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Monday, August 3, 2020

चीन से वार्ता करना, स्वयं को धोखा देना ...............

देवेश प्रताप सिंह राठौर 
(वरिष्ठ पत्रकार)

.....भारत और चीन के बीच करीब तीन चार महीने से जो कोरोना काल शुरू होने से उसके बाद से चीन भारत की सीमा पर कुछ ना कुछ हरकत करता रहता है ।जिसकी चीन की गद्दारी का प्रमाण भारतीय  जवान को धोखे से यही चीन की कमांडर कोर कमेटी की वार्ता में जिस तरह से हमारे 20 जवानों को मारा गया इससे सिद्ध होता है चीन भारतीय सेना और चीन कमांड्रो से बातचीत सिर्फ एक भारत को भ्रमित करने का कार्य चीन कर रहा है और अंदर से उसकी कोई गंभीर चाल जरूर है। क्योंकि चीन निर्धारित जो सीमा रेखा है उससे अभी वह पूर्ण रुप से पीछे नहीं हटा है। ना हटेगा चूहा बिल्ली का खेल खेलने की स्थिति में यह स्पष्ट हो रहा है चीन के इरादे हमेशा की तरह छुपकर धोखा देने की रही है ।वही इस समय करने की स्थिति चीन कर सकता है भारत को दो टूक कह देना चाहिए अव  बस बहुत हुई वार्ता कमांडो की अब आप को जो निर्धारित है सीमा रेखा उससे बहार सीमा रेखा से होना है ,अगर बाहर नहीं होते हैं तो भारत को वही करना चाहिए जो व्यक्ति अपनी स्वयं रक्षा के लिए करता है। क्योंकि चीन एक ऐसा देश है जो वार्ता के नाम से अंदर ही अंदर कुछ खुराफात उसके दिमाग पर जरूर चल रहा है जिसे हम गद्दारी का रूप दे सकते हैं और इसकी विश्व में पहचान धोखा देना उसकी फितरत रही है। चीन पूर्ण रूप
से गद्दार है उसकी बातों पर विश्वास करना स्वयं को धोखा देने के बराबर है भारत चीन से साथ चल रही टेंशन के बीच भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बड़ा बयान दे दिया है. उन्होंने कहा कि भारत को चीन का मुकाबला करने के लिए तैयार होना ही होगा. आपको बता दें कि विदेश मंत्री का यह बयान चीन के साथ 5वें दौर की बातचीत से पहले आया. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने यह खबर दी है जो उनसे बातचीत पर आधारित है.अबातचीत के क्रम में चीन के मुद्दे पर एस जयशंकर ने कहा कि चीन के साथ संतुलन तक पहुंचना आसान नहीं है. भारत को उसका विरोध करना ही पडेगा…यही नहीं मुकाबले के लिए भी खड़ा होना होगा. पडोसी देश चीन को स्पष्ट संदेश देते हुए जयशंकर ने यह भी कहा कि इस तनाव का असर दोनों देशों के व्यापार पर पड़ना तय हैधर भारत और चीनी सेना के कमांडर पूर्वी लद्दाख में पेगोंग सो जैसे टकराव वाले स्थानों से पीछे हटने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने के लिए आज रविवार को नये सिरे से बातचीत कर रहे हैं. यह बैठक वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन की तरफ मोलदो  ने बताया कि कोर कमांडर स्तर की पांचवे चरण की वार्ता में मुख्य ध्यान टकराव वाले स्थानों से सैनिकों के पूरी तरह पीछे हटने और दोनों सेनाओं के पीछे के अड्डों से बलों एवं हथियारों को हटाने के लिए एक रूपरेखा तैयार करने पर होगा. सैनिकों के पीछे हटने की औपचारिक प्रक्रिया छह जुलाई को शुरू हुई थी जब क्षेत्र में तनाव कम करने के तरीकों पर एक दिन पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच लगभग दो घंटे फोन पर बातचीत हुई.