जेल से छूटकर बीना लगी रही मिशन में - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Advt.

Monday, August 24, 2020

जेल से छूटकर बीना लगी रही मिशन में

हमीरपुर, महेश अवस्थी  ।  वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा  के अंतर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत साहस और शौर्य की साक्षी बीना दास की जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए संस्था के अध्यक्ष डॉक्टर भवानी दीन ने कहा कि बीना दास वह वीरांगना थी,जिन्हें कम करके नहीं आंका जा सकता है ।  देश की आजादी के संघर्ष में बीना दास का प्रभावी योगदान रहा  ।

उनका जन्म 24 अगस्त 1911 को बंगाल के कृष्णा नगर में प्रसिद्ध अध्यापक बेनी माधव दास के घर हुआ था ।उनकी मां  सरला एक जानी मानी सामाजिक कार्यकर्ता थी । यह परिवार प्रारंभ से ही ब्रह्म समाज से जुड़े होने के कारण देशसेवी था । बीना की बड़ी बहन का नाम कल्याणी था,इन दोनों बहनों पर देश भक्त परिवार का असर पड़ना स्वाभाविक था ।  इन दोनों बहनों ने बंकिम चंद्र चटर्जी ,मेजिनीऔर गैरीबाल्डी  जैसे लेखकों की रचनाओं का भी असर पड़ा । बीना का प्रारंभ से ही देशप्रेम की ओर झुकाव था ।1928 मे जब  साइमन कमीशन आया तो उसका विरोध करते हुये छात्राओं का नेतृत्व कर कालेज के गेट पर उन्होंने धरना दिया था । महिलाओं द्वारा संचालित महिला छात्री सन्घ की बीना दास सदस्या बन गयी,बीना स्कूली जीवन से गोरो के खिलाफ होने वाली रैलियों मे भाग लेने लगी थी । प्रारंभ कर दिया था, बन्गाल की महिला छात्री संघ मे 100 सदस्या थी । क्रान्ति नेत्री कमला  ने बीना

को एक रिवाल्वर दिया ।  पुण्याश्रम नामक संस्था मे हथियार, बम और अन्य शस्त्र रखे जाते थे ।  उन दिनो अधिकारियों को निशाना बनाकर यह दिखाना था कि जनता उनसे नफरत करती है । क्रांतिकारियों की योजनानुसार गवर्नर स्टेनले जैक्सन को मारने का निश्चय किया गया । जिसके लिये बीना दास का चयन किया गया, बीना ने बी ए पास किया था,  योजना के अनुसार गवर्नर को मारने का निश्चय किया गया ।6 फरवरी 1932  को कोलकाता विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में गवर्नर काभाषण शुरू हुआ, तभी बीना ने गवर्नर पर फायर कर दिया,निशाना चूक गया ।  बीना पकडी गयी,नौ वर्ष की जेल हुई । 1937 मे बीना जेल से छूट गयी,काग्रेस से बीना जुड गयी,1942 के भारत छोडो आन्दोलन मे तीन वर्ष की जेल हुई,1947 मे बीना स्वतंत्रता सेनानी ज्योतिष भौमिक से शादी करली, उनकी मृत्यु के बाद बीना टीचर बन कर ऋषि केश मे रही,अन्त मे 26 दिसंबर 1986 को उनका निधन हो गया । उनका शव सडक पर पडा रहा । अवधेश कुमार एडवोकेट, राजकुमार सोनी सरार्फ,पिंकू सिह, राधारमण गुप्त,गौरी शंकर गुप्त, लल्लन गुप्त, कल्लू चौरसिया ,अशोक अवस्थी और प्रान्शू मौजूद रहे।

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages