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Sunday, August 30, 2020

यौमे अशूरा: पुलिस की सख्ती से इमामबाड़े तक नही पहुंच सके अकीदतमंद

तकिया चांद शाह समेत अन्य इमामबाड़ों की गलियों को किया सील

अकीदतमंदों के साथ दुकानदारों में भी छाई मायूसी

फतेहपुर, शमशाद खान । हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों की शहादत यौमे आशूरा के दिन नौहा ख्वानी व अलम जुलूस के साथ बड़े शान के साथ निकलने वाला चांदू मिया का ताजिया कोरोना महामारी व पुलिस-प्रशासनिक की सख्ती के चलते जहाँ इस बार पर्दे से बाहर नही निकाला गया वहीं पुलिसिया सख्ती के चलते अकीदतमंद तकिया चांद शाह स्थित इमामबाड़े तक भी नही पहुँच सके। कोरोना महामारी व लॉकडाउन का हवाला देते हुए पुलिस व प्रशासनिक अफसरों द्वारा तकिया चाँद शाह की ओर जाने वाले सभी रास्तों को बल्लिया लगाकर बन्द कर दिया गया था। जिसके चलते मन्नत व मुरादों के मांगने व मन्नत पूरी होने पर हाजिरी लगाने वाले अकीदतमंदों में मायूसी व रोष व्याप्त रहा। कोरोना महामारी के दौरान मोहर्रम को लेकर प्रशसनिक स्तर से किसी तरह की छूट न मिलने से पहले ही तजियादारो में रोष था। ताजिया की बिक्री न होने से ताजिया कारोबारियों व कारीगरों के काम धंधा चैपट रहा। 

तकिया चांद शाह का बंद गेट एवं इमामबाड़े के बाहर तैनात सुरक्षा कर्मी।

शहर में ही आलम जुलूस ढोल ताशो के बीच छोटे बड़े मिलाकर घरों लगभग एक सैकड़ा से अधिक ताजिया निकाले जाते थे। आम दिनों में शहर में होने वाला मोहर्रम देखने और हजरत-ए-इमाम हुसैन के अनुयायियों में बाहरी जनपदों समेत जिले से ही सभी धर्मों के लाखों का मजमा लगता था। जबकि इस बार कोविड-19 व सोशल डिस्टेंसिंग का हवाला देते हुए सरकार द्वारा मोहर्रम पर किसी तरह की रियायत न देकर अलम जुलूस व ताजिया आदि के निकाले जाने को प्रबंधित कर दिया। प्रशसनिक सख्ती के चलते इस बार हजरत इमाम हुसैन (अ०स०) की शहादत का गम मनाने वालो में मायूसी रही। लोगों ने घरों में ही इबादत करने के साथ ही उनके नाम पर गरीबो में लंगर किया। इस दौरान घरों में ही अजादारी की मजलिस व नौहा ख्वानी की गयी। शिया समुदाय के लोगों द्वारा घरों में ही सीनाजनी कर हजरत-ए-इमाम हुसैन की शहादत का गम मनाया गया। भूख और प्यास के बीच मोहम्मद सल्ल० के नवासे हजरत-ए-इमाम हुसैन को कर्बला की धरती पर शहीद किये जाने की दास्तान सुनाई गयी। जिसमें यजीद के जुल्मों को याद करके लोगो की आँखे भर आयी। हजरत इमाम हुसैन की याद में मनाये जाने वाला मोहर्रम पर्व कोरोना महामारी के चलते पुराने रंग रूप की जगह सादगी से मनाया गया। शहर के अलग अलग रूटों से निकलने वाले अलम जुलूस, अखाड़े, ताजिये इस बार नही निकले। जिससे अकीदतमन्दों में नाराजगी व मायूसी देखने को मिली। वहीं अकीदतमंदों द्वारा नजर एवं मन्नतों को उतारने के लिये चांदू मियां के दरवाजे तक नहीं जाने दिया गया। जगह जगह पुलिस की मुस्तैदी व बल्लियों की बैरीकेटिंग के कारण अकीदतमन्द हाजिरी तक नही लगा सके। जिसके चलते उनमें रोष व्याप्त था। मोहर्रम पर्व पर बड़ी सख्या में भीड़ होने के कारण जनपद व दूर दराज से आये हुए दुकानदारों द्वारा दुकाने सजाई जाती है और सजावट समेत घरेलू उपयोग की वस्तुओं की जमकर खरीददारी की जाती है। मोहर्रम पर्व व ताजियादारी के न होने से इस बार दुकानदारांे के रोजगार पर भी असर देखने को मिला। जनपद में मोहर्रम पर्व पूरी तरह फीका रहने से अकीदतमंदों में मायूसी रही। लोगो ने इमाम हुसैन की शहादत की दास्तान को घरो में ताजा करने के लिये अशूरा का रोजा रखने के साथ नमाज अदा की। साथ ही मजलिस, नौहा ख्वानी व सीनाजनी की गयी।

लॉकडाउन व मोहर्रम के चलते खाकी रही मुस्तैद

फतेहपुर। कोरोना महामारी के दौरान मोहर्रम पर्व को लेकर पुलिस द्वारा चाक चैबंद व्यवस्था की गई थी। मोहर्रम के जुलूस व ताजिया निकालने पर प्रतिबंध के चलते पुलिस अधीक्षक प्रशांत वर्मा के निर्देशन में शहर के प्रमुख चैराहांे पर पुलिस कर्मियों की तैनाती की गयी। क्षेत्राधिकारी संजय कुमार शर्मा व सदर कोतवाल रवींद्र श्रीवास्तव द्वारा क्षेत्र में भ्रमण कर जायजा लिया जाता रहा। मोहर्रम पर्व के दौरान शहर में ताजिया व अलम जुलूस के दौरान लाखों की होने वाली भीड़ इस बार ताजियादारी न होने के कारण दिखाई नहीं दी लेकिन एहतियातन पुलिस द्वारा ताजिया स्थलों प्रमुख इमामबाड़ा के अलावा चैराहों पर पुलिस की तैनाती की गयी थी। दंगा व बलवा जैसी स्थिति से निपटने के लिये दंगा रोधी दलों के अलावा रिजर्व पुलिस बल की भी तैनाती की गयी थीं। इसके अलावा महिला पुलिस कर्मियों व खूफिया विभाग को भी तैनात किया गया था।


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