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Tuesday, August 25, 2020

जागरूकता से होगा बदलाव, असाध्य नहीं है टीबी: डीएम

पिछड़े क्षेत्रों में लोगों व मजदूरों की कराएं जांच

जिला स्तरीय टीबी फोरम समिति की बैठक आयोजित 

बांदा, के एस दुबे । जिला स्तरीय टीबी फोरम समिति की बैठक में जिलाधिकारी अमित सिंह बंसल ने कहा है कि टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है। जागरूकता न होने के कारण लोग इस बीमारी से घबराते हैं। प्रचार-प्रसार से ही लोगों में जागरूकता आएगी। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर इस बीमारी की चपेट में आने से बचा जा सकता है। 

कलक्ट्रेट सभागार में मंगलवार को आयोजित टीबी फोरम समिति की बैठक में डीएम ने कहा कि ग्राम प्रधानों के नाम पत्राचार कर उनसे अपने गांवों में टीबी रोग की खोज के लिए अपील की जाएगी। इसके अतिरिक्त ईंट भट्ठों,

बैठक को संबोधित करते जिलाधिकारी अमित सिंह बंसल

कालीन बुनकरों, खदान सहित स्लम एरिया व पिछड़े क्षेत्रों में अभियान के रूप में सभी मजदूरों की जांच कराई जाए। जिला क्षय रोग अधिकारी डा.एमसी पाल ने कहा टीबी मुंह के रास्ते फैलने वाली एक संक्रामक बीमारी है। जो किसी संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से दूसरे व्यक्ति के फेफड़े में पहुंचकर उसे भी संक्रमित कर देती है। यदि सही समय पर इलाज नहीं किया गया तो संक्रमित व्यक्ति 10 से 15 नए रोगी बना देता है। शहर के मर्दन नाका निवासी राम लखन ने बताया कि 3 साल पहले उसे पता चला कि वह टीबी रोग से ग्रसित है। बीमारी का पता चलते ही समाज और मोहल्ले वासियों ने उससे दूरी बना ली। लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों के सहयोग और निरंतर 2 साल तक चले इलाज के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है। जिला विकास अधिकारी केके पांडेय ने कहा कि जिला अस्पतालों में जांच कराकर नियमित दवाइयों दी जाए ताकि बीमारी दूर रहे। प्राइवेट चिकित्सक टीबी मरीज चिन्हित कर उनकी सूचना नियमित रूप से देना सुनिश्चित करें। जिला समन्वयक प्रदीप कुमार ने बताया कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में यह बीमारी अधिक पायी जाती है। ई-रिक्शा पर लाउडस्पीकर के माध्यम से तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पंपलेट, होर्डिंग्स, बैनर तथा समाचार पत्रों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। बैठक में टीबी रोग से पूरी तरह मुक्त हो चुके लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। प्रोजक्ट अक्षय समन्वयक अतुल गुप्ता, गणेश प्रसाद, आलोक निगम, रमेश कुमार, रामलखन, अमित, ज्योति सहित कई एनजीओ के प्रतिनिधि शामिल रहे।


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