आसान नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इन 16 में से 4-5 सीटें भी भाजपा जीत ले, तो भी बहुत बड़ी बात होगी

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