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Monday, August 24, 2020

उपेक्षाओं व अव्यवस्थाओं से घिरी कापिल ग्राम पंचायत

अमौली-फतेहपुर, शमशाद खान । यूं तो देश के आजादी के तिहत्तर वर्ष पूरे हो चुके है। मगर जनपद के कई गाँव ऐसे है, जहाँ सरकार आज भी मूलभूत सुविधाओं तक इंतजाम नही कर पाई है। अमौली विकास खण्ड के ग्राम पंचायत कापिल के हालात कुछ ऐसे ही है। गाँव में ग्रामीण आज भी स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, शौचालय व पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। गांव के ग्रामीणों का कहना है कि गांव में विकास कार्यों के नाम पर आधे अधूरे कार्य हुए हैं। जनता के मत से चुने जनप्रतिनिधि चुनाव पूर्व झूठे आश्वासन कर लोगों के वोट बटोर ले जाते हैं। फिर पाँच वर्ष तक कोई नजर नही आता है। गाँव की मुख्य सड़कें और नालियां कीचड़ से बजबजा रही हैं। जिसके कारण ग्रामीणों का पैदल निकलना तक दूभर हो रहा है। साइकिल और मोटरसाइकिल तो बड़ी दूर की बात है। गांव में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। मगर जिम्मेदार लोग कुम्भकर्णी नींद में सोए हुए है। गाँव के वर्तमान हालत आज ऐसे है कि लोगो की व्यथा सुनने वाला कोई नही है। जिसके कारण गांव लगातार उपेक्षाओं का शिकार होता चला जा रहा है। गाँव में विकास के नाम पर कोई कार्य नही हुआ है। केवल जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों

कापिल ग्राम पंचायत में गन्दगी का दृश्य। 
ने अपनी जेबें भरी हुई हैं। गाँव पूरी तरह से समस्याओं में डूबा हुआ है। गाँव मे जो भी सड़के है, वो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है। गाँव मे जो हैंडपंप भी लगे है। वो भी खराब पड़े हुए हैं। राजीव गांधी स्वजल धारा योजना के अंतर्गत पानी की टंकी का निर्माण कार्य कई वर्ष बीत जाने के बाद भी आज भी आधा अधूरा पड़ा हुआ है। गाँव मे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बना हुआ है। मगर मरीजों को कभी भी समय पर इलाज नही मिल पाता है। दवाइयों का हरदम आभाव ही बना रहता है। चिकित्सा स्टाफ में कभी कभी फार्मेसिस्ट नजर आ जाता है। चिकित्सको के तो दर्शन दुर्लभ है। जबकि गाँव के आसपास के गांवों में भयंकर महामारी का प्रकोप फैला हुआ है। ग्राम पंचायत में शिक्षा के नाम पर प्राथमिक विद्यालय और उच्चतर प्राथमिक विद्यालय मौजूद है, मगर विधालयो में अभी तक मॉडल शौचालय और पेयजल की समुचित व्यवस्था कहीं नजर नही आती है। गांव से कहीं ज्यादा गाँव से जुड़े मजरे कीरतपुर और पंथू सिंह का पुरवा के हालात खराब हैं। वहाँ की हालात देखकर ऐसा प्रतीत होता है, ये गाँव किसी आदिवासी क्षेत्रों का हिस्सा है। जिम्मेदार लोग पूरी तरह से भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। किसी को भी जनता के दुःख तकलीफों से कोई वास्ता गरज नही है। सब अपनी जेबें भरने में मदमस्त हैं। अगर जल्द ही शासन प्रशासन ने जिम्मेदारों लोगो के विरुद्ध कोई ठोस प्रभावशाली कार्यवाही नही की तो गाँव के हालात बहुत ही बद से बत्तर हो जाएंगे।


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