चीनी सेना गलवान घाटी और टकराव वाले कुछ अन्य स्थानों से पहले ही पीछे हट चुकी है लेकिन भारत की मांग के अनुसार पेगोंग सो में फिंगर इलाकों से सैनिकों को वापस बुलाने की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है. भारत इस बात पर जोर देता रहा है कि चीन को फिंगर फोर और फिंगर एट के बीच वाले इलाकों से अपने सैनिकों को वापस बुलाना चाहिए. दोनों पक्षों के बीच 24 जुलाई को, सीमा मुद्दे पर एक और चरण की कूटनीतिक वार्ता हुई थी. वार्ता के बाद, विदेश मंत्रालय ने कहा था कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए द्विपक्षीय समझौते एवं प्रोटोकॉल के तहत एलएसी के पास से सैनिकों का जल्द एवं पूरी तरह पीछे हटना जरूरी है.। आज चीन के हालातों को देखते हुए पूरा वैन चीन के हर चीज पर लगना चाहिए। क्योंकि चीन का पूर्ण रूप से बहिष्कार करना अब भारत के लिए अति आवश्यक हो गया है और जो हालात विश्व के चल रहे हैं वह दिखाई देता है तृतीय विश्व युद्ध की तरफ विश्व बढ़ रहा है और यह तृतीय विश्व युद्ध भारत और चीन के युद्ध से आरंभ हो जाएगा क्योंकि चीन की जो हरकत है वह अपने अहंकार में वह वही करेगा जो पूर्व से करता आया है ।विस्तार वादी योजना जो हमारे प्रधानमंत्री जी ने स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि अब विस्तार वादी  योजना चीन की नहीं चल सकेगी क्योंकि अब भारत पहले से बहुत ही आधुनिक भारत है अब हर मोर्चे पर जवाब देने के लिए तैयार बैठा है, लेकिन भारत की नीत रही है पहले वह कभी लड़ाई नहीं करता किसी से जब कोई लड़ाई करता है तब उसको जवाब मुंह तोड़ के हमारी सेना देती है उसके परिणाम बहुत ही घातक होंगे क्योंकि भारत 1962 का नहीं है आज का 2020 भारत का है जिसमें चीन को उसकी हैसियत बताने के लिए हमारी सेना तैयार है। आज पूरा भारत 130 करोड़ की आबादी वाला भारत देश पूरे देश की जनता चाहती है कि अब चीन को सबक सिखाने का वक्त आ गया क्योंकि चीन का जो मकसद है जिस तरह से वह नेपाल के बॉर्डर में जो भारत की सीमा भी जूड़ती है चीन नेअपनी सेना को वहां पर भी दखलअंदाजी देना शुरू कर दिया है। विश्व के हालात जो चीन बनाकर तैयार कर रहा है अगर कहीं युद्ध के रास्ते बनकर तैयार हुए तो आप यह समझ लीजिए विश्व युद्ध होना पक्का है। क्योंकि जो देश परमाणु क्षमता संपन्न देश जो हैं वह सब युद्ध की लड़ाई में कूद पड़े तो परिणाम बहुत ही घातक होंगे क्योंकि वे परमाणु बम की लड़ाई होगी परमाणु बम हुआ है जो जापान में अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध के समय हिरोशिमा नागासाह में परमाणु बम छोड़ा था जिसमें लाखों लोगों की मृत्यु हुई थी आज भी वहां पर रेडिएशन उत्पन्न होते हैं और लोग अपंग विकलांग शरीर अंग बिहीन आज भी पैदा हो रहे हैं और वहां आज भी नेचुरलटी जो परमाणु बम जगने से पहले जो हिरोशिमा नागासाकी जो वातावरण था मानसून था प्राकृतिक   वह आज भी ठीक नहीं है। हिसाब लगा लीजिए अपनी परमाणु बम की लड़ाई शुरू हो गई है विश्व का क्या हाल होगा उसे आप समझ सकते हैं चीन जैसा गद्दार देश उसी राह पर चल रहा है जिसे अपनी शक्ति पर बहुत घमंड है ,उसका यह घमंड भारत बहुत जल्दी चकनाचूर करेगा धीरे धीरे चीन का पाप का घड़ा भरता जा रहा है। वह दिन दूर नहीं जब मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने रावण जैसे असुर को मारने के लिए जन्म लिया था ,वर्तमान समय में वही क्षण आज भारत की जनता को प्राप्त हो रहा है 5 अगस्त तारीख को राम जन्म भूमि की पूजा देश के प्रधानमंत्री द्वारा की जाएगी और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का भव्य मंदिर बनेगा। और रावण रूपी चीन का विनाश होगा वह दिन दूर नहींजब राम चीन जैसे असुर अहंकारी का अंत करेंगे उसी तरफ समय धीरे-धीरे चीन का अंत की तरफ बढ़ रहा है।

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