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Saturday, August 29, 2020

हवा में घुल रहा ईंट-भट्ठों का जहरीला धुआं

मानक विहीन चल रहे भट्ठे

खागा-फतेहपुर, शमशाद खान । स्थानीय कस्बा समेत समूचे तहसील क्षेत्र में कई ईंट-भट्टे मानक को दर किनार कर संचालित किए जा रहे हैं। इसे विभागीय कृपा कहें या भट्ठा संचालक का अवैध तरीका। तहसील क्षेत्र के हथगाम, ऐरायां, विजयीपुर, धाता ब्लाक क्षेत्रों को मिलाकर कुल 115 भट्ठों का संचालन किया जा रहा है। ईंट-भट्ठों की चिमनियों से निकलने वाले धुएं के साथ कई खतरनाक घटक हवा में मिलकर वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। कुछ भट्ठों में ईंट को पकाने के लिए भट्ठा संचालक रबर का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। कोयले के बजाय ईंट-भट्ठों में रबडर के टायरों व लकड़ी को खरीदकर जलाया जाता है। ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि यह कोयले से काफी सस्ता पड़ता है और इसे ये ईंधन के रूप में प्रयोग करते हैं।

भट्ठे की चिमनी से निकलता धुआं। फाइल फोटो

इन ईंट-भट्ठों से निकलने वाला धुआं वातावरण को प्रदूषित कर जहर घोल रहा है। नियम के मुताबिक जहां शिक्षण संस्थान, धार्मिक स्थल, बाग-बगीचे , बस्ती हो या हाइवे से 800 मीटर की दूरी हो। इन चीजों को ध्यान में रखकर ईंट-भट्ठा का संचालन करना चाहिए। भट्ठों का संचालन से पहले जिला खनन विभाग से अनुज्ञप्ति लेने के साथ-साथ पर्यावरण विभाग से एनओसी लेने की अनिवार्य शर्तें हैं, लेकिन तहसील क्षेत्र में संचालित कई भट्ठे बिना एनओसी के संचालित किए जा रहे हैं। सबसे बुरी हालत ग्रामीणांचलों के हैं, जहां पर्यावरण खतरे के साथ ही हरियाली को भी बड़ा  नुकसान पहुंचा जा रहा है। फलदार पेड़ों में फल नही आते हैं, ऊंचाई वाले पेड़ो केला, आम के बागों पर इसका खासा असर पड़ा है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार

खागा-फतेहपुर। मानक पूरा करने वाले को ही ईंट-भट्ठा संचालन के लिए लाइसेंस दिया गया है। सर्वे कराया जा रहा है। इसके बाद भी अगर कोई गड़बड़ी मिलती है तो संचालित भट्ठा संचालकों को नोटिस देकर कार्रवाई की जाएगी। मो. हारून अभियंता जिला पंचायत।


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