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Sunday, August 9, 2020

सभ्य और सभ्यता पर संकट ...........................

देवेश प्रताप सिंह राठौर,

(वरिष्ठ पत्रकार)

............ आज मानव पूर्ण रूप से सभ्य और सभ्यता से हटता जा रहा है, सिर्फउसे प्रतिशोध एवं अपनी शक्ति को बढ़ाने में मुख्य रूप से व्यवस्था पूर्ण रूप से रखना चाहता है ईश्वर के प्रति आस्था तो है पर अपने अन्याय पर वह चलते रहते हैं। क्योंकि उनका वर्तमान इतना अच्छा है भविष्य की फिक्र नहीं है की अंत कितना घातक को खतरनाक होगा जब  यह चीज मस्तिष्क में प्रवेश कर जाएगी तो वह आस्था और विश्वास के साथ सभ्य बनने का प्रयास करेगा ,बुद्धिमान लोग कहते हैं कि अतीत में मानव समाज पर अनेक संकट आए। दरअसल, जहां कहीं भी गति है, वहां तो संघर्ष होगा ही। अतीत में भी चलने के क्रम में बाधाएं आई हैं। सभ्यता के विभिन्न स्तरों पर संकट आए हैं। शिक्षा क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों में भी संकट आए। किंतु आजकल पूरा मानव समाज ही सभ्यता पर आए संकट को ङोल रहा है। मानव समाज को अभी निर्णय करना है कि उसे आगे बढ़ना है या पीछे की ओर जाना है। यदि असहिष्णुता को उत्साहित किया जाता है, तो मानवता का कोई भविष्य नहीं है। भविष्य अंधकारपूर्ण होगा, सभी दिन के लिए ताले लग जाएंगे। किंतु मैं निराशावादी नहीं हूं, मैं हमेशा आशावादी रहा हूं। मैं चाहता हूं कि सभी आशावादी

हों। और मैं यह भी चाहता हूं कि मानवता पर आए इस संकट के विरुद्ध वे संघर्ष करें और सफल हों।मुझे पूरा विश्वास है कि सभी आशावादी होंगे और मानवता की रक्षा करना सबका कर्तव्य है। मानवता की रक्षा करने में सभी समर्थ होंगे, क्योंकि मेरी ही तरह आप लोग भी आशावादी हैं। आपको यह जानना चाहिए कि महान या अच्छे लोग संख्या में कम हैं, उनकी संख्या बहुत ज्यादा नहीं है। वे करोड़ों या अरबों में नहीं हैं। वे हमेशा संख्या में थोड़े-से होते हैं, मुट्ठी भर। और ये थोड़े से लोग मानव समाज के प्रशंसा वाहक हैं, अग्रणी हैं, मानव समाज के अग्रदूत हैं।अत: मानव समाज की रक्षा करना आपका कर्तव्य है। और उन लोगों का भी, जो अपनी जिम्मेदारी उठाने में असमर्थ हैं। उनकी भी जिम्मेदारी आपको अपने कंधे पर लेनी होगी। यह स्मरण रखना चाहिए कि आध्यात्मिक साधक का जीवन एक मिशन है, उसका संपूर्ण जीवन और अस्तित्व ही मिशन है। और आपका मिशन है़, इस संकट से मानवता की रक्षा करना। मैं आशा करता हूं कि इस कार्य में सभी सफल होंगे। मैं केवल आशा ही नहीं करता हूं, बल्कि मेरा विश्वास है कि आप अवश्य सफल होंगे। आज हम सब जानते हैं अन्याय अन्याायी का अंत सुनिश्चिित है। फिर भी हम उसके साथ रहते हैं और साथ देते हैं क्यों क्योंकि हमारा आपका सबका कहीं ना कहीं कुछ स्वार्थ बना रहता है जिस दिन हमारेे चाहत और स्वार्थ  पर अंकुश लगेगा इंसान इंसान में अपने आप स्वाभाविक बदलाव दिखाई देगा, क्योंकि हम सब जानते हैं बुरे काम का बुरा नतीजााा होता  एक न एक दिन उसे अपने कर्मों को किसीी रू में जीवन के बदलाव में आने पर भुगतना होता है यह आम बात है स्वाभाविक तौर पर इंसान इंसान का प्याासा बैठा है जानता है कि एक नााााा एक दिन हमें बुरे कर्मों का फल अवश्यय भुगतना है फिर भी वह गलत रास्ते पर चलता है। जब तक समझ में आने आने प्रयास करता है तब तक बहुत देर होोो चुकी हो है , इसलिए वही करनाा चाहि जो भविष्य मेंें पछता ना पड़े सर्वजन सुखाय सर्वजन हिताय की सोच के साथ कार्य करना चाहिए और सभी का सम्मान करते हुए ईश्वर के प्रतिि पूर्ण आस्था केेे साथ कार्य करते रहना है सत्य के रास्ते पर चलना  है।

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