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Sunday, August 2, 2020

झांसी यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर मुन्ना तिवारी की नियुक्ति के संदर्भ .....

(आमजा भारत)

झांसी आशु यूनिवर्सिटी में मुन्ना तिवारी के हिंदी विभाग में रोष है प्रोफेसर पद पर नियुक्त के संबंध में कुछ अनियमितताएं हुई हैं जिस संदर्भ में सूत्रों द्वारा पता चला है इसके  इसके पूर्व उन्होंने जहां पर नियुक्ति की होनी थी वहां पर कुछ कमी के कारण निरस्त कर दी गई थी नियुक्ति और झांसी यूनिवर्सिटी में उनकी नियुक्ति हो गई इस पर प्रश्न चिन्ह उनके द्वारा उनके साथियों ने लगाया है जो मैं संपूर्ण दस्तावेज के साथ कह रहे हैं और यह भी  और यह भी जानकारी प्राप्त हुई है यह केस हाईकोर्ट में चल रहा है जब कोर्ट में केस चल रहा है कोर्ट जो भी डिसीजन देगी और सर वह पर है लेकिन यह नियुक्त सही हुई या गलत हुई है इसका फैसला कोर्ट करेगी लेकिन हम इतना जरूर कहेंगे क्योंकि आजकल जो जांच प्रक्रिया उत्तर प्रदेश सरकार राज्य स्तर से करा रही है सरकारी विभाग हो शिक्षा विभाग को सम में आज अपनी डिग्री से संबंधित है पूर्ण जानकारी पुनः द्वारा हर कर्मचारी की उत्तर प्रदेश
सरकार योगी जी की मंगाने का कार्य कर रही है जिससे गलत लोग गलत डिग्री धारक तो नौकरी कर रहे हैं उनको पकड़ा जा सके सही लोग जो वंचित हैं उन्हें नौकरी प्राप्त हो जिनके पास डिग्री भी है परंतु किन्हीं कारणों से उनका नियुक्ति नहीं हो पाती है।अनामिका शुक्ला के नाम से फर्जी नियुक्तियों के पकड़ में आने के बाद शासन प्राथमिक से लेकर विश्वविद्यालय तक के शिक्षकों की जांच करा रहा है। इस क्रम में शिकायतकर्ता डॉ राकेश नारायण द्विवेदी ने झांसी यूनिवर्सिटी के  कुलपति,एवम् कुलसचिव और जांच समिति को भेजे अपने पत्र में कहा कि विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में शिक्षक डॉ मुन्ना तिवारी की नियुक्ति अर्हता न होते हुए भी कर ली गयी। उस समय डॉ मुन्ना ने पीएचडी शोध छात्रों का गाइडेंस नहीं किया था, जबकि यह अर्हता एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिये अनिवार्य थी।  बाबा साहेब अम्बडेकर विश्वविद्यालय लखनऊ से एसोसिएट प्रोफेसर पद हेतु डॉ मुन्ना तिवारी का किया आवेदन पत्र पीएचडी गाइडेंस न होने के कारण निरस्त हो गया, जबकि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में इसी पद पर उनका चयन भी हो गया। जिस आधार पर वे इस विश्वविद्यालय में नियुक्त हुए और सीधे विभागाध्यक्ष बने। इस  नियुक्ति के आधार को उनकी बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के नियुक्ति के छह माह बाद लखनऊ के अम्बेडकर विश्वविद्यालय ने गलत माना। दो विश्वविद्यालयों में नियुक्ति के अलग अलग मानक नहीं हो सकते। इससे स्पष्ट है कि बुंदेलखंड विवि में नियुक्ति अवैध थी।उल्लेखनीय है कि जिस समय हिंदी विभाग में शिक्षकों की भर्ती हुई, उस समय के कुलपति प्रोफेसर सुरेंद्र दुबे मुन्ना तिवारी के गृहक्षेत्र के ही थे। उन्होंने मुन्ना तिवारी को  गोरखपुर विश्वविद्यालय में पढ़ाया भी है। कुलपति से सांठगांठ करके अपनी नियुक्ति करा ली। उन्होंने रिसर्च प्रोजेक्ट को पीएचडी गाइडेंस के समतुल्य बताकर विश्वविद्यालय को गुमराह कर दिया, जबकि ऐसी समतुल्यता न यूजीसी, न शासन और न बुंदेलखंड विश्वविद्यालय किसी ने निर्धारित नहीं की है।  उनकी सांठगांठ का प्रमाण है कि 16 और 17 अक्टूबर 2016 को साक्षात्कार हुए, 18 अक्टूबर को  कार्य परिषद की 3 बजे अपराह्न हुई बैठक से अनुमोदित होकर इस नियुक्ति के
साक्षात्कार का परिणाम घोषित हुआ। उसी दिन चार सहायक प्रोफेसरों ने और अगले दिन यानि 19 अक्टूबर 2016 को डॉ मुन्ना तिवारी ने बुंदेलखंड विवि झांसी में कार्यभार ग्रहण कर लिया। डॉ मुन्ना तिवारी इससे पहले कुशीनगर जिले के एक अशासकीय अनुदान प्राप्त कॉलेज में इसी पद पर कार्यरत थे। वहां से वे  अक्टूबर को रिलीव हुए और उसी दिन झांसी आकर जॉइन हुए, कोई व्यक्ति कुशीनगर से झांसी तीन चार घंटे में कैसे पहुच सकता है, जबकि वायुयान की सुविधा भी न हो।  यह सब पत्रावली में जिस प्रकार से  हुआ हो, पर वे  अक्टूबर को झांसी में साक्षात्कार देकर वापस अपने गृह और कार्यस्थल पर गए ही नहीं। वे विश्वविद्यालय के बगल में होटल शीला श्री में साक्षात्कार देने से लेकर नियुक्ति पर्यंत 19 अक्टूबर तक ठहरे रहे। जाहिर है  उन्हें पता था कि रिजल्ट उनके पक्ष में आने वाला है। 
