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Monday, August 3, 2020

बुन्देलखण्ड को प्राप्त है महान धरा का वैशिष्टय: जगद्गुरु

बुन्देलखण्ड का इतिहास, संस्कृति एवं कला पर हुआ राष्ट्रीय बेबीनार

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। जगदगुरु रामभद्राचार्य दिब्यांग विश्वविद्यालय के इतिहास संस्कृति एंव पुरातत्व विभाग द्वारा आयोजित बुंदेलखंड का इतिहास संस्कृति एंव कला विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय बेबीनार मे कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। 
जेआरडीयू के आजीवन कुलाधिपति पद्म विभूषित जगदगुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि सृष्टि के प्रारंभिक काल से ही बुंदेलखंड की माटी महान धरा का वैशिष्ट्य प्राप्त होता है। ब्रम्हा जी ने महादेव की स्थापना मतगजेंद्रनाथ जी के रूप में की थी। भगवान श्रीराम ने 12 वषों तक अपनी कर्म भूमि के रूप में चित्रकूट का चयन किया। राजा नल ने भी यहां पर निवास किया। महाकवि केशव दास ने रामचंद्रिका की रचना बुंदेलखंड की धरती पर ही की थी। महाराज छत्रसाल की भूमि भी यही है। युधिष्ठिर ने भगवान कामदगिरि की परिक्रमा करके ही राज्यभार ग्रहण किया था। यम को खुश करने के लिए मोरध्वज ने अपने पुत्र ताम्रध्वज को आरे से काटकर दान कर दिया था। इसी धरती पर महारानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों को धुल चटाई थी। प्रथम तकनीकी सत्र में मुख्य अतिथि प्रो डीपी तिवारी कुलपति केबीएसयू बिहार तथा प्रो जेएन पांडेय पूर्व विभागाध्यक्ष इतिहास इलाहाबाद विश्वविद्यालय, आदि ने बुंदेलखंड के
संबोधित करते जगदगुरु रामभद्राचार्य।
पुरातात्विक महत्व व इतिहास के संबंध में बुंदेलखंड पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जा सकता है।  प्रो अवनीश चंद्र मिश्रा विभागाध्यक्ष इतिहास विभाग, डा शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ ने बुंदेलखंड मे प्रथम पुरातात्विक महत्व को बताया। चित्रकूट के राजापुर मे कलवलिया गांव के सडवावीर मे है। साथ ही मूर्ति तस्करी पर भी प्रकाश डाला। दितीय तकनीकी सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो डीपी दुबे ने चित्रकूट के सांस्कृतिक विरासत के लिए अनछुए पहलुओं को बताया। कार्यक्रम के समापन पर कुलपति प्रो योगेश चंद्र दुबे ने बुंदेलखंड के ऐतिहासिक धरोहर के रूप में विकसित करने के लिए सुझाव दिया। बेबीनार में गणमान्य लोगों  का अभिनंदन डीन डा विनोद कुमार मिश्रा ने किया। कुलसचिव व कार्यक्रम संयोजक डा महेंद्र कुमार उपाध्याय ने अतिथियों के प्रति आभार जताया। बेबीनार की सह संयोजक डा प्रतिमा शुक्ला, तकनीकी सहयोग डा आनंद कुमार, विश्व विद्यालय के शिक्षक डा निहार रंजन मिश्रा, पीआरओ एसपी मिश्रा, विशेष दुबे, डा रजनीश सिंह, डा शांत चतुर्वेदी, डा प्रमिला मिश्रा, डा रीना पांडेय, डा तृप्ति रस्तोगी, डा सुनीता श्रीवास्तव, डा भविष्या माथुर सहित छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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