नहीं मिला गांव में रोजगार, पलायन को मजबूर हुए प्रवासी - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Saturday, August 8, 2020

नहीं मिला गांव में रोजगार, पलायन को मजबूर हुए प्रवासी

सरकार के दावे हवा हवाई, मनरेगा नहीं बन सकी सहारा

फतेहपुर, शमशाद खान । कोरोना आपदा का काल मजदूरों के लिये मुसीबतों का पहाड़ साबित हो रहा है। रोजगार की तलाश में महागनरो को गये मजदूर लॉकडाउन में कामकाज ठप हो जाने के बाद गांव वापस लौटने को मजबूर हो गये। सरकार द्वारा घोषित लॉकडाउन का यह कदम कोरोना महामारी के फैलने से रोकने के लिये एक अहम निर्णय था। लॉकडाउन के दौरान महानगरों से गांव वापस आये प्रवासी मजदूरों का एक बार फिर से पलायन जारी हो गया है। महानगरो में रोजगार व मजदूरी जैसे पेशे से जुड़े मजदूरो ने कोरोना आपदा के दौरान रोजगार बन्द होने के दौरान खाने पीने तक के लाले पड़ने के बाद लाचार होकर साधन न मिलने पर ट्रकों, लोडरों, बाइक और यहां तक कि साइकिल व पैदल ही अपने गांव वापस लौटना शुरू कर दिया था। भूख प्यास से परेशान अपना सब कुछ छोड़कर पैदल ही गांव लौटते मजदूरों को देखकर हर हृदय द्रवित हो उठा। समाजसेवियों द्वारा मदद भी दी गयी। कइयों की जान भी चली गयी। कोरोना आपदा के दौरान केंद्र सरकार द्वारा प्रवासी मजदूरों के लिये राज्यो व उद्योग जगत से नीति बनाये जाने को कहा था। साथ ही प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रवासी श्रमिकों के लिये नई उद्योग नीति शुरू करने के साथ ही उनके पुनर्वास के लिये कार्य योजना बनाये जाने के भी निर्देश दिए गए थे। प्रवासी श्रमिको को रोजगार के लिये मनरेगा को एक बड़ी योजना के रूप में प्रोजेक्ट किया

स्थानीय रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में सवार होते प्रवासी मजदूर।
गया था। रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिये सरकार द्वारा बड़ी संख्या में ग्राम सभा स्तर पर योजनाओ को शुरू करके रोजगार से जोड़ा भी गया था। सरकार की इस योजना का प्रवासियों द्वारा लाभ तो लिया गया लेकिन इसे रोजगार के रूप में प्रवासियों द्वारा अपनाया नहीं जा सका। ऐसे में रोजगार की तलाश में प्रवासियों को एक बार फिर से दिल्ली, मुम्बई, गुजरात, पंजाब सरीखे महानगरों का रुक करना पड़ रहा है। सरकार द्वारा हुनरमंद श्रमिकों के लिये प्रदेश में ही रोजगार की व्यवस्था किये जाने के बाद भी प्रवासियों के वापस लौटने का निर्णय बेहद चैकाने वाला है। कोरोना आपदा की शुरुआती समय मंे अपनी बसी बसाई गृहस्थी छोड़कर कोई पैदल तो कोई नंगे पैरों से गांव पहुंचा था। तमाम लोग ट्रकों निजी साधनों साइकिल व बाइक से भी गांव पहुँचे थे। अपनी परेशानियों को बयांन करते हुए प्रवासियों ने दोबारा महानगरों का रुख न करने को कहा था लेकिन गांव में भी बेरोजगारी का स्तर बढ़ने और महानगरों में कोरोना का प्रकोप कम होंने पर एक बाद फिर से श्रमिक रोजगार की तलाश में महानगरों की ओर वापस लौट रहे है। जनपद की सभी तहसीलों से दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान जैसे महानगरो की ओर जाने वाली ट्रेनों में सफर करने वाले प्रवासी मजदूरों की बढ़ती संख्या उनके पलायन को बयान कर रही है। महानगरों में निजी कंपनियों में काम करने वाले श्रमिकों के अलावा परिवार सहित रहकर रोजगार करने वाले मजदूरों के झुंड को प्रतिदिन रेलवे स्टेशन पर देखा जा सकता है। देश भर में कोरोना महामारी का दौर जारी है। लगातार कोरोना मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही। इसके बाद भी रोजगार के लिये जनपद स्टेशन पर ठहराव लेकर मेट्रो शहर की ओर जाने वाली सभी ट्रेनों में प्रवासी मजदूरों की बड़ी संख्या रोजाना महानगरों का रुख कर रही है। मजदूरों का यह पलायन कोरोना संकमण की वजह बनने के अलावा प्रदेश सरकार द्वारा मजदूरों को अपने गांव में ही काम उपलब्ध कराने के दावों की पोल खोलने के लिये काफी है। वहीं पलायन को मजबूर मजदूरों का कहना रहा कि अपना सब कुछ छोड़कर वापस आने के बाद गांव में एक बार फिर से रोजगार के लिये जूझना पड़ रहा है। जबकि महानगरो में एक बार फिर से काम शुरू हो चुका है। ऐसे में दोबारा से रोजगार और बेहतर भविष्य के लिये उन्हें दोबारा शहरों का रुख करना पड़ रहा है।


No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages