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Thursday, August 6, 2020

खत्म होने की कगार पर पुराने कुओं का अस्तित्व

कमासिन, के एस दुबे । पुराने समय में कुंओ तालाबों का अस्तित्व होता था। लोगों की आस्था के बीच इन्हें पूजा भी जाता था। आज आधुनिक भौतिकता वादी युग में समय के बदलाव के साथ जहां तालाब कुंओ का अस्तित्व विहीन होते जा रहे हैं। वही लोगों की तालाबों में कब्जा करने की मानसिकता के साथ ही कुओं का भी अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर है।

कस्बे के समाजसेवी बृजेश सिंह कहते हैं कि पुरातन काल से गांवों में तालाबों कुओं का एक अलग ही महत्व था। यह लोगों में आस्था के केंद्र बने होने के कारण इनकी पूजा-अर्चना भी की जाती थी। लेकिन समय के बदलाव के साथ भौतिकतावादी की चमक धमक में कुआं तालाबों पर खतरा मंडराने लगा। लोगों की भावनाएं बदल गई तालाबों पर अतिक्रमण की होड शुरू हो गयी जो अब भी रुकने का नाम नहीं ले रही। आस्था के प्रतीक कुआं रखरखाव के अभाव में जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं। उन्होंने बताया कि कस्बे के अंदर बिनोवा इंटर कालेज के

कमासिन में दुर्दशा का शिकार कुआं
समीप डाकखाने के बगल में बना कुआं से मुहल्ले के सभी लोगों के पीने के पानी की व्यवस्था सुनिश्चित होती थी। रखरखाव के अभाव में यही कुआं धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोता चला गया। जर्जर हालत में गिरने की स्थिति में खड़ा है। इसके मरम्मती करण के लिए सभी उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर कई बार अवगत कराया जा चुका है। लेकिन आज तक इसके पुनरुद्धार हेतु कदम नहीं उठाए गए जोकि जनहित में आवश्यक है। बताते हैं कि कस्बे में मुराईन कुआं समदा कुआं मंदिर कुआं व डाकखाने के पास बनेको से पूरे कस्बे को पीने का पानी मुहैया होता था।

आज सभी कुआं जर्जर हालत में खड़े अपने पुनरुद्धार की बाट जोह रहे हैं। समय रहते यदि ध्यान नहीं दिया गया तो इनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। एक दर्जन से ज्यादा लोगों ने स्वहस्ताक्षरित पत्र जिलाधिकारी को भेज कर मांग किया है कि अस्तित्व खो रहे कुओं के जीर्णोद्धार हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं। ताकि पुरातन कालीन इन कुंओं वजूद कायम रह सके। 


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