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Tuesday, August 4, 2020

कलमकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने पर गुस्सा

उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
मामले की जांच अन्य राज्य की पुलिस व सीबीआई से कराने की मांग
 
बांदा, के एस दुबे । उत्तराखण्ड सरकार द्वारा पत्रकारों की आवाज दबाने के लिये मुख्यमंत्री द्वारा पत्रकारों पर गैर कानूनी तरीके से राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कराये जाने पर पत्रकारों में आक्रोश है। मंगलवार को उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर मामले की जांच अन्य किसी राज्य की पुलिस व सीबीआई से कराये जाने की मांग की है।
जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते एसोसिएशन के अध्यक्ष व अन्य
राष्ट्रपति को भेजे गये ज्ञापन में उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सीपी तिवारी ने बताया कि मीडिया लोकतंत्र का चैथा स्तम्भ है। भारत में मीडिया ने लोकतांत्रिक परम्पराओं और गणतंत्र की रक्षा के लिये हमेशा महत्वपूर्ण योगदान दिया है। लोकतंत्र के रक्षक और समाज के सजग प्रहरी के रूप में पत्रकार अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहे है। लेकिन गत वर्षो से उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत लगातार पत्रकारों की आवाज रोकते आ रहे है। पत्रकारों के उपर राजद्रोह जैसी घाराओं का सराहा लेकर पत्रकारों पर मुकदमा दर्ज करा रहे है। जो कि लोकतंत्र के खिलाफ है। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत निजी तौर पर संगीन धाराओं के तहत पुलिस पर दबाव बनाकर कई पत्रकारों को जेल भेज चुके है। बताया कि उत्तराखण्ड के वरिष्ठ और निजी न्यूज चैनल के मुख्य सम्पादक उमेश कुमार और वरिष्ठ पत्रकार राजेश वर्मा एवं एसपी सेमवाल व अन्य लोगों के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है। उन्होने मांग की है कि मामले की किसी अन्य राज्य की पुलिस से जांच कराई जाये और पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराई जाये। इस दौरान आमिर, ज्ञानेन्द्र शर्मा, मनोज गुप्ता, आनन्द तिवारी, बी डी मिश्रा, बसंत गुप्ता, इलियास खान, राजनारायण शीलू, अयाज खान, मनोज गोस्वामी, पुष्पक आदि उपस्थित रहे।

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