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Wednesday, August 12, 2020

जिले में हर्षोल्लास के बीच मनाया गया देवकी नन्दन का जन्मदिन

कोरोना के चलते नहीं हुए सामूहिक कार्यक्रम 

घर-घर व मंदिरों में हुयी सजावट, सोशल डिस्टेंसिंग के बीच किये दर्शन

जेल परिसर में भी हुयी पूजा-अर्चना, बांटा प्रसाद

फतेहपुर, शमशाद खान । समूचे जनपद में इस बार दो दिन कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कुछ लोगों ने मंगलवार की रात व कुछ ने बुधवार की रात देवकी नन्दन के जन्मदिन पर पूजा-अर्चना की। कृष्ण जन्माष्टमी के पर्व को लेकर घरों को सजाया एवं संवारा गया। मंदिरों में भी सजावट की गयी लेकिन कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते किसी तरह का सामूहिक कार्यक्रम नहीं हुआ। जिससे श्रद्धालुओं के बीच मायूसी भी साफ दिखाई दी। उधर जेल परिसर में भी देवकी नन्दन के जन्मदिन पर स्टाफ द्वारा पूजा-अर्चना कर कैदियों व बंदियों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। 

श्रीकृष्ण की वेशभूषा धारण किये बालक।
बताते चलें कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र के दिन रात्रि के 12 बजे हुआ था। श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ था। वे माता देवकी व पिता वासुदेव की आठवीं संतान थे। बताया जाता है कि द्वापरयुग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज करते थे। उनका एक आततायी पुत्र कंस था और उनकी एक बहन देवकी थी। देवकी का विवाह वसुदेव के साथ हुआ था। कंस ने अपने पिता को कारगर में डाल दिया और स्वयं मथुरा का राजा बन गया। कंस की मृत्यु उनके भांजे, देवकी की आठवीं संतान के हाथों होनी थी। कंस ने अपनी बहन और बहनोई को भी मथुरा के कारगर में कैद कर दिया और एक के बाद एक देवकी की सभी संतानों को मार दिया। कृष्ण का जन्म आधी रात को हुआ तब कारागृह के द्वार स्वतः ही खुल गए और सभी सिपाही निंद्रा में थे। वासुदेव के हाथो में लगी बेड़िया भी खुल गई थी गोकुल के निवासी नन्द की पत्नी यशोदा को भी संतान का जन्म होने वाला था। वासुदेव अपने पुत्र को सूप में रखकर कारागृह से निकल गये और सूप को नदी में छोड़ दिया। जिनका लालन पालन यशोदा ने किया। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवनकाल में शत्रुओं एवं राक्षसों का वध किया। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर लोगों में गजब का उत्साह देखा जाता है लेकिन इस बार देश में फैले कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से सभी त्योहार फीके-फीके नजर आ रहे हैं। कोरोना के बीच भी लोगों ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया। पर्व की तैयारियां पहले ही शुरू कर दी गयी थी। पूजन सामग्री के साथ-साथ सजावट का सामान लोगों ने खरीद लिया था। इस बार जिले में दो दिन त्योहार मनाया गया। कुछ लोगों ने मंगलवार की रात देवकी नन्दन की पूजा-अर्चना की तो कुछ ने बुधवार की रात कृष्ण जन्माष्टमी मनाई। रात के बारह बजते ही शंख, घण्टा एवं घड़ियाल की धुन सुनाई देने लगी। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाये। उधर पर्व को लेकर घरों के अलावा मंदिरों में भी सजावट की गयी थी। लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग के बीच मंदिर पहुंचकर भगवान की अराधना की। पुलिस व पीएसी लाइन में भी पर्व को लेकर सजावट की गयी लेकिन इस बार लोगों की भीड़ नहीं रही। जिससे पर्व का माहौल फीका रहा। जेल परिसर में भी कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर स्टाफ द्वारा पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होने के पश्चात प्रसाद का वितरण भी किया गया। कुल मिलाकर जिले भर में शांति एवं सौहार्द के बीच श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया गया। 


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