शिकायतकर्ता की मांग है कि यह अवैध नियुक्ति निरस्त की जाए और योग्य शिक्षक का चयन किया जाय डॉ मुन्ना तिवारी का नाम है। पीएचडी गाइडेंस न होने से वहां इनका आवेदन निरस्त हुआ, पर उससे 6 माह पूर्व झांसी में।नियुक्ति पा गए है। प्रश्न यह उठता है जब एक यूनिवर्सिटी इनकी नियुक्ति मुन्ना तिवारी जी की कुछ कमियों की वजह से निरस्त कर देती है और दूसरी यूनिवर्सिटी झांसी यूनिवर्सिटी नियुक्ति दे देती है क्या उत्तर प्रदेश में जो भी डिग्री कॉलेज हैं यूनिवर्सिटी हैं क्या उनके नियम अलग-अलग हैं या अलग नियम नहीं है तो एक जगह निरस्त हो रहा है नियुक्ति और एक जगह नियुक्ति दी जा रही है यह बहुत बड़ा प्रश्न है इस प्रश्न को सुलझाने के लिए हाईकोर्ट में कुछ लोगों के द्वारा रिट दायर की गई है जिससे सही योग्य व्यक्ति जो बेरोजगार बैठे हैं जिनके पास संपूर्ण क्रिया भी हैं वह नौकरी से वंचित हैं जो लोग कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ भ्रांतियां हैं वह नौकरी पर कार्य कर रहे हैं यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है इस प्रश्न को कोर्ट द्वारा ही हल हो सकता है क्योंकि कोर्ट में ऑलरेडी  केस हाई कोर्ट में चल रहा है ऐसी जानकारी प्राप्त हुई है। साथ-साथ शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है की झांसी यूनिवर्सिटी के कुलसचिव और कुलपति किसी बात को गंभीरता से नहीं लेते हैं और ना ही किसी संदर्भ में चाहे कोई भी कार्य हो उसका निस्तारण कालेज स्तर के अंदर वाले से लेकर बहुत से लोग कार्य का निस्तारण नहीं करते हैं। झांसी यूनिवर्सिटी के बहुत से स्टाफ ने बताया है कि जब से झांसी में वर्तमान कुलपति जो इस समय कार्यरत हैं उस दिन से शिक्षा के साथ सारे नियम कानून तथा कॉलेज में अंकुश नाम की चीज दिखाई नहीं देती है बहुत से कार पेंटिंग पर चल रहे हैं ऐसा झांसी यूनिवर्सिटी के द्वारा प्राप्त हुआ है । हम सरकार से चाहेंगे हम सरकार से चाहेंगे उक्त संदर्भ में प्रोफेसर मुन्ना तिवारी के संदर्भ में निष्पक्षता पूर्ण जांच हो जो दोषियों को सजा प्राप्त हो क्योंकि जिसका हक है उसको हक मिलना जरूरी है ऐसी न्यायिक प्रक्रिया होनी चाहिए और जानकारी के मुताबिक हाई कोर्ट में केस चल रहा है जब कोर्ट जो डिसीजन देगा और सर वह पर होगा वह सबको मान्य होगा दो दूध का दूध पानी का पानी सब अलग करके निर्णय सुनाएगा , आज की कोर्ट में निष्पक्षता से कार हो रहे हैं। इस संदर्भ में झांसी के यूनिवर्सिटी के कुलपति सेवन से वार्ता करना चाहा परंतु फोन से बात नहीं हो सकी कई बार फोन मिलाया शुरुआती तौर पर उन्होंने बात फोन से मेरी हुई जिससे मुन्ना तिवारी के संदर्भ में जानना चाहा उन्होंने बिना बात सुने फोन काट दिया इससे स्पष्ट होता है की मुन्ना तिवारी के पक्ष में कुलपति झांसी यूनिवर्सिटी के साथ हैं जबकि उक्त केस हाई कोर्ट में चल रहा है एक यूनिवर्सिटी ने नियुक्ति नहीं दी किसी कमी के कारण और दूसरे इंवर्सिटी में नियुक्ति दे दी यह एक विषय कहीं ना कहीं से दर्शाता है कि कहीं ना कहीं त्रुटि अनुशासनहीनता हुई है तभी उक्त केस कोर्ट तक गया है बहुत से ऐसे केस हमारे सामने आए हैं इटावा काय इंटर कॉलेज में एक लोग काफी दिनों से पढ़ा रहे थे लेक्चरर थे अभी एक डेढ़ साल पहले जांच हुई जिसमें उनकी डिग्रियों के संबंध में कुछ कमी पाई गई जिससे तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया ऐसे इटावा का एक मामला हमारे संज्ञान में आया है जिस पर सरकार ने सख्त निर्णय देकर बर्खास्त कर दिया है।

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