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Tuesday, August 4, 2020

रसायन विज्ञान के थे पुरोधा

हमीरपुर, महेश अवस्थी  । विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद उत्तर प्रदेश( विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग उत्तर प्रदेश शासन )द्वारा संचालित जिला विज्ञान क्लब में डॉ प्रफुल्ल चंद्र राय के जन्म दिवस पर जिला विज्ञान क्लब के समन्वयक डॉ जी के द्विवेदी ने कहा कि प्रफुल्ल चंद्र राय का जन्म 2 अगस्त 1861 को बंगाल के रुडौली गांव में हुआ था । उनके पिता हरीश चंद्र राय  अपने गांव के समृद्ध एवं शिक्षित जमीदार थे। प्रफुल्ल चंद्र राय की प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता के हेयर स्कूल से हुई।उनको पुस्तकों में विशेष रूचि थी, वैज्ञानिकों बेंजामिन, फ्रेंकलिन और लिंकन के जीवन चरित्र से वे बहुत प्रभावित थे। साथ ही वैज्ञानिक प्रयोगों की तरफ उनका विशेष ध्यान था, वे अपना अधिकांश समय रसायन शास्त्र के प्रयोगों में व्यतीत करते थे ।  अक्टूबर 82 में विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया ।संसार भर के विद्यालयों में विज्ञान की पढ़ाई के लिए विज्ञान संबंधी पुस्तकें जर्मन भाषा में अध्ययन किया, यही से उन्होंने पीएचडी की ,18 87 में विश्व विद्यालय की रसायन सोसायटी के उपाध्यक्ष नियुक्त किए गए,कुछ दिनों बाद कॉलेज कोलकाता में उन्हें सहायक प्राध्यापक की नौकरी मिली ,वे जानते थे कि मनुष्य के जीवन के लिए रसायन विज्ञान 
कितना महत्वपूर्ण है ।  उन्होंने अनेक जीवनदायिनी दवाइयों का आविष्कार भी किया ।वे महान देशभक्त भी थे, उन्होंने अनेक स्वदेशी उद्योग धंधों को स्थापित करवाया । उदयपुर में  गंधक का तेजाब बनाने का कारखाना
लगाया, 1901में कोलकाता पोर्टरी वर्कस के नाम से चीनी मिट्टी बनाने का कारखाना स्थापित किया। 1905 में बंगाल स्टीम नेवीगेशन कं. के नाम से एक जहाजरानी कंपनी की स्थापना की। सन 1921 में बंगाल इनेमल वर्क्स नाम से चीनी की चीजें बनाने का कारखाना स्थापित किया।।उन्होंने रसायन विज्ञान की पुस्तक "हिंदू रसायन विज्ञान का इतिहास"नाम से अंग्रेजी में लिखी। उन्होंने "बंगाल केमिकल एंड फार्मास्यूटिकल वर्क्स" की स्थापना भी की । डॉ. राय भारतीय युवा रसायन शास्त्रीय को अपनी प्रयोगशाला में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करते थे और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी करते थे। उनके भाषण बहुत ही ज्ञानवर्धक प्रभावशाली एवं उपयोगी होते थे 14 जून 1944 को 83 वर्ष की आयु में इस महान वैज्ञानिक ने दुनिया छोड़ दी ।डॉ. राय  जीवन भर अन्याय , अत्याचार और अज्ञानता के विरुद्ध लड़ते रहे और मानव समाज को पराधीनता और निर्धनता से मुक्ति दिलाने के लिए प्रयत्नशील रहे।

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