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Sunday, August 30, 2020

कन्हाई को तरुणाई में दी फांसी, देश प्रेम की सजा

हमीरपुर, महेश अवस्थी । वर्णिता संस्था सुमेरपर ने विमर्श विविधा के अंतर्गत जरा याद करो कुर्बानी के तहत देश के लिए होम कर देने वाले अल्पायु शहीद कन्हाई ललित की जयंती पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया । संस्था के अध्यक्ष डॉक्टर भवानी दीन ने कहा कि कन्हाई लाल सही मायने में राष्ट्र सेवी थे । उन्होंने मात्र 20 वर्ष की आयु में देश की आजादी के लिए अपने को न्यौछावर कर दिया था, कन्हाई लाल दत्त का जन्म 30 अगस्त 1888 को पश्चिम बंगाल के चंदन नगर में चुन्नीलाल दत्त के घर हुआ था । कन्हाई का जन्म कृष्ण जन्माष्टमी की अंधेरी रात में हुआ था, संभवत इसी कारण इनका नाम कन्हाई लाल दत्त रखा ।  चंदन नगर के डूप्ले कालेज के प्राध्यापक चारुचंद्र का सानिध्य मिलने से कन्हाई क्रांति पथ के पथिक हो गए, स्नातक करने के बाद कन्हाई लाल कोलकाता गए और युगांतर कार्यालय में काम करने लगे । कन्हाई अब पूरी तरह क्रांतिकारी कार्यों में संलग्न हो चुके थे कोलकाता के मानिक तला के बगीचे मे ,जो डा वारीन्द्र घोष का बगीचा था,यहां पर बम पिस्तौल रहते थे । इस सिलसिले में पुलिस ने 35 देशभक्तों को बंदी बना लिया, जिनमें कन्हाईलाल भी थे,सबको अलीपुर कारागार में रखा गया ,इसी आधार पर इस केस को अलीपुर षड्यंत्र का नाम दिया गया, इनमें नरेंद्र गोस्वामी का नाम भी था, जिन्होंने सरकारी गवाह बन कर क्रांति कारियों की योजना पर पानी फेर दिया था, अब जेल में कन्हाई और उसके दोस्त सतेंद्र का एक ही लक्ष्य था नरेंद्र को खत्म करना ।सरकार नरेंद्र की सुरक्षा को लेकर सतर्क थी, कन्हाई और सतेन्द्र निरंतर प्रयासरत


थे, दोनों ने जेल वार्डर से मित्रता स्थापित कर बाहर से कटहल के अंदर दो पिस्तौल रखकर जेल में मंगवाए  । नरेन्द्र दोनों से मिलने हर दिन जेल जाता था, कन्हाई अवसर की तलाश में था, 31 अगस्त 1908 को नरेंद्र ने उस पर गोली चला दी , तमाम बाधाओं के बावजूद दोनों ने उसे ढेर कर दिया , दोनों पकड़े गए ।अंग्रेजों ने न्याय का नाटक कर  दोनों को फांसी की सजा सुनाई, कन्हाई लाल  को 10 नवंबर 1908  को फांसी पर लटका दिया गया, उनके योगदान को देश कभी भूल नहीं सकता है ।  इस कार्यक्रम में अवधेश कुमार गुप्ता एडवोकेट, राजकुमार सोनी सरार्फ, राधारमण गुप्त,कल्लू चौरसिया, गौरीशंकर गुप्त,पिन्कू सिह, लल्लन गुप्ता वृंदावन लाल गुप्ता , श्याम सुंदर गुप्ता,  नाथूराम पथिक, प्रांशु सोनी  मौजूद रहे।


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