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Tuesday, August 25, 2020

कार्यकर्ताओं की उपेक्षा से गुटों में बंटी भाजपा, नेताओं के भी बदले तेवर

भाजपा के सांसद व विधायक होने के बावजूद नहीं बदली जिले की तस्वीर

सत्ताधारी दल के नेता विपक्षी नेताओं के साथ विवादित जमीनों की खरीद-फरोख्त जुटे

फतेहपुर, शमशाद खान । केन्द्र में सरकार बनाने के बाद पूर्ण बहुमत के साथ यूपी की सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी ने जनपद को छह की छह विधानसभा सीटों को क्लीन स्वीप करके इतिहास तो रच दिया। यहीं नहीं कार्यकर्ताओ के विश्वास ने भाजपा के विजय रथ को एक बार फिर से रुकने नहीं दिया और 2019 के लोकसभा चुनाव में केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति की संसदीय सीट पर दोबारा जीत हासिल करवाकर उन्हें संसद भेज दिया। कार्यकर्ताओ के उत्साह को देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा अपनी कैबिनेट में जनपद से दो विधायको को राज्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन कराया गया बल्कि केंद्र में सरकार बनने पर साध्वी निरंजन ज्योति के सिर एक बार फिर से मंत्री पद का ताज सजाया गया लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं ने जिस जोश व जुनून के साथ

चुनाव में लगकर नेताओं को कुर्सी तक पहुंचाया था आज वही कार्यकर्ता अपने आपको उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। हाल यह है कि भाजपा के असल कार्यकर्ता अपने वजूद व सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं जबकि गैर भाजपाई भाजपा सरकार में हावी हैं। नेताओं की सरपरस्ती में अपने सारे जायज-नाजायज काम करवाने में सफल हैं। कार्यकर्ताओं की यही टीस उन्हें अंदर ही अंदर खाए जा रही है। रही बात नेताओं की तो सत्ता के मद में चूर जनप्रतिनिधि आम जनता की समस्याओं व दिक्कतों से मुंह मोड़े हैं। उनका लोगों से संवाद नहीं हो रहा है। कार्यकर्ता उपेक्षित है जबकि इन्हीं कार्यकर्ताओं के भरोसे 2022 के विधानसभा चुनाव में सूबे की सत्ता पर भाजपा फिर से काबिज होने का सपना देख रही है। हकीकत में अगर देखा जाए तो आमजन अपनी मूलभूत जरूरतों सहित भ्रष्टाचार व महंगाई की मार झेल रहा है। युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है। केंद्र और प्रदेश सरकार अनगिनत योजनाएं चला सब कुछ भले ही दुरुस्त करने के दावे कर रही हो लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। गांव से लेकर शहरी व कस्बाई इलाकों में बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा, चिकित्सा जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए लोग परेशान हैं। पुलिसिया उत्पीड़न, बिगड़ी कानून व्यवस्था, आए दिन होने वाली चोरी हत्या, अपहरण, लूट, महिलाओं के साथ छेड़खानी व दुराचार की घटनाओं ने पिछली सरकारों के भी सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। लोगों के काम बिना पैसे के नहीं हो रहे हैं। इतना सब होने के बावजूद जनता को नेता रामराज का सपना दिखा रहे है। कोरोना संक्रमण के बहाने नेता व जनप्रतिनिधि घरों में कैद हैं। अपने फायदे के सारे काम उनके द्वारा किए जा रहे हैं। सांसद से लेकर जिले के सभी छह विधायक भारतीय जनता पार्टी व उसके समर्थित दल से होने के बावजूद जनपद को अब तक कोई खास पहचान नहीं मिल सकी है और न ही बदहाल व्यवस्था में सुधार हुआ है। पार्टी के नेताओं की गुटबाजी का ही नतीजा है कि विकास को लेकर सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का जन प्रतिनिधियों ने प्रयास ही कभी नहीं किया गया। इसी का नतीजा रहा कि जिला मुख्यालय तक की बिगड़ी सूरत को अब तक सुधारा नहीं जा सका है। गुटों में बंटे नेता एक दूसरे की काट कर रहे हैं। नेताओं के अपने काम तो होते रहते हैं लेकिन कार्यकर्ता अपना सम्मान नहीं बचा पा रहा है। उनके खुद के काम नहीं हो रहे हैं, नेता उनकी सुन नहीं रहे हैं। जबकि शीर्ष नेतृत्व ने एकजुट हो मिशन 2022 की घुट्टी पिलाना फिर शुरू कर दिया है। सत्ताधारी दल के कई छोटे व बड़े नेता तो बसपा व सपा के नेताओं के साथ विवादित जमीनों की खरीद-फरोख्त व उनके कब्जों में लगे हैं। इस बात के उजागर होने के बाद कई बार सरकार की किरकिरी भी हो चुकी है। इसके बाद भी ठोस कार्यवाही न होने से उनकी आदतों में कोई सुधार नहीं है। लोगों की समझ में यह नहीं आ रहा है कि वह जिस माहौल में रह रहे हैं वह बसपा, सपा या फिर भाजपा का शासनकाल है। जिस तरह से नेताओं ने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर रखी है उससे लगता है कि चुनाव में अब उनका वास्ता कार्यकर्ताओं से पड़ना ही नहीं है। नेता एक बार फिर राष्ट्रवाद व राम मंदिर के सहारे ही मोदी की आंधी में सूबे की सत्ता तक पहुंचने का सपना देख रहे हैं, जबकि यही हाल रहा तो परेशान जनता और उपेक्षित कार्यकर्ता की जुगलबंदी नया गुल खिला सकती है। जनप्रतिनिधियों एवं नेताओं को अपने अपमान का बदला लेने के लिये सबक सिखाने के लिए तैयार है।


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